रविवार, 30 जून 2019

सुशील कुमार शिंदे-कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना*

 गांधी परिवार की पहली पसंद*

कांग्रेस आलाकमान सभी नामों पर विचार करने के बाद पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को पार्टी का अगला अध्यक्ष चुन सकता है. संडे गार्जियन में यह दावा किया है कि राहुल गांधी के उत्तराधिकारी चुनने का विमर्श अब निर्णायक स्थिति में पहुंच गया है. इसमें गांधी परिवार ने सुशील कुमार शिंदे के पक्ष में अपनी सहमति जाहिर की है. सुशील कुमार शिंदे के नाम पर सहमति बनने से पहले मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, जनार्दन द्विवेदी से लेकर एके एंटनी और मुकुल वासनिक तक नामों पर चर्चा की गई है. लेकिन आखिरकार गांधी परिवार के सुशील कुमार शिंदे के पक्ष में झुकने से उनकी दावेदारी काफी मजबूत हो गई है. आइए जानते हैं कौन हैं सुशील कुमार शिंदे और क्यों इस वक्त अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस की पहली पसंद हैं.सोनिया गांधी के नजदीकीसोनिया गांधी के करीबियों में शुमार किए जाने वाले शिंदे यूपीए शासनकाल में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. जब महाराष्ट्र में उनके और विलासराव देशमुख के बीच मुख्यमंत्री बनने की होड़ शुरू हुई तो पार्टी ने उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बना दिया, लेकिन उन्होंने एक शब्द बोले बगैर यह पद ले लिया. इसके बाद उन्हें कांग्रेस की सरकार में केंद्र प्रमुख पदों पर बुलाया गया. शिंदे को कभी अति महत्वकांक्षी होते नहीं देखा गया. उनको लेकर यह आम धारणा है कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों के ऊपर जाकर कभी अपनी महत्कांक्षाओं को हावी नहीं होने दिया.शिंदे ने पांच साल तक सब इंस्पेक्टर की नौकरी की हैसाल 1941 में महाराष्ट्र के एक दलित परिवार में जन्म लेने वाले सुशील कुमार शिंदे की पहली पसंद राजनीति नहीं थी, बल्कि उन्होंने अपना दिमाग लॉ को समझने में लगाया. कानून की डिग्री लेने के बाद साल 1965 तक वे अपने गृह जिले सोलापुर की अदालत में वकालत करते रहे, लेकिन सरकारी नौकरी पाने की चाह में इसी दौरान उन्होंने कुछ और परीक्षाएं दी थीं. उन्हीं में एक महाराष्ट्र पुलिस की नौकरी रही. नौकरी मिलते ही उन्होंने स्वीकार की और पांच साल तक खाकी वर्दी पहनकर महाराष्ट्र की खाक छानते रहे. हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.शरद पवार ने इस खाकी वर्दी हटवाकर पहनवाया था सफेद कुर्तामहाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार ने उनकी प्रतिभा पहचानते हुए उन्हें 1971 में उन्हें कांग्रेस पार्टी में ले आए. हालांकि आज शरद पवार खुद की राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (NCP) बनाकर कांग्रेस अलग हो गए, लेकिन सुशील कुमार शिंदे कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए सबसे अहम दावेदार हो गए हैं.शरद पवार से अब भी रिश्ते बेहद मधुरसुशील कुमार शिंदे के कांग्रेस अध्यक्ष पद पर सबसे मजबूत दोवदार बनने और कांग्रेस आलाकमान की पहली पसंद बनने के लिए पीछे अहम कारण आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भी है. कांग्रेस चाहती है कि अगामी चुनाव में बीजेपी-शिवसेना को टक्कर देने के लिए एनसीपी और कांग्रेस साथ मैदान में उतरे. इसके लिए सुशील कुमार शिंदे सबसे मुफीद शख्स हैं, क्योंकि आज भी एनीसीपी चीफ शरद पवार से उनके रिश्ते बेहद मधुर हैं.कांग्रेस के कोष में महाराष्ट्र का बेहद अहम योगदानपिछले विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र के कांग्रेस के हाथ निकलने से पार्टी को भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी फंड में महाराष्ट्र ने हमेशा अहम भूमिका अदा की है. ऐसे में कांग्रेस को संजीवनी महाराष्ट्र से ही मिलने की उम्मीद है. ऐसे में पार्टी महाराष्ट्र में मजबूत होने की किसी भी गुजाइश को हाथ जाने नहीं देना चाहती. ऐसे में कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर सुशील कुमार शिंदे का दलित चेहरा आगामी विधानसभा चुनाव में एक बड़ी रणनीति साबित हो सकती है.केंद्रीय गृहमंत्री और महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं शिंदेपुलिस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कूदने के बाद सुशील कुमार शिंदे ने कभी उलटकर नहीं देखा. उनकी सियासी पारी विधानसभा चुनाव लड़ने से हुई. इस क्रम में वे पांच बार विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. साल 1992 में शिंदे को कांग्रेस ने राज्यसभा भेजा था. इसके बाद शिंदे ने 1999 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और संसद पहुंच गए.इसी रास्ते वह 18 जनवरी 2003 को महाराष्ट्र के सीएम बने गए. हालांकि उनका कार्यकाल 4 नवंबर 2004 तक ही रहा. इसके बाद उनके और विलासराव देशमुख के बीच सीएम पद की होड़ शुरू हो गई. तब आलाकमान ने सुशील कुमार शिंदे को वहां हटाना उचित समझा. साल 2004 में ही उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाकर भेज दिया गया.हालांकि तब यह एक बड़ा फैसला था. शिंदे युवा थे, उनके अपने समर्थक थे, वे चाहते तो सीएम पद के लिए अड़ सकते थे. लेकिन आलाकमान के एक पत्र पर वे सीएम की गद्दी का मोह छोड़ आंध्र प्रदेश में जाकर राज्यपाल की गद्दी संभाल लिए थे.उपराष्ट्रपति पद के भी थे उम्मीदवार, दो बार से हार रहे हैं लोकसभा चुनावइससे पहले 2002 में परिस्थितियां ऐसी बनी थीं कि शिंदे को यूपीए ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना दिया. हालांकि एनडीए के प्रत्याशी भैरों सिंह शेखावत से वे चुनाव में हार गए थे. इसके बाद मनमोहन सिंह सरकार में शिंदे को केंद्र बुला लिया गया. पहले 2009 से 2012 तक वे देश के ऊर्जा मंत्री बने. जबकि यूपीए के दूसरे कार्यकाल में वे 31 जुलाई 2012 से 26 मई 2014 तक केंद्रीय गृहमंत्री रहे. इसके अलावा वे शिंदे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. हालांकि 2014 और 2019 दो बार से उन्हें आम चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है.

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