शुक्रवार, 12 अक्तूबर 2018

सूरतगढ़:कांग्रेस टिकट पर जबरदस्त युद्ध शुरू:मील की राह में रोड़े बने नये दावे

- करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ सीट पर कांग्रेस की टिकट पाने के लिए चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में ही युद्ध शुरू हो गया है। टिकट के लिए जबरदस्त टक्कर हो रही है।सूरतगढ़ में भाजपा की हालत बहुत कमजोर मानी जाने के कारण कांग्रेस की टिकट पर युद्ध होने लगा है।


 टिकट किसको मिल पाएगी यह अभी पर्दे के पीछे है। इस बार विगत के प्रत्याशी पूर्व विधायक गंगाजल मील को जबरदस्त चुनौतियों के कारण तीसरी बार सूरतगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव में उतारने में बाधाएं खड़ी हैं। पांच साल 2008 से 2013 के विधायक काल के बाद 2013 के चुनाव में मील का पराजित होकर तीसरे क्रम पर गिरना और 32 हजार वोटों से हारने के हालात की कमजोरियों में टिकट मिलना संभव नहीं।जब पार्टी सत्ता में लौटने के लिए सूरतगढ सीट को जीतना चाहती है। 

कांग्रेस भी जीत के लिए बदलाव कर टिकट देगी का मतलब साफ है कि दूसरा चेहरा होगा।

इस बार पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील सरदार  हरचंद सिंह सिद्धू  और  विमलकुमार पटावरी ( जैन) प्रबल दावेदार हैं। सिद्धु पहली बार 1977 में और दूसरी बार 1998 में विधायक बने थे। सिद्धु का दूसरी बार का कार्यकाल 2003 तक रहा। अब 15 साल बाद सूरतगढ सीट से टिकट मांग रहे हैं।

काग्रेस टिकट के ये दोनों दावेदार लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। विमल कुमार पटावरी सूरतगढ के मूल निवासी हैं और सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। कांग्रेस के उच्च नीतिकारों नेताओं के संगी हैं।

इनके पिता स्व.गौरीशंकर पटावरी पुलिस अधिकारी होते हुए  सन 1978 में तत्कालीन गृहमंत्री केदारनाथ के पी.ए.रहे थे।

इस बार कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा भी पुराने दावेदारों में हैं। विधानसभा चुनावों के अनुभवी भी हैं। अनूपगढ़ पंचायत समिति के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह रंधावा पुराने कांग्रेसी भी टिकट के सशक्त दावेदार हैं। 

कांग्रेस टिकट के दावेदारों में अमित कड़वासरा,राकेश बिश्नोई, गगनदीप सिंह विडिंग के नाम भी हैं। अमित कड़वासरा का परिवार 60 सालों से कांग्रेस से जुड़ा है। पिता वेदप्रकाश कड़वासरा सरपंच रहे हैं। वे और अमित छात्र जीवन से राजनीति में हैं। राकेश बिश्रोई टिब्बा क्षेत्र आंदोलन के जूझारू नेता हैं। गगनदीपसिंह युवक कांग्रेस के सूरतगढ विधानसभा क्षेत्र के संघर्षशील अध्यक्ष रहे हैं।













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