रविवार, 2 दिसंबर 2018

नाराज कांग्रेसी सूरतगढ़ हराकर कैसे बनाएंगे हाथ की सरकार?


* करणी दान सिंह राजपूत *

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा करने वाले नाराज कांग्रेसी सूरतगढ़ सीट को हराने में लगे हैं। अगर सूरतगढ़ सीट हराते हैं तो सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार कैसे बनेगी?

कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए एक एक सीट का महत्व है।लेकिन नाराज कांग्रेसी सूरतगढ़ सीट को हराने के लिए अपने अपने घरों में बैठे हैं या फिर कई हाथी की सवारी पर गुप्त रूप से चढ़ गए हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी हनुमान मील को हर हालत में हराने के लिए नाराज कांग्रेसी अपने साथियों और लोगों को हाथी पर सवार होने का प्रचारित कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से गांव गांव में नाराज लोग पहुंच भी रहे हैं। उनका नाम लेने की यहां आवश्यकता नहीं है क्योंकि उन लोगों को शहर वाले और गांव वाले जानते हैं। कुछ नाराज कांग्रेसी  टिकट मांगने में भी रहे थे। वे सूरतगढ़ में हाथी के लिए कह रहे हैं और सूरतगढ़ के आसपास अन्य विधानसभा सीटों पर जाकर हाथ के लिए वोट मांग रहे हैं। यह आश्चर्यजनक स्थिति है। वे स्पष्ट रूप से दावा करते रहे हैं कि प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार कांग्रेस की सरकार आएगी लेकिन जब नाराज लोग एक-एक सीट को हराएंगे तब कांग्रेस की सरकार प्रदेश में कैसे आएगी? सूरतगढ़ से टिकट मांगी थी तो अब सूरतगढ में ही वोट मांगने का कार्य करना चाहिए था। अनजान क्षेत्र में कहने से कौन वोट देगा? 

सूरतगढ़ के कुछ टिकटार्थी आठ 10 सालों से कहीं भी सक्रिय नहीं थे। कांग्रेस के अभियानों में यदा कदा उपस्थिति मात्र दर्द करवा रहे थे। (लेकिन गंगा जल मील की उपस्थिति निरंतर रही।)

आज वे जितना दम हाथी को जिताने के लिए लगा रहे हैं उतना दम हाथ के लिए लगाते तो हाथ की स्थिति बहुत मजबूत होती, संभव है की जीत भी हासिल होती। 

 इस प्रकार के कुछ लोग तो सन 2013 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी गंगाजल मील को साथ न देकर अन्य क्षेत्रों में चले गए थे। वे इस बार भी हनुमान मिल को सहयोग न देकर अन्य क्षेत्रों में चले गए हैं, अन्य क्षेत्रों में वोट मांग रहे। कुछ लोग अशोक गहलोत के चुनाव प्रचार में जाकर भी आए हैं। अशोक गहलोत चुनाव जीत जाते हैं यदि एक सीट भी कांग्रेस की कम रहती है और वह सूरतगढ़ सीट कम रहती है तो? 

दसों सालों से कांग्रेस में रहकर भी काम नहीं करने वाले और अब विरोध करने वालों का क्या होगा? क्या पार्टी को ऐसे लोगों को साथ में रखकर भविष्य में  भी सफलता मिल पाएगी? कांग्रेस पार्टी को ही आदेश देना चाहिए था कि जो जिस सीट से टिकट मांग रहे थे, वे उसी जगह वोट मांगें समर्थन करें और अन्य सीटों के प्रत्याशी साथ में नहीं रखें। 

आज की तारीख में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाथी के लिए वोट मांगने वाले उत्तर दें कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार कैसे बनेगी?

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