गुरुवार, 19 सितंबर 2019

कौन पालिका चुनाव नहीं लड़ सकेंगे - अध्यक्ष पार्षद चुनाव की पात्रता

* दो से अधिक संतान होने, मुकदमों दोषसिद्धी  की जानकारी देनी होगी* 


^ विशेष- प्रस्तुति - करणीदानसिंह राजपूत ^


श्रीगंगानगर, 19 सितम्बर 2019.

राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान के निर्देशानुसार नगरपालिकाओं के अध्यक्ष, सदस्य के रूप में निर्वाचन के लिये निरर्हता दो से अधिक संतान होने, दोषसिद्धि एवं विचाराधीन मुकदमों के संबंध में सूचना अभ्यर्थियों से प्राप्त की जायेगी। 

जिला कलक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि राजस्थान नगरपालिका निर्वाचन नियम 1994 को संशोधित करते हुए राज्य सरकार ने अधिसूचना के द्वारा राजस्थान नगरपालिका (निर्वाचन) (संशोधन) नियम 2019 प्रवृत किये है। नियमों में उक्त संशोधन के परिणामस्वरूप नियम 78 के प्रावधानों के अनुसार नगरपालिका के अध्यक्ष का पद नगरपालिका के समस्त वार्डों के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा चुने गये व्यक्ति से भरा जायेगा। उक्त नियम 78 के उप नियम 3 में यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति अध्यक्ष के रूप में चुने जाने के लिये या इस पद को धारण करने के लिये तभी पात्र होगा यदि वह नगरपालिका अधिनियम के अंतर्गत नगरपालिका के सदस्य चुने जाने के लिये योग्य है और नियोग्य नही है।


 इस प्रकार राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 में उपबन्धित निरर्हताये नगरपालिका सदस्य के निर्वाचन के साथ-साथ अध्यक्षीय पदों के निर्वाचन में भी लागू है। 


राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 में नगरपालिका सदस्य के निर्वाचन के लिये निरर्हताये बताई गई है, जिनमें कुछ अपराधों के लिये दोषसिद्ध व्यक्तियों को तथा दो से अधिक संतान होने पर निर्वाचन के प्रयोजनार्थ निरर्हित माना गया है। उक्त अधिनियम की धारा 24 के खण्ड (1) के अनुसार कोई भी व्यक्ति जिसे सक्षम न्यायालय द्वारा किसी भी अपराध के लिये दोष सिद्ध ठहराया गया हो और छः माह या अधिक की अवधि के लिये दण्डादिष्ट किया गया हो तो वह नियम कारावास की अवधि समाप्ति की दिनांक से छः साल की अवधि के लिये नियोग्य माना जावेगा।


अपराधों के लिये दोषसिद्ध व्यक्तियों के संबंध में धारा 24 के खण्ड (2) एंव खण्ड (4) में जिसमें नगरपालिका अधिनियम की धारा 245 में किसी अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति को तथा खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 में किसी अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति को निर्वाचन के लिये सदैव के लिये निरर्हित माना गया है। 


राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 के खण्ड (5) के प्रावधान के अनुसार यदि ऐसा व्यक्ति जिसके विरूद्ध दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 110 के अधीन संस्थित कार्यवाही में उस संहिता की धारा 117 के अधीन कोई आदेश पारित किया गया हो और ऐसा आदेश तत्पश्चात उलटा नही गया हो तो वह व्यक्ति उस कालावधि जिसके लिये प्रतिभूति देने का आदेश दिया गया है, के समाप्त होने तक निर्वाचन के प्रयोजनार्थ निर्योग्य माना जायेगा। 

उक्त धारा 24 के खण्ड (10) के प्रावधानों के अनुसार नगरपालिका सदस्य के रूप में निर्वाचन के लिये यह भी आवश्यक है कि अभ्यर्थी राजस्थान राज्य के विधान मण्डल के सदस्य के चुनाव के लिये निर्धारित योग्यता रखता हो। विधान मण्डल के निर्वाचन के लिये न्यूनतम आयु 25 वर्ष नियत है लेकिन नगरपालिका चुनाव के लिये 21 वर्ष की आयु प्राप्त करने वाला व्यक्ति निर्योग्य नही होगा। इसी प्रकार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 के प्रावधान भी नगरपालिका के सदस्य के निर्वाचन की निर्योग्यता के प्रयोजन हेतु लागू होगें। 

उक्त अधिनियम में यह प्रावधान है कि किसी व्यक्ति के विरूद्ध सक्षम न्यायालय द्वारा  5 वर्ष या अधिक अवधि के कारावास से दण्डनीय मामले में संज्ञान ले लिया है और आरोप विरचित कर दिये गये है, तो ऐसे विचाराधीन मामले में वह व्यक्ति नगरपालिका सदस्य के निर्वाचन के प्रयोजनार्थ अपात्र माना जायेगा। 

नगरनिगम, नगरपरिषद, नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्य पदों के चुनाव में कोई अभ्यर्थी कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत पात्र है इसके लिये अभ्यर्थियों से जानकारी रिटर्निंग अधिकारी को प्राप्त होना आवश्यक है। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 के प्रावधानों के संबंध में नाम निर्देशन पत्र प्रस्तुत करते समय अभ्यर्थी से घोषणा पत्र प्रस्तुत करने की भी अपेक्षा रिटर्निंग अधिकारी द्वारा की जायेगी। 

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