शनिवार, 30 जून 2018

सूरतगढ सीट बसपा को छोड़ने से कांग्रेस देखने को भी नहीं बचेगी


^वर्तमान में कांग्रेस नेता और संगठन बेहद कमजोर*


* करणीदानसिंह राजपूत *


राजस्थान में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए कांग्रेस पार्टी अन्य दलों से गठबंधन करने के लिए तैयार हो रही है।

वर्तमान में टिकटार्थियों में अधिक पुराने नेताओं में पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु( जो करीब 30 साल से भी अधिक अवधि से कांग्रेस में है ) पूर्व विधायक गंगाजल मील,बलराम वर्मा,परमजीतसिंह रंधावा की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा। इनके अलावा युवक कांग्रेस के गगनदीप सिंह विडिंग, राकेश बिश्नोई,अमित कड़वासरा,विमल पटावरी( जैन) भी टिकटार्थियों में हैं,जिनके राजनीतिक कैरियर पर दौड़ शुरू होने से पहले ही रोक लग जाएगी। इनके अलावा भी टिकट की चाहत वाले हैं।

क्या कांग्रेस अपने नेताओं का राजनीतिक जीवन धुमिल करना चाहेगी जिसके बाद खुद काग्रेस भी बाद में शायद खड़ी न हो पाए। कांग्रेस के उच्च पदाधिकारियों को कोई भी समझौते वाला निर्णय लेने से पहले स्थानीय नेताओं और संगठन से राय लेनी ही चाहिए। 

सूरतगढ़ से विगत चुनाव 2013 में कांग्रेस पार्टी तीसरे क्रम पर और बहुजन समाज पार्टी दूसरे क्रम पर रही इसलिए बहुजन समाज पार्टी का समझौते में इस सीट पर प्रबल दावा होने के समाचार छन छन कर कर आ रहे हैं। 


राजस्थान में किसी भी तरह से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में पुनः आने से रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी 2018 के चुनाव को हर हालत में जीतना चाहती है।

 अगर समझौते में सूरतगढ़ सीट बहुजन समाज पार्टी को छोड़ी जाती है तो कांग्रेस के दिग्गज टिकटार्थी नेताओं का और आगे बढ़ रहे युवा कार्यकर्ताओं का हौसला पस्त हो जाएगा।

 हालांकि पिछले चुनाव में कांग्रेस के पतन का मुख्य कारण  दुबारा चुनाव लड़ रहे  विधायक गंगाजल मील का कार्यकाल ही रहा जिसमें जमकर भ्रष्टाचार हुआ था और लोग नाखुश थे।  कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी खुश नहीं रखा गया। मील के नजदीकी लोगों ने एक घेरा बनाया और नाराज होते प्रमुख कार्यकर्ताओं को साथ में लाने की कोशिश ही नहीं की गई। मील के नजदीकी समझी जाने वाली प्रेस ने चश्मा चढाया जो मील ने उतारा नहीं। इस तरह से नाराज कांग्रेस के ही लोगों ने सहयोग नहीं किया जिसके कारण कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ सीट पर तीसरे क्रम पर रही। अनेक कांग्रेसियों ने कांग्रेस का साथ नहीं दिया और कांग्रेस की कब्र खोदने में लगे रहे व भारतीय जनता पार्टी को साथ दिया तथा उसके प्रत्याशी राजेंद्र भादू को मित्र बनाया और जिताया। 

अब आगे सूरतगढ सीट बसपा को समझौते में दी जाती है तो क्या संभावनाएं बन सकती हैं।  इसके लिए सन 2013 के चुनाव परिणाम पर नजर डालें।

