मंगलवार, 10 सितंबर 2019

क्या बोले गंगानगर विधायक -गांधी विचार एवं ग्रामीण विकास पर संगोष्ठी




* ग्रामीण विकास का सपना था गांधीजी का* गंगानगर विधायक

श्रीगंगानगर, 10 सितम्बर 2019.

 महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला में मंगलवार को चौथे दिन नोजगे पब्लिक स्कूल के ओडिटोरियम में गांधी विचार एवं ग्रामीण विकास विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये। संगोष्ठी व समापन कार्यक्रम में पिछले कई दिनों से आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। 

संगोष्ठी में बोलते हुए गंगानगर विधायक श्री राजकुमार गौड ने कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रदेश में लगभग 2 वर्ष तक प्रत्येक जिले में विभिन्न कार्यक्रम करवाये जायेगें। इसके लिये प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत आभार के पात्रा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंगानगर जिले में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये गये, कार्यक्रमों में भारी जन जुड़ाव यह दर्शाता है कि गांधी जी की आज भी प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा तीन दिन का कार्यक्रम निर्धारित था, जबकि गंगानगर जिले में इसे चार दिवस का किया गया, जो सराहनीय है। उन्होंने कहा कि मानव श्रृंखला ने भी इतिहास रचा है तथा इस मानव श्रृंखला की चर्चा जयपुर तक हुई है। 

श्री गौड ने कहा कि आजादी के बाद जिन बच्चों ने जन्म लिया है, उन्हें गांधीजी के बारे में बताना बहुत जरूरी है कि किस प्रकार गांधी जी ने अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्हें लगा कि आम आदमी के साथ व्यवहार अच्छा नही है। उनका सपना था कि देश आजाद हो, वह भी अंहिसा के बल पर और उन्होंने वैसा ही कर दिखाया। गांधीजी का ग्राम विकास का सपना था। उनका कहना था कि ग्राम का विकास होने से देश का विकास स्वयं हो जायेगा। 

विधायक गौड ने कहा कि आजादी से पूर्व की परिस्थितियां ज्यादा अच्छी नही थी। उत्पादन कम था, गंगानगर में 1927 में नहर आने के बाद अच्छी फसले होने लगी, उत्पादन बढा तथा यहा का जीवन स्तर अच्छा हुआ। गंगानगर से बीकानेर जाने में पूरा एक दिन लग जाया करता था, जबकि आज मात्र 4 घंटे में बीकानेर पहुंच सकते है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के अंहिसा आंदोलन में इतनी ताकत थी, कि आज पूरा विश्व अंहिसा दिवस मनाता है। महात्मा गांधी ने स्वराज व हथकरघा की परिकल्पना की थी। उन्होंने कहा कि पंचायती राज का सपना गांधीजी का था, जिसकी शुरूआत राजस्थान के नागौर जिले से हुई। उन्होंने कहा कि भारत के चन्द्रयान की ताकत पूरी दूनिया देख रही है। ये सभी उंचाईयां निरन्तर प्रयासों से प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार गांवों को विकसित करना चाहती है, इसके लिये ग्राम पंचायतों को सीधे ही विकास राशि दी जा रही है, जिससे वे अपने गांव की जरूरतों के अनुसार विकास कार्य करवा सकें। 

एडीएम प्रशासन श्री ओपी जैन ने कहा कि ग्रामीण विकास में गांधीजी की प्रासंगिकता क्या है, उसे समझने की आवश्यकता है। गांधीजी के जीवन से ग्राम विकास को देखा जा सकता है। गांधीजी सदैव विकेन्द्रीकरण पर विश्वास करते थे। ग्राम विकास के लिये ग्राम पंचायत सबसे बड़ी पंचायत है, जो स्वयं के निर्णय ले सकती है। आजादी के बाद निति निर्धारकों ने ग्राम विकास के लिये अनेक प्रकार की योजनाएं प्रारम्भ की। ग्राम विकास के लिये त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था की शुरूआत हुई तथा 73वां संविधान संशोधन किया गया। गांधीजी का ग्राम स्वराज का सपना था, जिसे मूर्तरूप दिया जा रहा है। 

