सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

कविताओं के रंगों में रंगी बंसत पंचमी

* स्वामी केशवानंद ज्ञानालय में उठी राजस्थानी भाषा मान्यता की मांग*

ज्ञानालय को भेंट की गई एक दर्जन पुस्तकें

गोलूवाला

स्वामी केशवानंद ज्ञानालय में बसंत पंचमी के अवसर पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।

चौटाला के नवोदित रचनाकार अंकित ने सूरज कविता प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की।व्याख्याता डॉ. दयाराम वर्मा ने बसंत पंचमी पर अपनी कविता "मेरे लिए तुम ही सब कुछ हो" प्रस्तुत की।सुखवीर सिंह त्यागी ने सम सामयिक मुद्दों पर अपनी कविताएं प्रस्तुत की।

बहलोलनगर के युवा राजस्थानी कवि हरीश हैरी ने अपनी राजस्थानी कविताएं प्रस्तुत की।हैरी ने राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची और राज्य स्तर पर राजस्थानी को राजभाषा घोषित करने की मांग उठाई। युवाओं से आह्वान किया की हर प्रदेश ने अपने राज्य में भाषा की बाड़ लगा रखी है परंतु राजस्थान के लोगों को चंद लोग भ्रम में डालकर राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं दे रहे हैं।यह पूरे विश्व में फैले हुए 21 करोड़ राजस्थानीयों का अपमान है। राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं होने से राजस्थान की लोक कला संस्कृति को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। राजस्थान के लोग अब बहुत देर तक अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपना हक लेकर ही रहेंगे।

हनुमानगढ़ के शायर सुरेंद्र शर्मा सत्यम ने कविता और ग़ज़ल के विविध रंगों से उपस्थित श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।"सोनोग्राफी की रिपोर्ट,मिलने के बाद कल जीऊंगी या मरूंगी ये,पता चल पाएगा।" इसके अलावा "जिंदगी की खेलनी हैं मुझको भी कुछ पारियाँ

क्यों हुई माँ कोख में ही कत्ल की तैयारियां" सुनाकर कन्या भ्रुण हत्या जैसे अपराध से दूर रहने की सीख दी। इसके बाद उन्होंने अपनी हास्य रचनाओं के माध्यम से भी उपस्थित श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

मनोज देपावत ने युवा श्रोताओं से आह्वान किया की वे भी साहित्य से जुड़कर अपने विचारों को अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करें। कार्यक्रम में पधारे कविगण को सम्मान प्रतीक देकर सम्मानित किया गया।इस दौरान सुरेन्द्र शर्मा सत्यम ने करीब एक दर्जन पुस्तकें स्थानीय लाइब्रेरी को भेंट की।इस अवसर पर काफी संख्या में स्थानीय लाइब्रेरी के विद्यार्थी उपस्थित थे।कार्यक्रम का मंच संचालन मनोज देपावत ने किया।सफल कार्यक्रम हेतु स्वामी केशवानंद ज्ञानलय के शिशुपाल सुथार ने सब का आभार जताया।




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