रविवार, 14 जुलाई 2019

अशोक गहलौत और सचिन पायलट की खींचतान - उड़ जाएगी राजस्थान सरकार ---



** करणीदानसिंह राजपूत **

राजस्थान की कांग्रेस सरकार अशोक गहलोत और सचिन पायलट की चल रही खींचतान में उड़ जाएगी।
ऐसे संकेत मिल रहे हैं जिससे संपूर्ण प्रशासन में किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं रहा है।। इस खींचतान से प्रशासन बेपरवाह हो रहा है तथा प्रदेश में कामकाज एक प्रकार से ठप्प जैसे हालात में है। जिला कलेक्टर एक प्रकार से सरकार ही होता है, लेकिन कलेक्ट्रेट से लोग संतुष्ट  नजर नहीं आरहे। लोगों से सवाल किया जाता है तो लगता है कि उनकी दूखती रग को छू लिया गया हो। 
पुलिस अनियंत्रित और तानाशाही रवैया अपनाए हुए  दिखाई दे रही है जिसका प्रमाण सरदार शहर का कांड है। जिसमें देवर की मौत और भाभी के साथ पुलिस कस्टडी में बलात्कार की घटना ने सारे प्रदेश को हिला कर रख दिया है।
सरकार ने सरदार शहर के पूरे थाना स्टाफ को लाइन हाजिर किया है।  वहीं  थाना अधिकारी रणवीर सिंह सांई सहित आठ को सस्पेंड किया है।  वहां के पुलिस उप अधीक्षक को भी सस्पेंड किया गया है और एसपी को एपीओ कर दिया गया है। 
यह घटना मामूली नहीं है। राजस्थान के अन्य कानों में भी कामकाज मनमर्जी से चल रहा है। 
आम जनता से जुड़ी हुई नगर पालिकाओं में भयानक रूप से लूट चल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को लग रहा है कि उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होगी। किसी प्रकार की एपीओ या सस्पेंड जैसी कार्यवाही होगी तो भी महीने डेढ़ महीने में अपनी ड्यूटी पर लौट आएंगे। नगर पालिकाओं में आम जनता की सुनवाई बंद है। काम नहीं हो रहे हैं। पैसे का सर्वत्र बोल बाला है। 
संपूर्ण राज्य में हालात यह है कि रिश्वतखोरी के बाजार में रोजाना ही 1-2 अधिकारी-कर्मचारी चपेट में आ रहे हैं।  सरकार की ओर से किसी भी मंत्री की ओर से अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामले में सख्त चेतावनी नहीं दी जा रही है। पूरे प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और नेता भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खींचातानी से त्रस्त और बेबस हैं। उनके भी काम नहीं हो रहे। दोनों के शीत युद्ध में समय व्यर्थ में बीत रहा है। पहले लोगों को यह आशा थी कि सरकार के गठन के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं की खुशी के लिए राजनैतिक नियुक्तियां जल्दी से जल्दी कर दी जाएगी लेकिन अब लगता है कि दोनों के झगड़े में राजनीतिक नियुक्तियों में भी अभी और विलंब होगा।
सरकार ने अपना बजट नगर पालिका और पंचायत समिति चुनावों को देखते हुए सामान्य सा रखा है लेकिन केवल बजट के सामान्य रखने से ही स्थिति सुधरने की आशा नहीं हो सकती।

आम लोगों का मानस है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी यह बात घर कर रही है कि पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का विवाद निपट जाए। लेकिन यह  विवाद अभी दूर होता नजर नहीं आ रहा। कभी अशोक गहलोत, कभी सचिन पायलट तो कभी दोनों ही दिल्ली में पहुंचते हुए और लौटते हुए नजर आते हैं। 

राहुल गांधी का कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से दिया हुआ त्यागपत्र भी प्रदेशों में कांग्रेस पार्टी की सरकारों को प्रभावित कर रहा है जिसमें राजस्थान सरकार भी फंसी हुई है। 
राहुल गांधी का त्यागपत्र भी विभिन्न प्रकार से सरकारें चलाने में बाधा बना हुआ है और जब तक किसी एक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक दिल्ली का यह झंझट भी संपूर्ण देश को प्रभावित करता रहेगा।
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खींचातानी में कांग्रेस की सरकार उड़ जाने की हालत में है। ***
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