रविवार, 23 जून 2019

5 साल मेंं 7-8 सौ करोड़ के बजटवाली पालिका का अध्यक्ष कौन होगा?


^^^^ सूरतगढ़ में आएंगे नए सेवादार

पैंतालीस पार्षद और एक अध्यक्ष! ^^^^


--- वर्तमान बोर्ड कैसा रहा है? भ्रष्टाचार का हिमायती या विरोधी?  ---

सूरतगढ़ शहर के निवासियों को खुश होना चाहिए कि आने वाले कुछ महीनों के बाद उनकी सेवा चाकरी करने कराने वाले पार्षद 35 से बढ़कर 45 हो जाएंगे। इनके अलावा जनता से सीधे चुने हुए नगर पालिका अध्यक्ष और विधायक भी होंगे। 

वर्तमान में 35 पार्षद और उन्हीं में से चुने हुए पालिकाध्यक्ष का कार्यकाल अच्छा रहा,बुरा रहा या सामान्य रहा का आकलन शहर की जनता ने अवश्य ही किया होगा।लोग जागरूक हो तो बहुत कुछ सेवा करवा सकते हैं,नहीं तो पार्षदों के चक्कर काटकर उल्टी सेवा करने पड़ जाती है।


 नगर पालिका मैं विभिन्न कार्यों में भ्रष्टाचार घटिया निर्माण आदि की शिकायतें होती रही है लेकिन कोई भी व्यक्ति जांच एजेंसियों के पास नहीं पहुंचा और केवल भाषण बाजी अखबार बाजी होती रही। आजकल सोशल साइट्स पर सब कुछ भड़ास निकाली जाती रही है लेकिन उससे ना भ्रष्टाचार रुका और ना ही जनता को कोई लाभ मिल पाया। 

वर्तमान बोर्ड भारतीय जनता का बोर्ड कहलाता है भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती काजल छाबड़ा अध्यक्ष हैं। भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों के अलावा कांग्रेस के 5 पार्षद और निर्दलीय पार्षद काफी संख्या में जीते हुए थे लेकिन बड़े-बड़े भ्रष्टाचारों पर आवाज उठने के बावजूद विधिवत शिकायत नहीं हुई। जो लोग आवाज उठाते रहे वे एक दो बार में ही थक कर वापस भी बैठते रहे। 

भ्रष्टाचार पर भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी बहुजन समाज पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी आम आदमी पार्टी कहीं ना कहीं छोटे-मोटे रूप में बोलते रहे लेकिन नगर पालिका की बैठक में जो निर्माण के प्रस्ताव आते रहे बिलों के पारित करने के प्रस्ताव आते रहे तब  किसी भी पार्षद ने भी घोटाले रोकने की कोशिश नहीं की और सब कुछ सर्वसम्मति से होता रहा। आश्चर्य होता है कि जब कोई काम खुद के हाथ में होता है वह भी नहीं किया जाए। 

नगर पालिका में दो मामले भ्रष्टाचार के खुले रूप से हुए एक में रिश्वत के केस में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने केस बनाया और अभियोजन यानी कि मुकदमा चलाने की स्वीकृति मांगी तो नगरपालिका की बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया की स्वीकृति नहीं दी जाए। उस बैठक में वर्तमान विधायक जी भी उपस्थित थे। केवल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पार्षद लक्ष्मण शर्मा ने विरोध किया कि भ्रष्टाचार का मामला है इसमें बचाव क्यों किया जाए। 

एक अन्य मामले में करीब 14 लाख रुपए का गबन हुआ वह रकम भरवाली गई मगर मामला पुलिस में दर्ज नहीं करवाया गया। भ्रष्टाचार के मामले में सरकारी रकम वापस वसूली कर ली जाए यह तो नियम है लेकिन मुकदमा नहीं चलाने की छूट नहीं है। यह दो गंभीर प्रकरण थे जिसमें नगर पालिका के सेवादार पार्षद अध्यक्ष और तत्कालीन और वर्तमान विधायक चुप रहे। 

नगर पालिका बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव भ्रष्टाचार के मामले में आता है तो विधायक को और पालिका के पार्षदों में अध्यक्ष को किसी भी हालत में भ्रष्टाचार का साथ नहीं देना चाहिए लेकिन नगर पालिका सूरतगढ़ में भ्रष्टाचार के मामले में कार्यवाहियों को रोका गया। यह दो मामले वर्तमान बोर्ड के लिए बेहद शर्मनाक रहे हैं( ये मामले मरे नहीं है)। इन दोनों प्रकरणों के अलावा और बहुत से प्रकरणों में भ्रष्टाचार हुआ मगर लोग चुप रहे। अब नए चुनावों में खड़े होकर शहर की सेवा करने के सपने ले रहे हैं घोषणाएं कर रहे हैं,ये नए घोषणाकर्ता भी चुप रहे। इनका मुंह भी अभी दो-तीन महीनों से ही खुलने लगा है। यह लोग भी नगर पालिका में चल रहे भ्रष्टाचार पर साढे 4 साल तक गूंगे और बहरे लुले बने रहे। अब अचानक सेवा करने का संकल्प ले रहे हैं लेकिन एक भी व्यक्ति खुलेआम लिखित रूप में यह घोषणा नहीं कर रहा कि अगर वह चुनाव जीत जाता है तो किसी भी रूप में भ्रष्टाचार का सहयोगी नहीं बनेगा। न पैसा खाएगा न पैसा खाने देगा। अगर कोई भ्रष्टाचार करते हुए पकड़ा गया तो कानून के हवाले करने में सदा आगे रहेगा। 

नगर पालिका क्षेत्र में अगले जो चुनाव होने वाले हैं उसमें 45 पार्षद होंगे। पालिका अध्यक्ष का चुनाव संपूर्ण शहर की जनता की ओर से होगा। राजनीतिक दल जो अभी सामने है उनमें भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी ही नजर आ रहे हैं । विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई और राजस्थान की सरकार कांग्रेस की बन गई लेकिन भारतीय जनता पार्टी के 71 विधायक जीते जो किसी भी हालत में कमजोर नहीं हैं।  इसके बाद में लोकसभा आम चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने संपूर्ण राजस्थान में जीत हासिल कर ली। 24 सीटों पर भाजपा और एक पर सहयोगी जीता। कांग्रेस की बहुत बुरी हालत हुई। आगामी बोर्ड के चुनाव में भी इस स्थिति के हिसाब से ही परिणाम आने की संभावना रहेगी। लेकिन राजनीतिक दलों को अपने प्रत्याशी मैदान में उतारने से पूर्व यह सोचना होगा कि वे सेवादार के रूप में उतरते हैं या उनके दिल दिमाग में कुछ और है।


 पालिकाध्यक्ष के लिए नाम का चयन करना बहुत बड़ी बात होगी और सोच समझ कर यह चुनाव करना होगा। सूरतगढ़ नगरपालिका बोर्ड का अध्यक्ष पैसे बजट की बहुत बड़ी ताकत वाला होता है। पांच साल में करीब सात आठ सौ करोड़ का बजट( हर साल एक सौ करोड़ से ज्यादा का बजट) इस बजट पर सभी की निगाह रहती है और रहेगी।

 नगरपालिका का आने वाला बोर्ड साफ-सुथरा रहे, विकास कार्य में अग्रणी रहे यह सोच सभी की होनी चाहिए। ०००

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