रविवार, 1 जुलाई 2018

11शव:हत्या सहित आत्महत्या:राजस्थानी परिवार:पुलिस ने रहस्य खुला



न ई दिल्ली 1-7-2018.

दिल्ली के बुराड़ी इलाके में दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक घर से 11 शव मिले हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मौके पर पहुंच घटना की जानकारी ली। पुलिस से घटना संबंधी जानकारी लेने के बाद सीएम केजरीवाल ने मीडिया से भी बात की उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी घटना ही है। पुलिस इस मामले की खोजबीन में लगी है।


एक ही घर से बरामद हुए शव 


सभी शव एक ही घर से बरामद हुए हैं। मामला उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के संत नगर इलाके का है। बरामद किए गए शव सात महिलाओं और चार पुरुषों के हैं। जानकारी के मुताबिक, दो परिवारों के कुल 11 लोग एक ही घर में फांसी के फंदे पर लटके मिले। बताया जा रहा है कि फंदे पर लटके 10 शवों के आंखों पर पट्टी बंधी थी, जबकि एक शव जमीन पर पड़ा हुआ था। 


मृतकों में तीन नाबालिग शामिल


पुलिस के जॉइंट सीपी ने कहा कि मृतकों में तीन नाबालिग भी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि 11 लोगों के परिवार में दो भाई और उनकी पत्नियां थीं। दो लड़के करीब 16 से 17 साल के थे। मृतकों में एक बुजुर्ग मां और बहनें शामिल हैं। पुलिस के बताया कि 10 लोग फंदे से लटके मिले हैं जबकि एक बुजुर्ग महिला का गला दबाया हुआ है। 10 लोग जो फंदे से लटके मिले हैं वह सभी फर्स्ट फ्लोर पर मिले हैं।


पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव


जानकारी के मुताबिक पुलिस को सुबह साढ़े सात बजे शवों की सूचना मिली। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि यह सामूहिक हत्या का मामला है या सामूहिक आत्महत्या का। इस बीच मौके पर पहुंची पुलिस घटनास्थल का मुआयना कर रही है।


सामूहिक हत्या या आत्महत्या, जांच शुरू


पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है, ताकि इसके पीछे की वजहों को सामने लाया जा सके। हालांकि शुरुआती तौर पर पुलिस इसे खुदकुशी का मामला ही मान रही है। वहीं, एक ही घर से 11 शव बरामद होने से इलाके में हड़कंप मच गया है। कहा जा रहा है कि मरने वाले लोग दो भाइयों के परिवार वाले हैं। इनमें से एक का प्लाईवुड का कारोबार था और दूसरे की परचून की दुकान थी।


पड़ोसी ने देखा भयंकर मंजर 


जानकारी के मुताबिक रविवार सुबह करीब 7:30 बजे एक पड़ोसी परिवार को देखने के लिए गया। लेकिन अंदर घुसते ही उसे दरवाजा खुला मिला, आगे बढ़ा तो वो भयानक मंजर देखकर वो भी सहम गया। तत्काल पड़ोसी ने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस की छानबीन जारी है, आसपास के सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला जा रहा है। पुलिस के मुताबिक एक बुजुर्ग महिला अपने दो बेटों के 11 लोगों के परिवार के साथ करीब दो दशकों से यहां रह रहीं थीं। बुजुर्ग महिला का एक तीसरा बेटा भी है, चित्तौड़गढ़ में रहता है। वहीं, उसकी एक विधवा बेटी (58 साल) भी उनके साथ रहती थी। यह परिवार मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला था। 

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कुछ लोगों के हाथ पैर बंधे हुए हैं, कुछ लोगों की आंखों पर पट्टी भी बंधी हुई मिली है। मामले की जांच पुलिस से क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। 


एक ही घर में 11 लोगों के शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को घर में हाथ से लिखे गए अधूरे सुसाइड नोट नोट्स मिले हैं। शव जिस हालत में मिले हैं वह परिवार के आध्यात्मिक/रहस्यमय प्रथाओं के पालन की ओर इशारा करते हैं। 


जिस तरह शवों के मुंह पर टेप लगाई गईं हैं और उन्हें बांधा गया है वह हाथ से लिखे गए नोट्स की परिस्थितियों से मिलती हैं। पुलिस ने कहा कि वह इन कड़ियों को जोड़कर आगे की जांच करेंगी। 


