मंगलवार, 25 सितंबर 2018

आरएएस अधिकारी सामूहिक अवकाश ले सकते हैं?चुनाव प्रक्रिया के दौरान

* सरकार के इशारे पर दी गई धमकी-  पंचायती राज के आंदोलनकारियों का आरोप*

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) एसोसिएशन के अध्यक्ष आईएएस पवन अरोड़ा ने मुख्य सचिव डी.बी. गुप्ता को एक ज्ञापन सौंप कर कहा है कि यदि आरएएस अधिकारियों की मांगों को नहीं माना गया तो अधिकारी वर्ग सामूहिक अवकाश पर चला जाएगा। एसोसिएशन की बैठक 23 सितम्बर को जयपुर में हुई थी और एक सप्ताह के हिसाब से एक अक्टूबर से प्रदेश भर के आरएएस सामूहिक अवकाश पर जा सकते है। सब जानते र्हु कि पवन अरोड़ा मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के विश्वासपात्र आईएएस है और अनेक आरएएस चुनाव डयूटी में लगे हुए है, नियमों के अनुसार चुनाव डयूटी वाला अधिकारी छुट्टी पर नहीं जा सकता। एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी पता है कि आरएएस अफसरों द्वारा सामूहिक अवकाश लेना आसान नहीं है। वहीं गत 12 सितम्बर से हड़ताल कर रहे पंचायती राज के अधिकारी और कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि हमारे आन्दोलन को कमजोर करने के लिए ही आरएएस एसोसिएशन ने सरकार के इशारे पर सामूहिक अवकाश की धमकी दी है। पंचायती राज के आंदोलनकारियों के प्रतिनिधि सत्यपाल कुमावत ने कहा कि आरएएस अधिकारी अपनी मांगों के लिए आन्दोलन करे। इस पर उन्हें कोई एतराज नहीं है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में हम जब पिछले 15 दिनों से आन्दोलन पर है तब हमारे आन्दोलन को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। आरएएस एसोसिएशन ने वो मांग की है जो हमारे विकास अधिकारी की मांग को प्रभावित करती है। प्रदेश के बीडीओ लगातार मांग कर रहे हैं कि जिस प्रकार तहसीलदारों की पदोन्नित आरएएस केडर में होती है उसी प्रकार हमारी भी की जाए क्योंकि लोक सेवा आयोग से चन की प्रक्रिया में आरएएस के साथ ही बीडीओ भी शामिल होते है। देश के कई राज्यों में बीडीओ को राज्य प्रशासनिक सेवा में पदोन्नित का प्रावधान है। हमने जब जिला परिषद के सीईओ और एसीईओ के पद पर बीडीओ को लगाने की मांग की तो आरएएस एसोसिएशन को अपने केडर की याद आ गई जबकि एसोसिएशन के पदाधिकारी भी जानते है कि ग्रामीण विकास की योजनाओं की क्रियान्वित में पंचायती राज के अधिकारियों और कर्मचारियों की ही भूमिका होती है। हमारी मेहनत का नतीजा ही है कि केन्द्र सरकार की मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, स्वच्छ भारत मिशन, केन्द्रीय पेंशन योजना तथा ई गवर्नेस योजनाओं में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर ईनाम मिले हे। प्रधानमंत्री आवास योजना में तो राजस्थान प्रथम स्थान पर रहा है। सरकार हमारी मांगों पर अनेक बार सहमति जता चुकी है, हम तो सहमति की ही क्रियान्वित चाहते है। आरएएस अधिकारी भी हमारे सहयोगी है और हमें उम्मीद है कि आरएएस अधिकारी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे हमारा आन्दोलन कमजोर पड़े। वैसे भी प्रशासन में आरएएस का ही दबदबा है और हम तो आरएएस के अधीन ही काम करते है। होना तो यह चाहिए था कि आरएएस अधिकारी हमारी मांगों को समर्थन देते। कुमावत ने बताया कि सरकार के गैर जिम्मेदारा रवैए की वजह से पंचायती राज के 12 हजार कर्मचारियों और अधिकारियों में आक्रोश है। इसीलिए 26 सितम्बर को जिला मुख्यालय पर आक्रोश वाहन रैली निकाली जाएगी तथा 2 अक्टूबर को प्रदेश भर के कर्मचारी और अधिकारी जयपुर में अपने परिवार के सदस्यों के साथ धरना देंगे। तीन अक्टूबर को जयपुर में आमरण अनशन शुरू कर दिया जाएगा। मालूम हो कि हड़ताल की वह से राजस्थान के पंचायती राज का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा है।

एस.पी.मित्तल


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