रविवार, 25 नवंबर 2018

पूर्व केंद्रीय मंत्री के ठिकानों पर ईडी का छापा, 5700 करोड़ रुपये के गबन के सुराग मिले


* ईडी का केस सीबीआई द्वारा एम एस बीस्ट और क्रॉम्प्टन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, चेन्नई (बीसीईपीएल) के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और एक कॉरपोरेशन बैंक के साथ धोखाधड़ी कर 364 करोड़ रुपये के लोन प्राप्त करने को लेकर दायर तीन एफआईआर पर आधारित है।*

 25 नवंबर 2018.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग (आईटी) ने शुक्रवार (23 नवंबर) तथा शनिवार (24 नवंबर) को पूर्व केंद्रीय मंत्री वाई सत्यनारायण चौधरी के हैदराबाद स्थित कई ठिकानों पर तलाशी ली। यह तलाशी मनी लाउंडरिंग के मामले में की गई है। चौधरी सुजाना ग्रुप ऑफ कंपनी के मालिक हैं। उन्हें सुजाना चौधरी के नाम से भी जाना जाता है। ईडी ने इससे संबंधित अन्य कंपनियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की। इसमें दिल्ली का एक ठिकाना भी शामिल है। ईडी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि इस जांच में बैंकों के साथ 5700 करोड़ रुपये के हेरफेर का सुराग मिला है। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि इन कंपनियों को कुछ लोन वाई एस चौधरी के पर्सनल गारंटी पर दी गई थी।

ईडी ने अब चौधरी से जांच में शामिल होने को कहा है और 27 नवंबर को हाजिर होने के लिए सम्मन जारी किया है। ईडी के अनुसार, “वाई एस चौधरी के आवास पर 6 कीमती गाड़ी (फेरारी, रेंज रोवर, बेंज, इत्यादी) पाए गए हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन फर्जी कंपनी के नाम पर किया गया है।” जिन ठिकानों पर छापेमारी की गई है, उनमें स्पेंलडीड मेटल्स और सुजाना यूनिवर्सल शामिल हैं। ये दोनों चौधरी से संबंधित हैं और हैदराबाद के नार्गाजुना हिल्स व जुबली हिल्स में स्थित हैं।


ईडी ने दावा किया कि छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जो यह खुलासा करते हैं, “इन कंपनियों के समूह के खिलाफ फेमा, डीआरआई और सीबीआई के कई केस पहले से ही दर्ज हैं। साथ ही विदेशी मुद्रा व्यापार से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। जब्त दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि वे करीब 120 कंपनियों को नियंत्रित कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश कंपनियां या तो बंद है या फिर सिर्फ कागजों पर चल रही है।” ईडी का केस सीबीआई द्वारा एम एस बीस्ट और क्रॉम्प्टन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, चेन्नई (बीसीईपीएल) के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक और एक कॉरपोरेशन बैंक के साथ धोखाधड़ी कर 364 करोड़ रुपये के लोन प्राप्त करने को लेकर दायर तीन एफआईआर पर आधारित है।

ईडी ने 8 अक्टूबर को चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद में बीसीईपीएल के प्रमुख अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसर में छापेमारी की थी। ईडी के अनुसार, “छापेमारी में प्लाट नं .8, नागार्जुन हिल्स, पुंजगुट्टा, हैदराबाद -500082 स्थित ठिकाने से विभिन्न शेल कंपनियों के 126 रबड़ स्टांप जब्त किए गए थे। साथ ही यह भी पाया गया था कि ये ठिकाने सुजाना ग्रुप की कई कंपनियों से जुड़े हुए थे।” ईडी के अनुसार, जब्त दस्तावेजों से यह संकेत मिला कि कि सुजाना समूह की कंपनियों के साथ बीसीईपीएल वाईएस चौधरी के नियंत्रण में काम कर रहा था।  ईडी ने संदिग्ध कंपनियों के साथ चौधरी के कनेक्शन के सबूत मिलने का भी दावा किया। वाई एस चौधरी तेलुगु देशम पार्टी के हैं।

8 अक्टूबर के बाद यह दूसरी बार है जब ईडी और आईटी की टीम ने चौधरी के ठिकानों पर छापेमारी की है। इसके साथ ही टीडीपी के छह अन्य नेता भी सेंट्रल एजेंसियों के निशाने पर हैं। वहीं, आध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया है कि, “भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीडीपी को टारगेट करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग कर रहे हैं। यह तब हो रहा है कि जब टीडीपी एनडीए गठबंधन से हट चुकी है।”


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