रविवार, 11 अगस्त 2019

सूरतगढ़ नगरपालिका में भ्रष्टाचार की शिकायत किसे करें? गंदे नाले में मजे करते पार्षद और कर्मचारी



* करणीदानसिंह राजपूत *


नगर पालिका में एक बोर्ड लगा हुआ है कोई व्यक्ति कर्मचारी पैसे मांगता है या काम नहीं करता तो आप शिकायत अध्यक्ष से करें। 

 एक तरफ यह बोर्ड लगा है और इस बोर्ड के लगाने के साथ ही नगर पालिका में भ्रष्टाचार का नाला बह रहा है।

नगर पालिका में भ्रष्टाचार के दो कांड स्पष्ट हुए हैं लेकिन पालिकाध्यक्ष ने उस पर कोई एक्शन नहीं लिया बल्कि भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया।

 स्पष्ट रूप से अध्यक्ष सहित पालिका बोर्ड जिसमें पार्षद और विधायक सदस्य हैं वे सभी किसी न किसी कारण से चुप हैं।

नगर पालिका का एक कर्मचारी राजकुमार छाबड़ा डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेने के कांड में एसीबी में फंसा मुकदमा बना सस्पेंड हुआ और बाद में बहाल कर दिया गया।घोर निंदनीय है कि भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने जब मुकदमा चलाने के लिए पालिका की अनुमति चाही तो नगरपालिका अध्यक्ष सहित पूरे बोर्ड ने यह अनुमति नहीं दी।  इसके अलावा एक कर्मचारी करीब 14 लाख रुपए से अधिक की राशि गबन कर गया। पुलिस में एक साधारण पत्र दिया गया और उसके बाद में उस कर्मचारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हुई।  रकम भरवाली गई। यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो भ्रष्टाचार के मामले में काम में ली जाती है कि जैसे भी हो गबन की रकम की वसूली हो जाए,लेकिन इससे अपराध खत्म नहीं होता। नगर पालिका को पुलिस में पूरा प्रकरण दर्ज कराना चाहिए था लेकिन यहां नगर पालिका अध्यक्ष अधिशासी अधिकारी और नगर पालिका के सारे पार्षद मौन रहे।सूरतगढ़ की जनता के आगे ये सभी लोग खुले रूप से दोषी हैं। 

 

सूरतगढ़ में सीवरेज सिस्टम निर्माण में भारी गोलमाल हुआ जिसकी शिकायत कुछ पार्षदों ने मुख्यमंत्री को की जिसमें आंकड़े और तथ्यों के सहित आरोप लगाए गए। भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामप्रताप कासनिया ने विधानसभा में तथ्यों के सहित गंभीर आरोप लगाए कि काम नहीं हुआ और भुगतान हो गया। आश्चर्य यह है कि इतना कुछ आरोप लग गया कि काम ही नहीं हुआ और दूसरी तरफ नगरपालिका की बोर्ड की बैठक जो 10 अगस्त को स्थगित हो गई है उसमें एक प्रस्ताव क्रम संख्या 20 पर था। प्रस्ताव में लिखा गया है कि सीवरेज सिस्टम का निर्माण निर्धारित से अधिक हो गया उसके बारे में विचार करना है। सवाल यह है कि जब निर्धारित कार्य ही नहीं हो पाए तब निर्धारित से अधिक होने की कैसे आशा की जा सकती है।

 निर्धारित से ज्यादा कार्य किसने करवाए? अध्यक्ष ने करवाए या ईओ ने करवाएं या इंजीनियरिंग स्टाफ ने अपने मनमर्जी से करवाए? ये कार्य हुए या नहीं हुए इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसी बैठक के अंदर एक प्रस्ताव और था कि सीवरेज सिस्टम कंपनी ने नालियां सड़कें तोड़ी उनका निर्माण नहीं किया जो अब नगरपालिका करवाएगी और बजट सीवरेज मद में से लिया जाएगा। आश्चर्य यह है कि सिवरेज निर्माण कंपनी ने निर्माण क्यों नहीं किए और उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। 

नगर पालिका के पार्षद कम से कम खुद को साफ करने के लिए अनैतिक प्रस्तावों से तो न जुड़़ें जो भ्रष्टाचारों से कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं। कहीं विकास के नाम पर कहीं भूमि देने के नाम पर राजनीति से  जुड़े हुए हैं। उस राजनीति को खत्म करने के लिए उन प्रस्तावों को कभी भी पारित नहीं करें।  पार्षद अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रख सकते हैं। पार्षद बैठक में चर्चा करते हैं उसमें आरोप लगाते हैं लेकिन यह आरोप केवल चर्चा तक सीमित रहते हैं और प्रस्ताव के पक्ष और विरोध को बैठक में स्पष्ट लिखवाएं।

 अब यह पार्षदों को सोचना है कि वह भविष्य में नगरपालिका के खुले रूप में हो रहे भ्रष्टाचारों का साथ देंगे या नहीं देंगे? आगे केवल 2 माह का कार्यकाल ही बचा है। एक बैठक होने की संभावना मान सकते हैं। 

पूरा शहर सिवरेज निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है। अखबार चैनल महीनों से तथ्यों व फोटो सहित समाचार दे चुके हैं तब और भ्रष्टाचार करने में सीवरेज में अधिक कार्य हो जाने का कहते हुए और रकम देने का प्रस्ताव पारित करने की  साझेदारी करना पार्षदों को भी भारी पड़ सकता है।

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