बुधवार, 22 मई 2019

नरेन्द्र मोदी की संभावित जीत पर इतना बवाल क्यों?


** विपक्षी दलों की मांग खारिज। मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं। **

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22 मई को चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की उस मांग को खारिज कर दिया है। जिसमें ईवीएम के मतों की गणना से पहले विधानसभा वार पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों से मिलान कराने की बात कही गई थी। मांग को लेकर 21 मई को 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आयोग को ज्ञापन दिया था। 22 मई को आयोग के फुल कमिशन की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि 23 मई को देशभर में होने वाली मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अब पहले के दिशा निर्देशों के अनुरूप वीवीपेट की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों की गणना के बाद होगा। एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्रों की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों से करना है। जिन पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों का मिलान होगा, उन केन्द्रों का चयन रेंडम पद्धति से होगा। मिलान के बाद ही परिणाम की अधिकृत घोषणा हो सकेगी। लेकिन निर्वाचन विभाग राउंडवार मतगणना की जानकारी सार्वजनिक करता रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम में किसी भी प्रकार से गड़बड़ी नहीं हो सकती है। ईवीएम सिर्फ बैट्री पर संचालित है। इंटरनेट तकनीक का ईवीएम में कोई उपयोग नहीं है, इसलिए हैक की आशंकाएं निर्मूल हैं। 

जीत पर बवाल क्यों?: 

अधिकृत तौर पर तो 23 मई को ही पता चलेगा कि लोकसभा चुनाव में किसकी जीत हुई है, लेकिन मतगणना से पहले जो रुझान सामने आए हैं उसमें नरेन्द्र मोदी की जीत मानी जा रही है। मोदी की जीत की संभावना पर बिहार के एक नेता ने खून खराबे की आशंका जताई है। विपक्षी नेता का यह बयान देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संदेश हैं। दुनिया के कई देशों में देखा गया कि सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति बने व्यक्ति मतदान में धांधली कर वर्षों तक सत्ता में बने रहते हैं। कई बार ऐसे तानाशाह शासकों के विरुद्ध संबंधित देश की जनता सड़कों पर आ जाती है और राष्ट्रपति भवन या संसद के बाहर धरना दिया जाता है। ऐसे धरनों से तख्ता पलट भी हो जाता है। लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है जिस नेता को जनता ने वोट दिया है उस नेता के चुनाव पर अंगुली उठाई जा रही है। विपक्षी दलों के नेता भी मानते हैं कि इस बार का लोकसभा का चुनाव मोदी बनाम अन्य हुआ है। एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मोदी के चेहरे को आगे रख कर वोट मांगे हैं। कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष ने अपने प्रचार अभियान में मोदी को ही निशाना बनाया। विपक्ष का मकसद सिर्फ मोदी को हटाना रहा। मोदी को हटाने के लिए विपक्षी दल जो कुछ भी कर सकते थे वो किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपनी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीताने के लिए पूरी सरकार को ही दांव पर लगा दिया। पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तो टीएमसी के कार्यकर्ता की भूमिका निभाई। गुंडातत्वों ने टीएमसी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करवाया। इतना सब कुछ करने के बाद भी विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि परिणाम से पहले ही देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। यदि मोदी की जीत होती है तो चुनाव प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जाएगी। यदि पश्चिम बंगाल में मोदी को 15 से 20 सीटें मिल गई तो हो सकता है कि ममता बनर्जी लाख दो लाख लोगों को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठ जाएं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पहचान तो धरना सीएम से ही है। दिल्ली में धरना देंगे तो दुनिया भर में भारत की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। असल में विपक्षी दल मोदी की जीत को पचाने की स्थिति  में नहीं है। लाख कोशिश के बाद भी जब मोदी हारते नजर नहीं आ रहे हैं तो खून खराबे, धरना प्रदर्शन आदि की नीति अमल में लाई जा रही है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)



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