रविवार, 29 दिसंबर 2019

कोहरे के अंधेरे में आओ मिलें हम -कविता- करणीदानसिंह राजपूत*

कोहरे में घिरे तन मन,

तुम न जाने कहां हो।

 ्आ्ओ,तो मिलें। 

तुम्हारा ताप मुझे मिलेगा

मेरा ताप तम्हें मिलेगा

दोनों के ताप एकदूजे से मिलेंगे

इस मिलन से कुछ नया होगा।

तन मिलेंगे तो मन भी मिलेंगे

इस नये उत्पन्न ताप से 

कोहरा खत्म होगा।

हमारे मिलने से
कोहरे के अंत पर 

कोई संशय है तो मिटालो।

अभी वक्त है
घना कोहरा और
घुप्प अंधेरा है। 

कोई भी हमें
देख नहीं पाएगा।

देखेगा तो पहचान नहीं पाएगा।

बस वहीं आओ 

जहां सपने में मिलते रहे हैं 

कई बा 

इसबार बिना सपने के 

मिलने आओ।

तुम्हारा ताप मुझे मिलेगा

मेरा ताप तुम्हें मिलेगा 

इस मिलन से कोहरा दूर होगा 

इस मिलन से अंधेरा दूर होगा।

बस,सोच होनी चाहिए 

मेरी और तुम्हारी 

कोहरा और अंधेरा मिटाने की.

बस सोच होनी चाहिए। 

*** 

करणीदानसिंह राजपूत, पत्रकार, 

विजयश्री करणी भवन, सूर्यवंशी स्कूल के पास, मिनी मार्केट, सूर्योदय नगरी,

सूरतगढ़ ( राजस्थान) भारत.

94143 81356. 

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