रविवार, 21 अप्रैल 2019

सूरतगढ़ में बिजली गुल और खारे पानी का तूफान * लोकसभा चुनाव के मौके पर लोग नाराज*

****मील से लोगों के दिल नहीं मिलते-भरतराम मेघवाल ने भी मेल की कोशिश नहीं की।*****


* करणीदानसिंह राजपूत *


लोकसभा चुनाव के ऐन मौके पर सूरतगढ़ में खारे पानी का वितरण और बिजली का बीसियों बार गुल हो जाने से तूफान मचा है। सोशल मीडिया पर लगभग हर ग्रुप में खारे पानी और बिजली की आवाजाही पर रोष प्रकट किया जा रहा है। शहर के लोग बेहद नाराज हो रहे हैं कि प्रशासन सो रहा है और विभागों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। सूरतगढ़ में सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन के होने के बावजूद बिजली की हालत बहुत खराब है। सड़कों की बिजली तो हद से ज्यादा गायब रहती है। एक तरफ अंधेरा तूफानी वर्षा और उस समय बिजली का गायब होना आम आदमी को पीड़ित करने वाला रहा है। आश्चर्य यह है कि लोगों की आवाज़ के बावजूद कोई सुधार नहीं हो रहा। आरोप है कि जोधपुर विद्युत वितरण निगम के अधिकारी सूरतगढ़ में नहीं रहते। वे दूसरे शहरों में रहते हैं रात को यहां नहीं रहते और उस कारण भी व्यवधान रहता है। फील्ड के कर्मचारियों की ड्यूटी भी कार्यालयों में कंप्यूटरों पर लगाने का आरोप है। जनता की आवाज पर कुछ भी नहीं हो रहा है। 

 इस बिजली की अव्यवस्था में पानी का भी बुरा हाल हो गया है। सूर्योदय नगरी में पानी 1 दिन छोड़ कर दिया जाता है उसका भी कोई समय निर्धारित नहीं है। पूर्ण रूप से पानी शुद्ध भी नहीं होता। हालात बहुत खराब है और अचानक 20 अप्रैल से सोशल मीडिया पर छाया कि शहर में खारे पानी की सप्लाई हो रही है। विभाग की ओर से पूर्ण चुपी है। नेताओं की ओर से भी सभी चुप बैठे हैं।


सबसे बड़ी आश्चर्यजनक बात यह है कि चुनाव के मौके पर जब एक तरफ कांग्रेस की सरकार श्री गंगानगर लोकसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी भरतराम मेघवाल को जिताने की कोशिश कर रही है वहीं पर सूरतगढ़ के लोगों को बिजली बंद और खारे पानी की सप्लाई से पीड़ित किया जा रहा है।  इस तरह से कांग्रेस पार्टी के नेता सूरतगढ़ से भरतराम मेघवाल को कैसे वोट दिला पाएंगे? 

एक कहावत भी वर्षों से चली आ रही है के अशोक के काल में बिजली पानी का संकट और आकाल की छाया रहती है। हालात यही दर्शा रहे हैं और कहावत चरितार्थ हो रही है।

इन हालात में तो कांग्रेस को परेशान जनता से अपने प्रत्याशी के लिए वोट मिलना मुश्किल ही लगता है। 

कांग्रेस के लोगों की कोई रुचि नजर नहीं आती है। सूरतगढ़ विधानसभा सीट 2018 में हारने के बाद कांग्रेस की गाड़ी वापस पटरी पर नहीं आई। बिखरे नेता और गुट जुड़ नहीं पाए। किसी ने भी कांग्रेस को एकजुट करने की कोशिश ही नहीं की। असल में मील के साथ दूसरों के दिल ही नहीं मिलते। भरतराम को अपने स्तर पर मेल बिठाने का प्रयास करना था लेकिन जिन्हें मिलने के लिए फोन काल किया,वहां भी नहीं गए।

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