सोमवार, 30 दिसंबर 2019

दुधारू पशुओं की सर्दी में करें रक्षा देखभाल

* करणीदानसिंह राजपूत *

श्रीगंगानगर, 29 दिसम्बर 2019. सर्दियों के मौसम में पशुओं पर कुप्रभाव न पडे और उत्पादन न गिरे, इसके लिए पशुपालकों को अपने पशुओं की देखभाल करना बहुत जरूरी है। 

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डाॅ0 रामवीर शर्मा ने बताया कि ठंड के मौसम में पशुओं की वैसे ही देखभाल करे जैसे हम लोग अपनी करते है। उन्होने उनके खाने-पीने से लेकर उनके रहने के लिए अच्छा प्रबन्ध करे, ताकि वो बीमार न पडे़  और उनके दूध उत्पादन पर प्रभाव न पड़े। उन्होने बताया कि खासकर नवजात तथा छः माह तक के बच्चों का विशेष देखभाल करे और जो लोग पशुपालन कर रहे है, वो इन बातों का जरूर ध्यान रखे। 

उन्होंने ठंड के मौसम में पशुपालन करने वालों  को पशुओं को सर्दी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी, जिसके तहत पशुओं को खुली जगह में न रखे, ढके स्थानों में रखे, रोशनदान, दरवाजों व खिड़कियों को टाट और बोरे से ढंक दे, पशुशाला में गोबर और मूत्र निकास की उचित व्यवस्था करे ताकि जल जमाव न हो पाए, पशुशाला को नमी और सीलन से बचाएं और ऐसी व्यवस्था करे कि सूर्य की रोशनी पशुशाला में देर तक रहे, बासी पानी पशुओं को न पिलाए, बिछावन में पुआल का प्रयोग करे। 

उन्होंने बताया कि इसी प्रकार पशुओं को जूट के बोरे को ऐसे पहनाएं जिससे वे खिसके नही, गर्मी के लिए पशुओं के पास अलाव जला के रखें, नवजात पशु को खीस जरूर पिलाए, इससे बीमारी से लड़ने क्षमता में वृद्धि होती है और नवजात पशुओं की बढोतरी भी तेजी से होता है। प्रसव के बाद मां को ठंडा पानी न पिलाकर गुनगुना पानी पिलाएं, गर्भित पशु का विशेष ध्यान रखे व प्रसव में जच्चा-बच्चा को ढके हुए स्थान में बिछावन पर रखकर ठंड से बचाव करे तथा बिछावन समय-समय पर बदलते रहे। अलाव जलाएं पर पशु की पहुंच से दूर रखे, इसके लिए पशु के गले की रस्सी छोटी बांधे ताकि पशु अलाव तक न पहुंच सके, ठंड से प्रभावित पशु के शरीर में कंपकपी, बुखार के लक्षण होते है तो तत्काल निकटवर्ती पशु चिकित्सक को दिखाएं।

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