शनिवार, 29 सितंबर 2018

विधायक भादू का दावा-टक्कर में कोई नहीं





-  करणीदानसिंह राजपूत -


विधायक राजेंद्रसिंह भादू ने हाल ही में एक चैनल के इंटरव्यू में स्पष्ट दावा किया कि उनके मुकाबले में कोई भी नेता सामने नहीं है। यह दावा अपने आप में बहुत मजबूत है और विधायक ने अपनी पावर घोषित कर दी है। यह एक प्रकार की चुनौती है की कुश्ती करने वाला अन्य को ललकार रहा है। कुश्ती करने को तैयार विधायक राजेंद्र सिंह भादू पर जनता की ओर के अनेक आरोप लगाते हुए और उनके पुत्र अमित भादू का नाम लेकर भी सवाल किए गए लेकिन विधायक ने जवाब में अपने को बेदाग बताया। 

भादू ने पुत्र के मामले में भी घोषित किया कि उनके पुत्र का किसी मामले में दखल नहीं है,पुत्र केवल विधायक के कार्य में सहयोग मात्र करता है। 

विधायक शब्द जाल में फंसाया नहीं सकता। हंसते हुए जवाब देने में माहिर है। 

 कुछ हद तक यह सच्चाई भी है कि फिलहाल उनके सामने टिकट के लिए और चुनाव के लिए कोई सशक्त नजर नहीं आ रहा। 

विधायक राजेंद्र सिंह भादू भारतीय जनता पार्टी की नीति अनुसार और राज्य सरकार की मंशा के अनुसार और विशेषकर राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मंशा के अनुसार कार्य करने में सदा अग्रणीय भूमिका निभाते रहे हैं। 

आरोप बहुत समय से लगते रहे हैं मगर वे भाषण बाजी तक सीमित रहे हैं। कोई भी ऐसा आरोप विधायक पर प्रतिपक्ष की ओर से नहीं लगाया गया है जो सीधे चोट पहुंचाने वाला हो या राजनैतिक छवि को चोट पहुंचाने वाला हो। विधायक ने टिकट प्राप्त करने के बाद अच्छे वोटों से जीत प्राप्त करके अपना कार्यकाल शुरू किया और उसे सफलता के साथ पूरा भी किया है। जहां तक सवाल है कार्यकाल में घटिया निर्माण भ्रष्टाचार और लोगों के काम नहीं होने का पुलिस के दमन का मगर जो कुछ पहले कहा है कि राजनैतिक प्रतिपक्ष दलों में मुख्य रूप से कांग्रेस पार्टी बहुजन समाज पार्टी आम आदमी पार्टी वे अन्य माकपा आदि ने विधायक के विरुद्ध या भारतीय जनता भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध कोई सख्त कदम ऐसा नहीं उठाया जिससे भारतीय जनता पार्टी और विधायक को जबरदस्त नुकसान हो जाता। हो सकता है इस कारण से भादू मानते हैं कि कोई टक्कर में नहीं है।

प्रतिपक्ष में विशेषकर कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक गंगाजल मील की ओर से व अन्य अन्य नेताओं की ओर से जब जब धरना प्रदर्शन उपखंड पर हुए उनमें 25 से 35 तक की उपस्थिति रही। ज्ञात रहे की सूरतगढ़ शहर के 35 वार्ड हैं और इस हिसाब से देखा जाए तो यह प्रदर्शन दिखावटी रहे जिन में 35 आदमी भी एकत्रित नहीं हो पाए। यह कांग्रेस पार्टी की भारी कमजोरी रही इसे केवल ज्ञापन तक या फिर समाचार पत्रों में न्यूज फोटो छप जाने तक का कार्य किया हुआ माना जाएगा। कभी कभी चैनलों पर प्रदर्शन करने के समाचार जरूर आए मगर उससे कांग्रेस पार्टी को कोई विशेष लाभ होता हुआ नजर नहीं आया।

सोशल मीडिया पर जोर शोर से कहा जा रहा है कि इस बार सूरतगढ़ का विधायक डूंगर गेदर होगा लेकिन बहुजन समाज पार्टी की ओर से भी विधायक के कार्यकलापों और सरकार के कार्यकलापों पर कोई जबरदस्त चोट पहुंचाने वाला हमला प्रदर्शन धरना नहीं हुआ। जो स्थिति कांग्रेश की रही वही स्थिति बहुजन समाज पार्टी की भी रही कि वह सोशल मीडिया में छाई रही मगर उसका असर कोई प्रभावी नजर नहीं आता। 

आम आदमी पार्टी इस बार चुनाव लड़ने का प्रचार कर रही है। प्रत्याशी भी मैदान में घोषित कर चुकी है मगर विजय प्राप्ति तक के वोट प्राप्त कर सके प्राप्त कर सके यह संभव नहीं लग रहा। यह पार्टी भी उपलब्धियां नहीं गिना सकती।

भाजपा सरकार के कार्यकाल में सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में जो कुछ हुआ उस पर कोई सशक्त विरोध आम आदमी पार्टी का नहीं है। भ्रष्टाचार के आरोप सीवरेज गौरव पथ को लेकर लगाए गए। मगर उनके ऊपर कोई कार्यवाही हो ऐसी जगह पर शिकायत आदि नहीं हुई जो जनता की नजरों में वोट को प्रभावित कर सके। 

भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र सिंह भादू के विधायक काल में प्रतिपक्षी दल और नेता केवल नगर पालिका के ऊपर ही के ऊपर ही जोर लगाए रहे लेकिन काम वहां भी नहीं किया। सरकार के अन्य स्तंभ जो आम जनता को प्रभावित करते हो जहां आम जनता को परेशानियां हुई लोग पीड़ित हुए उन विभागों में विशेषकर राजस्व विभाग जिसके कार्यालय उपखंड अधिकारी राजस्व तहसील हैं वहां किसान और ग्रामीण परेशान होते रहे। पुलिस को प्रतिपक्ष चैलेंज नहीं कर पाया।  इसके अलावा कृषि उपज मंडी समिति सार्वजनिक निर्माण विभाग आदि के ऊपर भी सवाल जवाब नहीं हो पाए। 

पेयजल का मामला सूरतगढ़ शहर का बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है जिसमें जनता पीड़ित रही है। सूर्योदय नगरी जहां 10 वार्ड है और जिनमें पेयजल 1 दिन छोड़ कर कर दिया जाता है और वह भी पीने के लायक नहीं होता लेकिन आश्चर्य है कि प्रतिपक्ष इस मामले में बहुत कमजोर रहा और इस महत्वपूर्ण मुद्दे को भी उठा नहीं पाया। 

चुनाव में बहुत से मामले हैं जिन पर आचार संहिता के कारण बोल नहीं पाएंगे तब टक्कर में विधायक को कैसे पटखनी दे पाएंगे।

जनता में विधायक की पैठ कितनी है? यह सच्चाई तो मतदान और उसकी गणना के बाद ही सामने आएगा।

प्रतिपक्ष नेताओं और पार्टियों के केवल भाषणबाजी रवैये के कारण भादू का दावा मजबूत है की कोई टक्कर में नहीं है।



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