भाजपा( राजेंद्र भादू) को 66,766 मत मिले थे। 

इंडियन नेशनल कांग्रेस ( गंगाजल मील) 34,173 मत और अमित कड़वासरा को मिले 18275 मतों को जोड़ कर देखा जाए तो 52,448 ही बनते हैं,जो भाजपा से14,318 मत कम ठहरते हैं। दोनों के मत जोड़ कर भी मुकाबले में नहीं पहुंचते। यह आंकड़े कांग्रेस की हालत को बहुत कमजोर साबित करते हैं।2013 के चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपनी हालत सुधारने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। राजनीतिक नजरिये से देखा जाए तो कांग्रेस के टिकट चाहने वालों में से किसी ने भी धरती पर कार्य नहीं किया। पार्टी संगठन ने भी खाली सा छोड़ दिया और आगे अधिक मत मिल जाए ऐसा कार्य नहीं किया। कांग्रेस ने कभी भूले भटके प्रदर्शन किया और ज्ञापन दिया तो संख्या 25-30 से अधिक नहीं हो पाई।नेता अकेला आया या दो तीन कार्यकर्ताओं को साथ लाया। कभी सुधारने की कोशिश ही नहीं की गई। कांग्रेस को रसातल में पहुंचा कर टिकट की मांग करना अचंभित लगता है।


इस कमजोर नाजुक हालत में मील और कड़वासरा को मिले मतों 52,448 में बसपा( डुंगर गेदर) के 39,987 मतों को

और जोड़ा जाए तो 92,435 बनते हैं।

यानि भाजपा को मिले मतों से 25,669 मत अधिक हो जाते हैं और हालात को मजबूत भाजपा को पछाड़ने वाली बनाते हैं। लेकिन इस हालत में बसपा से गठबंधन होता है। भाजपा को हराने के लिए इस हालत में बसपा के लिए सीट छोड़नी पड़ेगी। बसपा मानलो सीट जीत जाती है तब कांग्रेस के ये नेता और कार्यकर्ता आगे क्या करेंगे और इनकी पावर क्या रहेगी? कांग्रेस की राजनीति का खात्मा हो जाएगा। 

इन नेताओं और संगठन की ओर से बसपा से समझौते को रोकने के लिए अभी तक ऊपर कोई आवाज नहीं पहुंचाई गई है।


क्या कांग्रेस बसपा का गठबंधन राजस्थान में भाजपा को हरा पाएगा?


कांग्रेस के कई दिग्गजों में गठबंधन की सुगबुगाहट से बेचैनी


राजस्थान में कांग्रेस व बसपा के  गठबंधन की सुगबुगाहट पिछले कुछ महीनों से चलती हुई चुनाव के पास आने से तेज होने लगी है। कांग्रेस नेताओं में बेचैनी है। यह गठबंधन हुआ तो प्रदेश की लगभग 12 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कांग्रेस नेताओं पर असर पड़ सकता हैै और उनकी राजनीति आगे के लिए खतरे में भी जा सकती है।

इसमें कांग्रेस के 2 बड़े नेता भी शामिल हैं।

 

उत्तर प्रदेश में उप चुनाव में विपक्ष ने एकजुट होकर प्रत्याशी खड़े किए तो उसके नतीजे अच्छे आए थे।


अब कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव में ऐसा गठबंधन करने की तैयारी में लगा है। गौरतलब है कि वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा का मत प्रतिशत भले ही 4 फीसदी से कम रहा लेकिन उसके तीन प्रत्याशी जीते थे।

 इसके अलावा 7 सीटों पर कांग्रेस को पछाड़कर बसपा दूसरे नंबर पर रही थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन हुआ तो बसपा इन सीटों पर सबसे पहले अपना हक जताएगी। कुछ अन्य दलित प्रभाव वाली सीटों पर भी बसपा दावा कर सकती है। 


ऐसे में इन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कांग्रेस नेताओं के अरमान टूट सकते हैं। इनमें पूर्व मंत्री जितेन्द्र सिंह और दुर्रू मियां का नाम भी माना जा रहा है। खेतड़ी से बसपा के पूरणमल सैनी ने जितेन्द्र सिंह को 7500 से अधिक वोटों से हराया था। तिजारा से कांग्रेस के दुर्रू मियां चुनावी मुकाबले में 29172 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रहे थे। बसपा के फजल हुसैन 31284 वोट लेकर उनसे आगे रहे थे।

