सोमवार, 20 मई 2019

राजस्थान में कांग्रेस की सीटें 3-4 आई तो किस तरह के हालात होंगे?

* पूर्वानुमानों से एक खेमे में हलचल तो एक गंभीर*
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अपडेट 20-5-2019.

राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस तीन चार सीटों पर ही सिमट कर रह जाने के लगातार आ रहे आकलन और अनुमान के कारण पार्टी में हलचल पैदा हो रही है।
अशोक गहलोत येन केन सचिन पायलट  को मुख्यमंत्री की दौड़ में पछाड़ कर मुख्यमंत्री तो बन गये थे मगर अब लोकसभा चुनावों में हार का ठीकरा भी उन्हीं के सर फूटेगा, इसलिए कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने के लिए दबाव बनाया जायेगा । 


इस हालत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत की कमजोर मानी जा रही सीट नहीं जीती जा सकी तो अशोक गहलौत पर  नैतिकता  के नाम मुख्यमंत्री पद छोड़ देने के लिए भी दबाव पड़ना निश्चित होगा। 


सभी जानते हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट ने हरकदम पर जोर लगाया और इस वजह से अशोक गहलौत को देरी से सीएम घोषित किया गया लेकिन इससे पहले सचिन को उपमुख्यमंत्री तय किया गया।
विधानसभा चुनाव में टिकटों की सिफारिश में भी सचिन का पूरा दबाव रहा था। इसके बाद भी चुनावी हलचल पर गौर करें कि अशोक गहलौत जहां जहां गए,वहां सचिन छाया के रूप में साथ रहे। ये सभी हालात प्रमाण हैं कि राजस्थान में अशोक गहलौत से सचिन पायलट बराबर की पावर में हैं। 
अशोक गहलौत ने लोकसभा की समस्त 25 सीटें जिताने का दावा किया था और इसमें हालात 3-4 तक ही सिमट जाएं तो पद छोड़ने का दबाव कितना अधिक होगा? 
जब आम जनता चुनाव के परिणाम का अनुमान लगा रही है तो कांग्रेस के भीतर भी सुगबुगाहट शुरू है। मुख्यमंत्री बदला जा सकने की सुगबुगाहट हो तो ऐसी स्थिति में नया मुख्यमंत्री कौन होगा?
(अगर कांग्रेस के पूर्व अनुमान से आधी सीटे यानि की 12 से 15 के बीच भी कांग्रेस जीत जाती है तो मुख्यमंत्री बदलने जैसा कदम नहीं होगा। इस स्थिति में भी मुख्यमंत्री बदलने की मांग तो उठेगी मगर कांग्रेस केन्द्रीय नेतृत्व को जोर आयेगा व परिवर्तन आसान नहीं होगा।)

पूर्व अनुमान और परिवर्तन के अनुमान कुछ भी हों,मगर सही स्थिति तो चुनावी परिणाम के बाद ही पता चलेगी। 
राजस्थान में 13 सीटों पर 29-4-2019 के मतदान के बाद शेष 12 सीटों के चुनाव की तैयारी रही जिसमें सभी व्यस्त रहे। 


पहले 13 सीटों और बाद मेंं जब शेष 12 सीटों पर हुए मतदान की हवा और वातावरण का मालूम हुआ तब समस्त 25 सीटों की सुगबुगाहट शुरू हो गई। 
संपूर्ण राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2013 के बाद कहीं नजर ही नहीं आता कि राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलौत की सरकार का राज है। कोई परिवर्तन नहीं और अपराधियों में कोई भय नहीं।



ऐसी हालत और उसमें कमजोर परिणाम आने की संभावना से एक खेमें में हलचल और एक में गंभीरता की चर्चाएं हैं। **
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लेखन 9-5-2019.
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