मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

लॉक डाउन में सूरतगढ़ में मॉल कैसे खुल रहे हैं -आदेश में मॉल बंद हैं. नियम तोड़ने वालों पर कृपा कैसे?


* करणीदानसिंह राजपूत*


सूरतगढ़ 14 अप्रैल 2020 कोरोनावायरस संक्रमण और बचाव कानून के लॉक डाउन आदेश में सरकार द्वारा घोषित नियमावली में स्पष्ट रूप से मॉल नहीं खोले जा सकते।

सूरतगढ़ में प्रशासन की लापरवाही के कारण अनदेखी के कारण मॉल खुले हैं और वहां पर भीड़ व अधिक कर्मचारी और सोशल डिस्टेंस की धज्जियां।

असल में सरकार ने मॉल इसीलिए बंद रखे कि वहां पर भीड़ रहती है कर्मचारी अधिक होते हैं इसलिए सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो सकता।

सरकार ने जरूर यह नियम लागू किया लेकिन सूरतगढ़ में नियम लागू कराने वाले प्रशासन की नजरों के नीचे यह सब चल रहा है। असल में अधिकारियों ने बाहर हालात कैसे हैं पर ध्यान नहीं दिया।

बीकानेर रोड स्थित मॉल में जनरल स्टोर के हजारों आइटम है।इस विशाल  मॉल को किरयाना के बहाने से भी खोला नहीं जा सकता और प्रशासन भी नहीं खुलवा सकता। 

जब नाम ही मॉल है तो यह नियम इस पर स्पष्ट रूप से लागू होता है। मॉल पर बहुत बड़ा बोर्ड लगा हुआ है जिस पर प्रताप मॉल लिखा हुआ है। 


यह छूट प्रशासन नहीं दे सकता तब स्पष्ट है कि यह नियम तोड़कर खोला जा रहा है। इसके अलावा भगत सिंह चौक स्थित एक मॉल,शहर के कुछ बड़े जनरल स्टोर जहां थोक माल मिलता है,उन्होंने अपने पिछले दरवाजे खोल रखे हैं और वहीं से सब कुछ चल रहा है।

प्रशासन को सब कुछ जनता ही सूचना क्यों दे? जनता सूचना दे भी दे तो कार्यवाही नहीं होती। 


नगरपालिका में तो लॉक डाउन में 31 मार्च को समारोह हो गया। पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने अध्यक्षता भी की। सभी को नियम कानून का मालूम था। समारोह की सूचना भी अगले दिन प्रशासन को फोटो सहित मिल गई। हालांकि मीडिया में समाचार नहीं आ सके के प्रयास भी हुए। राजस्थान पत्रिका ने दो बार समाचार छापा। सोशल मीडिया पर कुछ चैनलों पर भी समाचार चल गया। इसके बावजूद प्रशासन के पास दो सप्ताह से जांच पड़ी है। पुलिस और प्रशासन को धारा 144 की पालना करवानी थी। गंगानगर जिले में गंगानगर मुख्यालय और रायसिंहनगर में मुकदमे बनाए गए। यहां प्रशासन ने मुकदमें की मांग को भी दबा रखा है।

राजस्थान में नंबर 1 का दावा करते रहने वाले दो बड़े अखबारों राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर में से केवल राजस्थान पत्रिका ने ही समाचार छापे

मोदी जी ने आज 14 अप्रैल के राष्ट्र के नाम संबोधन में एक सप्ताह तक और कठोरता का कहा है। स्थानीय अधिकारियों के द्वारा कार्यवाही होती है या नियम तोडने वालों पर कृपा रहती है। हालांकि कृपा अधिकारियों को भी संकट में डाल सकती है।००

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