इसके साथ ही जांच टीम को उम्मीद है कि सुसाइड नोट और कुत्ते के पट्टे पर मिले फिंगरप्रिंट की मदद से मौत की असली वजहों का पता लगा सकेगा।

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दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि जांच में पाया गया कि तीन लोगों ने आत्महत्या करने का फैसला किया लेकिन बाद में उन्होंने पूरे परिवार को ही मौत की नींद सुला दिया। फोरेंसिक टीम को मिले सुराग के अनुसार जिस  व्यक्ति ने परिवार के अन्य सदस्यों की हत्या की, उसने कई दिन पहली से इसकी योजना बना ली थी। उसने बेहाश करने वाली दवा खरीदी, जिसे रात को खाने में मिलाकर पूरे परिवार को खिला दिया। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार परिवार कर कोई सदस्य विरोध न करे इसके लिए उनके हाथ बांध कर फांसी लगाई गई। जांच में पाया कि उन तीनों ने सुसाइड नोट लिखने का भी फैसला लिया क्योंकि घर से कई कागज के टुकड़े पाए गए जिसमें लिखने का प्रयास किया गया था। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि घर में कोई भी व्यक्ति जबरदस्ती नहीं घुसा है। घर के अंदर भी किसी तरह के संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं।

पुलिस ने घर के पास लगे सीसीटीवी की फुजेट को भी खंगाला है, जिसमें पाया गया है कि घर के अंदर बीती रात से कोई नहीं गया है। ऐसे में पुलिस को शक है कि घर के ही सदसय ने इस घटना को अंजाम दिया है।हालांकि पुलिस की तरफ से इस मामले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस को सभी शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।


गौरतलब है कि दिल्ली के बुराड़ी इलाके में शनिवार को एक ही घर से 11 लोगों के शव मिलने से हड़कंप मच गया।मृतकों में सात महिलाएं और चार पुरूष हैं। इनमें 10 शव घर के अंदर लटके हुए मिले जबकि एक शव जमीन पर पड़ा हुआ था। मृतकों में एक वृद्ध महिला, उसके दो बेटे और उनकी बहुओं के अलावा 16-17 साल के दो लड़के तथा चार महिलाएं शामिल हैं। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस फिलहाल इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सभी मृतक एक ही परिवार के सदस्य थे और उनकी किराना की दुकान थी। 

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अहम सवाल यह है कि आखिर हमारा समाज किधर जा रहा है। 11 शवों में 7 महिलाओं के है जिनमें दो नाबालिग हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि अपराध कितना दर्दनाक और विभत्स होगा। असल में समाज में जिस तरह से अपराध की प्रकृति बढ़ रही है उसी के दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं। जिस परिवार के शव लटके मिले, वह पिछले तीस वर्षों से इसी इलाके में रह रहा है। आस पड़ोस के लोगों का कहना है कि परिवार के बारे में कभी कोई शिकायत नहीं मिली। वहीं यह बात भी महत्वपूर्ण है कि एक घर में एक के बाद एक 11 लोगों की सांस बंद हो गई और आस पड़ौस में किसी को भी पता नहीं चला। पुलिस तो अपने स्तर पर अपराध को रोकने का काम करती है। लेकिन अब समय आ गया है कि जब समाज को जागरुक होना पड़ेगा। हर परिवार अपने सुख दुख में इतना व्यस्त है कि उसे अपने पड़ौसी की कोई चिंता नहीं है। अपराध जब इतना शातिर है कि एक ही रात में 11 जनों को मौत की नींद सुला सकता है तो क्या फिर समाज को जागरुक होने की जरुरत नहीं है? इस घटना के बाद न कवेल समाज जागरुक हो बल्कि समाज संस्कारवान भी होना चाहिए। हम सब जानते हैं कि भारत की सामाजिक व्यवस्था में पश्चिम की बुराइयां आ गई है। स्वयं को आधुनिक दिखाने के लिए अपनी संस्कृति को भुलाया जा रहा है। समाज को बिगाड़ाने में टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले सीरियल भी जिम्मेदार है। महिला प्रधान सीरियलों में हमारी सनातन संस्कृति के विपरित कहानी दिखाई जाती है। 

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