गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

मदनलाल कस्वां : न फोनकॉल आती न नहर में गिरते- होनी होकर रहती है

-- करणीदानसिंह राजपूत --




नौ फरवरी रात के करीब आठ बजे भयानक शीत में मदनलाल कस्वां को मोबाइल पर काल आई और वे बात करते करते नहर में फिसल गए। मोबाइल काल न आती और न नहर में  गिरते। इंदिरा गांधी नहर की बुर्जी नं 285 पर यह दुर्घटना हुई। सर्दी में भयानक ठंडे पानी और बहाव में गिरने के बाद संभावना भी कितनी की जाए?यहां आकर आदमी कह उठता है कि होनी को कोई टाल नहीं सकता।

वह काल कहां से आई और इतनी चली कि उसमें ऐसी क्या बात रही जिसमें खोकर कस्वां नहर किनारे चले गए और फिसल गए। न काल आती न यह दुर्घटना होती। 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें