रविवार, 16 सितंबर 2018

पुलिस और आंदोलनकारी संयम रखें क्योंकि निर्णय अदालत में होगा:सूरतगढ सखी मोहम्मद प्रकरण




* करणीदानसिंह राजपूत*

सूरतगढ।

सखी मोहम्मद की पुलिस कस्टडी में पिटाई मामले में दोषियों को निलंबित करने की मांग को लेकर  उपखंड कार्यालय पर  सभा और  उपखंड अधिकारी के कार्यालय का घेराव किए जाने के समय  पुलिस  और आंदोलनकारियों के  बीच हुई  लाठी-भाटा जंग में  नया मुकदमा  जुड़ गया


 पुलिस थानाधिकारी की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में  50 व्यक्ति  आरोपित हो गए  जिसमें 28  नामजद हो गए। पहले  सफी मोहम्मद  की  अवैध  रूप से हिरासत और पिटाई  के मामले में  आईपीएस  प्रशिक्षु अधिकारी  मृदुल कछावा और सब इंस्पेक्टर  कलावती को निलंबित  करने की मांग थी। अब  नया मुकदमा  होने के बाद आंदोलनकारियों की तरफ से सूरतगढ़  सिटी थाने के  CI  निकेत कुमार पारीक  और  पुलिसकर्मियों पर  आरोप  लगाए गए हैं। 

इस मामले में अभी कुछ भी  नहीं कहा जा सकता  की  कौन दोषी है और कितना दोषी है और कौन निर्दोष है?  लेकिन  इस बढ़ती हुई  आग को  शांत कैसे किया जाए? फिलहाल  इसकी  जरूरत  अधिक है। सूरतगढ़ में ऐसा कोई  मास लीडर नहीं है  और  श्री गंगानगर जिले में  ऐसा कोई पुलिस अधिकारी नजर नहीं आ रहा  जो मिल बैठकर  एक बार  शांति  कायम करवाए और  दोनों प्रकरणों को  कानून के  हवाले करके अदालत का जो भी निर्णय हो  उसकी प्रतीक्षा करें।  ऐसा  किस तरह से  संभव हो पाएगा  यह भी  दोनों और की गर्मा गर्मी में  संभव नहीं है।

उपखंड अधिकारी के कार्यालय के आगे 6:00 सितंबर को हुई घटना के बाद पुलिस ने तत्काल उत्तेजित अवस्था में जो कुछ किया उसे छोड़ दिया जाए, लेकिन जो लोग पकड़े गए उनको थाने में बुरी तरह से मारने-पीटने यातनाएं देने का जांच का तरीका अनुचित बताते हुए 15 सितंबर को सूरतगढ़ संघर्ष समिति की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से हाईलाइन के संपादक सूरतगढ़ प्रेस क्लब के  पूर्व अध्यक्ष हरि मोहन सारस्वत ने 20- 25 मिनट में इस आंदोलन और पुलिस कार्यवाही के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

हरिमोहन सारस्वत सारस्वत को पुलिस ने मुकदमे में षड्यंत्रकारी बताते हुए आरोपित कर रखा है। हरिमोहन सारस्वत व अन्य 8 जने 14 सितंबर को जमानत पर छूटे और 15 सितंबर को प्रेस कांफ्रेस की। हरिमोहन सारस्वत ने कांफ्रेंस शुरू करते हुए कहा कि 6 सितंबर को उपखंड कार्यालय के आगे जो कुछ हुआ वह जनता की और आंदोलनकारियों की गलती से नहीं हुआ। आंदोलनकारी पिछले 40 - 45 दिन से सखी मोहम्मद मामले में न्याय की मांग कर रहे थे। न्याय की मांग करना गलत नहीं था। न्याय नहीं मिलने के कारण न्याय मांगने के लिए वहां पर एकत्रित हुए। हरिमोहन ने कहा कि थाना अधिकारी निकेत कुमार की हत्या का प्रयास का और पुलिस पर हमला करने का षड्यंत्र रचने का मुकदमा बनाया गया है जो खुद कह रहा है कि सच्चाई यह नहीं है। सारस्वत ने कहा कि वहां पर जो आंदोलनकारी एकत्रित हुए उनका इरादा थाना अधिकारी की हत्या करने की कोशिश का नहीं था बल्कि झगड़ा करने का भी नहीं था। वे केवल न्याय की मांग के लिए गए थे कि उनकी आवाज को उपखंड अधिकारी सुन लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। हरिमोहन ने कहा कि पुलिस के द्वारा बनाया गया मुकदमा पूर्ण रुप से असत्य है और अदालत में यह मुकदमा और धाराएं चल नहीं पाएंगे। हरिमोहन ने कहा कि वेखुद जब गिरफ्तारी के बाद जेल में गए  तब पूर्व में बंद आंदोलनकारियों ने पुलिस द्वारा दी गई यातनाओं के बारे में बताया।

मुद्गल बंधुओं राजेंद्र और उमेश ने कहा कि हर व्यक्ति को थाने में यातना दी गई। नंगा करके पट्टों से पिटाई की गई, जांघों पर खड़े होकर पुलिसकर्मियों ने जूतों से जांघों को रौंदा और गाली गलौज से अपमानित किया।उसके बाद उन्होंने गिरफ्तार व्यक्तियों को जो जमानत पर छूटे उनको कॉन्फ्रेंस के मंच पर बुलाकर पत्रकारों के समक्ष बयान करवाए पत्रकारों ने यह बयान सुने और फोटोग्राफ्स भी लिए। वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।

 हरिमोहन ने कहा कि हम नौ  व्यक्ति जो जेल से बाहर आए हैं  न्याय मांग रहे हैं न्यायनहीं मिला तो नौ ग्रहों के रूप में पुलिस के विरुद्ध प्रशासन के विरुद्ध खड़े होंगे और आंदोलन को जारी रखेंगे।


 हरिमोहन के शुरुआत के बाद सखी मोहम्मद ने भी अपनी बात रखी कि उसके साथ कितना अत्याचार किया गया। 

राजेंद्र मुद्गल तो सूरतगढ़ संघर्ष समिति का सचिव है। 

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में में सूरतगढ़ संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्याम कुमार मोदी जी उपस्थित थे जिन्होंने कहा कि इस आंदोलन को जारी रखा जाएगा और इसमें विभिन्न लोगों से राय ली जाएगी। कानूनी लोगों से राय ली जाएगी और कानूनी तरीके से भी लड़ाई लड़ी जाएगी। इसके बाद एक घोषणा हुई कि 18 सितंबर को व्यापार मंडल एक बैठक आयोजित कर नये  सिरे से विचार किया जाएगा कि इस आंदोलन को किस तरह से चलाया जाए। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस क्लब के सदस्य पत्रकार मौजूद थे जिन्होंने इस कांफ्रेंस को को रिकॉर्ड किया। 

इस पर आने वाला समय अपनी टिप्पणी करेगा कि पुलिस ने जो मुकदमा 6 सितंबर को दर्ज किया। थाना अधिकारी निकेत कुमार पारीक ने दर्ज करवाया उसमें कितनी सच्चाई है ? यह सब अदालत में निर्णय हो सकेंगे इसमें कितने लोग दोषी हैं नहीं हैं।

 पुलिस ने जो मुकदमा बनाया है वह बहुत सख्त है चाहे तथ्य किसी भी प्रकार के हैं। पत्रकार संगठनों सूरतगढ़ हनुमानगढ़ कुछ अन्य संगठनों ने हरिमोहन सारस्वत को इसमें झूठा फंसाने का कहते हुए मांग की है कि उन्हें मुकदमे से बाहर किया जाए।

 पुलिस ने इस मुकदमे में हरिमोहन को मुख्य षड्यंत्रकारी बनाते हुए आरोपित किया है  और सूरतगढ़ पुलिस ही इस मुकदमे की जांच कर रही है। ऐसी स्थिति में हरिमोहन सारस्वत को सूरतगढ़ पुलिस मुकदमे से बाहर कैसे और क्यों करेगी? जो पत्रकार और संगठन यह मांग कर कर रहे है वह चलती जांच में पूरी नहीं हो सकती। 

सबसे बड़ा सवाल है जो मुकदमा दर्ज कराए वही थाना जांच करे। आंदोलनकारियों की ओर से यह मांग हो सकती है और न्याय के अनुरूप है कि सूरतगढ़ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और वही इसकी जांच कर रही है जो नैसर्गिक न्याय के विपरीत है। यह जांच सूरतगढ़ के बाहर दी जाए और विशेषकर श्री गंगानगर जिले से बाहर दी जाए ताकि इस पर सूरतगढ व जिला पुलिस को अधिकार नहीं रहै।

सूरतगढ़ में फिलहाल पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच जो वातावरण उत्तेजित चल रहा है उसे समझदारी से रोका जाना चाहिए। नई गिरफ्तारियां  में जब तक अनुसंधान अन्यत्र स्थानांतरित नहीं हो तब तक सूरतगढ़ के सीआई और पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को भी संयम बरतना चाहिए क्योंकि अंतिम निर्णय अदालत करेगी और वह निर्णय सभी पक्षों को मान्य भी होगा।


 

 







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