सोमवार, 9 दिसंबर 2019

सूरतगढ़ की जिला मुख्यालय जैसी सुविधा खत्म हो रही है-एडीएम का पद 1 साल 5 माह से खाली

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर करीब 42 साल पहले आंदोलन शुरू किया गया था। सन 1992 में जब हनुमानगढ़ को जिला बनाया गया तब मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत ने सूरतगढ़ को जिले जैसी सुविधा देने की बात कही। उसके बाद में सूरतगढ़ में एडीएम पद स्थापित किया गया।


एक तरफ तो लोग जिले की मांग कर रहे हैं और दूसरी तरफ सूरतगढ़ की यह जिला स्तर जैसी मिली हुई एक सुविधा अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रदान की गई वह भी चुपचाप खत्म कर दी जा रही है। 

इसके बारे में आम नागरिकों को कोई पता नहीं है और राजनीतिज्ञ सारे चुप बैठे हैं।

सूरतगढ़ के अंदर सैकड़ों प्रदर्शन होते हैं हजारों ज्ञापन दिए जाते हैं मगर इस और किसी का भी ध्यान नहीं है।


सूरतगढ़ में एडीएम ऐसे अधिकारियों को लगाया जाता रहा जिनकी रूचि यहां नहीं रही। एक दो ने ही यहां कुछ कार्य किया अन्यथा यह पद भी केवल मांग पत्र ज्ञापन लेकर आगे भेजने जैसा रहा।


सूरतगढ़ से स्थानंतरण पर

24 -7_2018 को चांदमल वर्मा रिलीव होकर गए लेकिन उनकी जगह स्थानांतरित हुए बीरबल सिंह कभी आए ही नहीं।


आश्चर्य यह है की कुछ माह पहले आर ए एस स्थानांतरण किए गए उसमें बीरबल सिंह को सूरतगढ़ से स्थानांतरित दिखाया गया। ये आए नहीं तो कहां थे?


चांदमल वर्मा के  24 -7-2018 को जाने के बाद से अब तक ( 9-12-2019 तक) 1 वर्ष 5 माह से अतिरिक्त जिला कलेक्टर का पद खाली पड़ा है, या किसी योजनाबद्ध तरीके से चुप चाप खत्म किया जा रहा है?इस पद के कार्य क्षेत्र में सूरतगढ़, श्री बिजयनगर, अनूपगढ़, घड़साना और रावला तहसीलों का काम ठप्प है। अनूपगढ़, घड़साना और रावला तहसीलों के लिए सप्ताह में एक दिन अनूपगढ़ में शिविर लगता था। ००


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