करणपुर एसडीएम श्रीमती रिना छिम्पा ने कहा कि आजादी की लम्बी लड़ाई लड़ी गई। आजादी के बाद ग्रामीण विकास, ग्राम स्वरोजगार पर जोर दिया गया। महात्मागांधी ने अपनी आत्मकथा में सपनों का भारत बताया है। गांव में पूर्ण गणराज्य हो, कि परिकल्पना की गई थी। ग्रामीण विकास में फसल उत्पादन बढे, सार्वजनिक भवन हो, गांव में पाठशालाएं हो तथा पांच व्यक्तियों की पंचायत ग्राम में विकास के कार्य करवाएं। श्रीमती रिना छिम्पा ने आर्य काल से लेकर अब तक के पंचायत तंत्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुगल शासकों व अंग्रेजों के शासन काल में पंचायत व्यवस्था नष्ट हुई थी। उन्होंने 64 व 73वां संविधान संशोधन पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुड गर्वनेंस, गांव में उत्पादक व गांव में उपभोक्ता, कौशल विकास, श्रमदान, शिक्षा जो रोजगार से जोड़े इत्यादि पहलुओं पर विचार व्यक्त किये। ग्राम स्वराज के साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों, बुराईयों, अस्पर्शता को समूल नष्ट करने के संबंध में विचार व्यक्त किये। 

श्री संदेश त्यागी ने कहा कि गांधीजी की 150वीं जयंती के अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि सड़कों की गंदगी के साथ-साथ मन की गंदगी को भी साफ किया जाये। महात्मागांधी जी ने जो आजादी का सपना देखा था, वह पूरा हुआ लेकिन आजाद भारत में अशिक्षा, गरीबी को खत्म करना, समय-समय पर गुलामी के खतरों को भांपना व उसी के अनुरूप व्यवस्थाओं में बदलाव की आवश्यकताओं पर बल दिया। उन्होंने ग्रामीण विकास पर बोलते हुए कहा कि वर्तमान में ग्रामीण संस्कृति को बचाना है। हमारी सबसे बड़ी धरोहर संस्कृति है, जिसे नष्ट नही होने देना। ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की पहली कड़ी है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ही ग्राम विकास संभव होगा। 

आयोजित समापन समारोह में गत तीन दिवस से आयोजित की जा रही विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम तीन स्थान, सांत्वना पुरूस्कार, विभिन्न कार्यालयों मे साफ-सफाई प्रतिस्पर्धा तथा पोस्टकार्ड प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरूस्कृत किया गया। जिले के प्रभारी श्री प्रवीण गौड ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप गत चार दिनों से जिले भर में अनेक गांधीजी के जीवन पर आधारित कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई गई, जिसमें हजारों-हजारों की भागीदारी यह दर्शाती है कि गांधीजी आज भी कितने लोकप्रिय है। 




आयोजित संगोष्ठी व समापन समारोह के अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सौरभ स्वामी ने कार्यक्रम की सफलता पर सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर एडीएम सर्तकता श्री राजवीर सिंह, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री मोहम्मद जुनैद, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी श्री विष्णुदत्त स्वामी, श्री हरचन्द गोस्वामी, जिला रसद अधिकारी श्री राकेश सोनी, सहायक निदेशक उद्यान श्रीमती प्रीती गर्ग, राजकीय कन्या महाविधालय के श्री प्रदीप मोदी सहित विभिन्न गांवों के जनप्रतिनिधियों, शहर के जागरूक नागरिकों, विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के प्रधानाचार्यों व विधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सफल संचालत श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा व श्रीमती शीतल सैन ने किया। ००

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें