गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

राम मंदिर बनने का रास्ता साफ- पुनर्विचार याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में खारिज

नई दिल्ली.12, 2019.

राम मंदिर फैसले के खिलाफ दाखिल की गई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी हैं। पांच जजों की पीठ ने यह कहकर याचिकाएं खारिज कर दीं कि याचिकाओं में कोई मेरिट नहीं है। 

9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के ऐतिहासिक विवाद पर फैसला देते हुए विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का आदेश दिया था।

इसके साथ ही कोर्ट ने मस्जिद के लिए अयोध्या में 5 एकड़ जमीन भी देने का आदेश दिया था। 

कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 18 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की गई थीं। जिन पर आज सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली 5 जजों की पीठ ने यह फैसला लिया। चीफ जस्टिस के अलावा इस पीठ में जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसए नजीर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल रहे। कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई अधिकतर याचिकाएं असंतुष्ट मुस्लिम पक्षकारों द्वारा दायर की गई थीं। इनके अलावा निर्मोही अखाड़े ने भी बुधवार को फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।

रामजन्मभूमि विवाद पर पहली याचिका दाखिल

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निर्मोही अखाड़े की मांग है कि राम मंदिर ट्रस्ट में अखाड़े की भी भूमिका तय की जाए। निर्मोही अखाड़े के अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी रिव्यू पिटीशन डाली थी। राम मंदिर फैसले खिलाफ पहली याचिका 2 दिसंबर को एम सिद्दीक और यूपी जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अशहद रशीदी ने दायर की थी।

इसके बाद मौलाना मुफ्ती हसबुल्ला, मोहम्मद उमर, मौलाना महफूजुर रहमान और मिसबाहुद्दीन ने पुनर्विचार याचिकाए दाखिल की थीं। ये सभी राम मंदिर मामले में पक्षकार थे।

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