मंगलवार, 12 मई 2020

मालाएं पहनने और पहनाने वालों से कोरोना पूछेगा, तुम्हारे लगूं या ना लगूं


* करणीदानसिंह राजपूत*
सम्मान करने और सम्मान कराने वालों के फोटो सोशल साइट्स और अखबारों में नहीं छपे तो क्या मजा है? सेवा करने और सम्मान करने में।
सरकार भी सारे दिन प्रेरित करती है कि कोरोना वायरस संक्रमण बचाव में लगे डाक्टरों, पुलिस आदि का सम्मान करें।
सम्मान करने की शुरुआत में पुष्प वर्षा करने के समाचार मिले। पुष्प वर्षा में लोकडाउन कानून एक दूसरे से दूरी रखने का पालन हो जाता ताकि संक्रमण नहीं फैल सके। बस,इसमेँ मजा नहीं आया। फोटो छप नहीं रहे तब कैसा सम्मान।
सम्मान करने वालों ने मालाएं पहनाना शुरू किया। सम्मानित होने वालों ने भी मालाएं पहनना शुरू किया। इसमें सोशल डिस्टेंस कानून टूट रहा है। पहले एक मीटर दूरी रखी गई जो अब 6 फुट करदी गई। यानि कि एक दूसरे व्यक्ति के बीच कमसे कम 6 फुट की दूरी हो।
अब यह कानून इसलिए बनाया गया ताकि एक संक्रमित हो तो भी दूसरे संक्रमित नहीं हो पाएं।
अब देख सभी रहे हैं कि इस कानून का खुले आम उलंघन किया जा रहा है। कोई भी रोक नहीं रहा टोक नहीं रहा कि इससे कभी भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है।
अब एक बिंदु सोच समझ और अधिकार पर गौर करें।
सम्मान कराने वालों में चिकित्सा स्टाफ,पुलिस स्टाफ, सफाई आदि स्टाफ हैं। दूसरी तरफ समाजसेवी कुछ राजनीति करने वाले कार्यकर्ता होते हैं। सम्मानित करते फोटो खिंचवाने छपवाने सोशलसाइट पर डालने की प्रचार पाने की इनकी लालसा रहती है। मालाएं खुद भी तो पहन लेते हैं।
ये मान कर चल रहे हैं कि कोरोना वायरस इनके नहीं लग सकता। ये सभी शक्तमान हैं।  इसलिए ये कानून नहीं मानते। इनके लिए भी वही कानून है जो सभी लोगों के लिए है। बस ये मानते नहीं।
जो अधिकारी दूसरों पर कानून चाबुक रूप में चलाते हैं वे भी फोटो आदि देखते हैं,लेकिन रोकते नहीं कि सोशल डिस्टेंस की पालना क्यों नहीं की गई? कोई शिकायत भी कर दे तो जांच करने वाले दबा दें। उनकी भी सोच है कि मेरे क्षेत्र की छवि सरकार,ऊपर के अधिकारियों, जनता तक एकदम साफ ही दिखाई दे कि सभी कानून नियम सही पालन किये जा रहे हैं।
अखबार चैनल भी कानून टूटने और इससे कोरोना फैल सकता है वाली न्यूज नहीं लगाते। बस सम्मानित होने और सम्मानित करने वालों के नाम फोटो आदि लगाकर ही कर्तव्य पूरा मान लेते हैं। जनता पढकर देखकर और काम में लग जाती है।
बस,मैं पूछ रहा हूं। मेरा सवाल है। मैं भी इनसे ही क्यों पूछूं?
मोदीजी से ही पूछ लेता हूं की कोरोना अपना आक्रमण करने से पहले इन लोगों से पहले पूछेगा और सलाह करेगा क्या?   इनसे पूछेगा तुम्हारे लगूं या नहीं लगूं और लगूं तो कब लगूं?
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ राजस्थान.
94143 81356.
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कोई भी अखबार, चैनल उपयोग कर सकता है।
दि. 12 मई 2020
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