गुरुवार, 31 जनवरी 2019

धमकी और घमंड भरा है सीएम अशोक गहलोत का जेल में डालने वाला बयान।

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता 8 फरवरी को जेल भरो आंदोलन की शुरुआत सोच समझ कर करें, क्योंकि यदि कांग्रेस सरकार ने जेल में डाल दिया तो बाहर निकलना मुश्किल होगा। यह बयान गहलोत ने 29 जनवरी को अपने गृह जिले जोधपुर में सार्वजनिक मंच से दिया। मालूम हो कि किसानों की कर्ज माफी, 3500 रुपए का बेरोजगारी भत्ता, गरीब सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण देने आदि की मांग को लेकर राजस्थान में भाजपा ने 8 फरवरी से जेल भरो आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को सरकार के खिलाफ आंदोलन करने का अधिकार है। भले ही ऐसे आंदोलन राजनीतिक नजरिए से हों। प्रदेश में जब भाजपा का शासन था, तब कांग्रेस ने भी ऐसे आंदोलन किए। भाजपा ने जिन मांगों को सामने रखा है वे सब कांग्रेस के घोषणा पत्र में हैं। ऐसे में सीएम गहलोत की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है कि मांगों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। अब सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए भाजपा कोई आंदोलन कर रही है तो धमकी और घमंड से भरे वाले बयान क्यों दिए जा रहे हेै? क्या सत्ता में आते ही गहलोत की सोच बदल गई? आम तौर पर गहलोत को गांधीवादी विचारधारा का राजनेता माना जाता है। महात्मा गांधी ने तो जेल भरो आंदोलन से ही देश को आजाद करवाने में सक्रिय भूमिका निभाई। गांधीजी के पास आंदोलन का ही सहारा था। जब गहलोत सूत की माला पहन कर स्वयं को गांधीजी का अनुयायी होने का दावा करते हैं तो फिर जेल में डालने की धमकी क्यों दे रहे हैं? भाजपा के शासन में गहलोत सीएम वसुंधरा राजे पर घमंडी होने का आरोप लगाते रहे। गहलोत का कहना था कि राजे प्रवृत्ति से घमंडी हैं, इसलिए आम लोगों से नहीं मिलती हैं। सवाल उठता है कि गहलोत अब खुद क्या कर रहे हैं? क्या जेल डालने और फिर बाहर नहीं निकलने देने वाला बयान घमंड से भरा नहीं है? गहलोत को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे उसी राजस्थान के सीएम हैं जिस प्रदेश की जनता ने 2013 में कांग्रेस को मात्र 21 सीटें दी थीं और तब गहलोत ही सीएम थे। दिसम्बर 2018 में गहलोत किन परिस्थितियों में सीएम बने हैं यह खुद गहलोत अच्छी तरह जानते हैं। गहलोत के सीएम बनने की पीड़ा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट से पूछी जा सकती है। अच्छा हो कि गहलोत अपनी कथनी और करनी में अंतर न करें; गहलोत को अभी लोकसभा चुनाव की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। यदि गहलोत को अपनी ताकत पर इतना ही घमंड है तो गुर्जर आंदोलनकारियों पर कार्यवाही करके दिखाएं। पांच प्रतिशत विशेष आरक्षण की मांग को लेकर कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में गुर्जर समुदाय ने धरना शुरू कर दिया है। यदि मांगे पूरी नहीं हुई तो रेल और सड़क मार्ग भी जाम होगा। देखते हैं कि सचिन पायलट के डिप्टी सीएम रहते अशोक गहलोत कितने गुर्जरों को जेल में डालते हैं।

एस.पी.मित्तल) (30-01-19)


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