रविवार, 3 नवंबर 2019

सूरतगढ़ नगरपालिका-भाजपा कांग्रेस की होगी कड़ी टक्करें. *रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ नगर पालिका मैं अपना चेयरमैन बिठाने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस को अनेक प्रकार की मुश्किलों के साथ संघर्ष करना पड़ेगा।

अभी तक जो हालात शहर में नजर आ रहे हैं उसमें भाजपा भारी पड़ते हुए भी कांग्रेस के साथ कड़ी टक्कर लेकर ही सफलता प्राप्त कर सकती हैं। 

दोनों पार्टियों की स्थिति में अभी कोई स्पष्टता नहीं है कि किस पार्टी का चेयरमैन हर हालत में बन जाएगा। दोनों के बीच कड़ी टक्कर है और उसमें निर्दलीय भी अपना रोल अदा करेंगे।

भारतीय जनता पार्टी में विधायक रामप्रताप कासनिया दो पूर्व विधायक अशोक नागपाल और राजेंद्रसिंह भादू सक्रिय हैं और प्रभारी पीलीबंगा के विधायक धर्मेंद्र मोची हैं। 

कांग्रेस में पूर्व विधायक गंगाजल मील और पिछले चुनाव में पराजित उनके भतीजे हनुमान मील सक्रिय हैं।

दोनों ही राजनीतिक दल चेयरमैन के दावेदारों को वार्ड पार्षद चुनाव में ही पटनी देने की तैयारी भरपूर कर चुके हैं। 

कांग्रेस पार्टी की तरफ से जिन चेहरों को चेयरमैन के लिए समझा जा रहा है उन को पटखनी देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने वार्डों में व्यवस्था की है,ताकि वार्ड के अंदर ही धराशायी कर दिया जाए।भारतीय जनता पार्टी के और से जो चेयरमैन के चेहरे हैं उन्हें वार्डों में पराजित करने के लिए कांग्रेस ने अपने जाल बिछाए हैं। असल में यह टक्करें भी बहुत जबरदस्त होंगी। यहां पर स्थिति ऐसी रहेगी कि जीत हार मामूली वोटों से होंगी। चेयरमैनी  के दावेदार अलग अलग अलग वार्डों में संपर्क कर रहे हैं और वहीं से चुनाव लड़ने की भी तैयारी में रहेंगे। कुछ ऐसा वातावरण भी बन रहा है कि पार्टियां टिकट नहीं देंगी तो वे स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में निश्चित रूप से उतरेंगे। दोनों तरफ नाक का सवाल बना हुआ है।

मुख्य रूप से कड़े टकराव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के भी प्रतिनिधि कुछ वार्डों में जीत हासिल कर सकते हैं। निर्दलीयों की ओर से भी कुछ वार्डो में जीत निश्चित रूप से होगी।निर्दलीय पिछली बार भी सरकार बनाने में आगे रहे थे। पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के पास में एक वोट की कमी थी लेकिन निर्दलियों का साथ मिला और श्रीमती काजल छाबड़ा को चेयरमैन बनाने में तत्कालीन विधायक राजेंद्र सिंह भादू सफल रहे थे। इस बार रामप्रताप कासनिया अपना अध्यक्ष नगर पालिका में बनाना चाहते हैं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी जिसके विधानसभा में हार हो गई थी वह भी अपना चैयरमेन चाहती है। कांग्रेस पार्टी यहां लगातार दो चुनाव हार चुकी है पहले 2013 में गंगाजल मील को भाजपा के राजेंद्र सिंह भादू ने हराया और तीसरे क्रम पर पहुंच गए थे। सन 2018 के चुनाव में गंगाजल मील को टिकट नहीं मिली लेकिन टिकट उनके भतीजे युवा कांग्रेसी नेता हनुमान मील को मिली मगर वे जीत नहीं पाए।यह कसक भी मील खेमे में कायम है और वे चाहते हैं कि चेयरमैन के पद पर अपना प्रत्याशी जिताएं। असल में सूरतगढ़ में जो नाक का सवाल है दोनों तरफ है उसी के कारण ही कड़ी टक्करें होंगी। भाजपा कांग्रेस की टक्करों में निर्दलीय भी चेयरमैन के लिए तैयारी पर हैं। ०००






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