मंगलवार, 5 मई 2020

बाजार में भीड़ थी,आप यूं ही क्या देखने गए थे,भीड़ बढाने:कहानी * करणीदानसिंह राजपूत *


देश के समाज के कुछ शुभ चिंतक मुझे मिले। एक ही गली में। रोका और चिंता प्रगट करते एक जैसा ही सवाल किया या सूचना दी।बाजारों में बड़ी भीड़ थी। ऐसा हाल रहा तो कोरोना कहीं से भी आ धमकेगा।यह ग्रीन जोन एकदम से लाल जोन में बदल जाएगा।

चिंतातुर लोगों ने बाजारों के नाम भी बता दिए। उनकी चिंता मेरी भी चिंता थी। पत्रकार के कारण मैं अलग तो नहीं हो सकता। एक ही गली में पांच सात रोकें और पूछें तो बात गंभीर और सोचने की तो हो ही जाती है।

सभी अलग अलग जगह मिले थे,लेकिन मैंने सभी से एक जैसी जानकारी ली।

1-आप क्या कुछ लेने बाजार गए थे?

उत्तर- कुछ भी लेने तो नहीं गया था।लोकडाउन में बंद पड़े बाजार चार मई को खुलने थे,सो बस देखने चला गया था।

2- जब बाजार चले ही गए तो कुछ ले ही आते। घर में खाने पीने के काम आ जाता।

उत्तर- लाया तो कुछ भी नहीं।बताया ना देखने ही गया था।खाने पीने का सामान तो किराने की दुकान से पहले ही ले आए थे।

3- दुपहिया पर गए थे?

उत्तर- नहीं। मैं तो पैदल ही गया था। दुपहिया तो बेटा ले गया था।

4- बेटा क्या कुछ लाया होगा? 

उत्तर- नहीं।वह भी बाजार को देखने ही गया था कि इतने दिन बाद खुले हैं तो कैसी हलचल है। उसने भी आठ दस सड़कों पर चक्कर लगाया था जो घर आकर बताया कि भीड़ थी।

5- आप एक आटा,दाल,चीनी लेने गए थे,ये तो एक ही जगह मिल गई थी।फिर वो दूसरे बाजारों में कैसे निकल गए?

उत्तर- हां,किराने की दुकान से सामान लिया था। उससे पहले दूसरे बाजारों का मजमा भी देख आया। क्या रौनक शौनक है,देखी। सामान लेकर सीधा घर आ गया।

सभी देश समाज के शुभ चिंतक। इन्हें दुकानदारों ने बुलाया नहीं था कि बाजार खुल रहे हैं, रौनक शौनक देखने आओ। ये कोरोना की चिंता में बाजारों का हाल देखने गए।

6-मैने कहा अपने शहर में कितने वार्ड हैं?

उत्तर- पचास हैं।

7- हरेक वार्ड में कितनी गलियां और सड़कें होंगी?

उत्तर- यह तो आपके ज्यादा मालूम होगा।आप पत्रकार हैं। वैसे हर वार्ड में पांच सात तो गलियां है।सड़कें भी हैं।

8- मतलब, पूरे शहर में दो सौ से ज्यादा गलियां हैं और सड़कें भी हैं।

सबसे पूछने और उत्तर सुनने के बाद मेरी पत्रकारिता इस तरह से शुरू हुई।

सभी से अलग अलग जगह भेंट हुई थी और वहीं पर मैंने जो कहा,आप सभी जान लीजिए।

* आप बाजार बिना काम के रौनक शौनक देखने चले गए। आपका बेटा दुपहिया पर सवार होकर चार पांच बाजारों का चक्कर लगा आया योंही।

आप किराना लेने गए और दूसरे बाजारों में भी घूम आए।

अपनी एक गली से पांच जनें बाजारों में बस तमाशा देखने निकले। शहर की हर गली से गणित के हिसाब से करीब 300 लोग बिना काम के बाजारों में पहूंचे। सभी ने माना कि हां इतने तो पहुंच ही गए होंगे।

मैं बोला। यह तो बहुत कम करके ही बताया है। असल में इससे दुगने तिगुने पहुंचे हैं। मुझ अकेले से ही पांच सात मिले हैं तो और लोगों से भी मिले होंगे।

मैं बोला कि यह मानें कि अपने छोटे शहर में 1 हजार लोग बिना काम के बाजारों में पहुंचे तो बड़े शहरों में तो दस पन्द्रह हजार पहुंचे। बस यही भीड़ थी। आप बाजार नहीं जाते तो भीड़ नहीं होती।

सभी ने यह माना कि बिना काम के बाजार में नहीं जाना चाहिए था।

मैं बोला कि बस अब आगे से बिना काम के बाजार में मत जाना। कोशिश करना की दूर बड़़ी दुकान पर जाने के बजाय घर के पास वाली दुकान से सामान खरीद लें। हो सके तो पड़ोसी बाजार जाता हो तो आवश्यकता का सामान उनसे मंगवा लें तो एक एक कर अनेक की भीड़ नहीं होगी।

बस यह कोरोना वायरस संकट के समय तक सरकारी गाइड लाईन का पालन करलें। 

इसके बाद बाजारों, पार्कों की रौनक शौनक देखते रहेंगे।**



करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़.

94143 81356.

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- करणीदानसिंह राजपूत।

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