भरतपुर में कांग्रेस के महेन्द्र कुमार तिवारी को 14616 वोट मिले थे, जो कुल मत प्रतिशत का महज 9.89 था। उनसे आगे निर्दलीय गिरधारी तिवारी थे। भादरा में कांग्रेस के जयदीप 11680 वोटों के साथ चौथे स्थान पर थे। उनका मत प्रतिशत 6.36 था। खींवसर में कांग्रेस के राजेन्द्र को सिर्फ 9257 मत मिले, वह चौथे नंबर पर रहे। उनका मत प्रतिशत सिर्फ 5.9 फीसदी रहा।

 

2013 में यहां जीती थी बसपा


2013 के चुनाव में बसपा ने सार्दुलपुर, खेतड़ी और धौलपुर में विजय प्राप्त की थी। 

इसके अलावा भरतपुर नगर, तिजारा, नदबई, सूरतगढ, खींवसर और भादरा में बसपा ने दूसरा स्थान प्राप्त किया था।

सूरतगढ पालिका में भाजपा काल में विकास कार्य:पत्रकारों को दिखाएंगे


- करणीदानसिंह राजपूतः -

भाजपा के बोर्ड और अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा के कार्यकाल व राजेंद्रसिंह भादू के काल में नगरपालिका सूरतगढ़ क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की जानकारी 1 जुलाई को दी जाएगी।


पत्रकारों को भ्रमण कराकर मौके पर विकास कार्य दिखलाएं जाएंगे और उसके बाद होटल गोल्डन इन में पत्रकार वार्ता होगी। पत्रकारों को सुबह 10:00 बजे नगर पालिका पालिका नगर पालिका कार्यालय में आमंत्रित किया गया है।

नगर पालिका मैं भारतीय जनता पार्टी का बोर्ड है और अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा है जिनके नेतृत्व में विकास कार्यों का दावा लगातार किया जाता रहा है। 

विधायक राजेंद्र सिंह भादू द्वारा विकास कार्यों में अपने कोटे की रकम से भी बहुत सहयोग दिया गया है। 

यह संपूर्ण कार्य पत्रकारों के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। विदित रहे कि कि भारतीय जनता पार्टी को 2013 में भारी बहुमत मिला और राजस्थान में भाजपा की सरकार बनी। 

सूरतगढ़ से विधायक राजेंद्र सिंह भादू भाजपा टिकट पर चुने गए और उसके बाद नगर पालिका में में भारतीय जनता पार्टी का बोर्ड बना तथा पंचायत समिति में भारतीय जनता पार्टी की प्रधान चुनी गई।

विधायक राजेंद्र सिंह भादू की देखरेख में शहर और ग्रामीण क्षेत्र में हुए कार्यों का बखान अब जनता के सामने पत्रकारों के माध्यम से कराने की यह योजना दिखाई देती है। 

आगामी विधानसभा चुनाव को अब केवल 5 महीने का समय बाकी है और भारतीय जनता पार्टी फिर से विधानसभा के चुनाव में सूरतगढ़ सीट पर कब्जा करने के लिए प्रबल दावेदार है। भाजपा इसलिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों की रिपोर्ट जनता के सामने रखी जा रही है।

शुक्रवार, 29 जून 2018

सूरतगढ़:पत्रकार विजय स्वामी हृदय नली आप्रेशन के बाद स्वस्थ:विश्राम पर



सूरतगढ 29-6-2018.

टीवी पत्रकार विजय स्वामी हृदय रक्तवाहिनी के जयपुर में आप्रेशन के बाद  चिकित्सकीय सलाह पर विश्राम पर हैं। 

उनके हृदय की मुख्य रुधिर वाहिनी पिचककर मुड़ी और अवरुद्ध हो गई। कुछ परेशानी पर जांच में यह स्थिति मालूम हुई।

फोरटिस हास्पीटल जयपुर में डा.संजीव राय ने आप्रेशन किया। रुधिर वाहिनी में 2 रिंग डाले गए हैं। यह आप्रेशन 25 जून को हुआ। 


मदनलाल सैनी राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष


जयपुर 29-6-2018.

मदनलाल सैनी राजस्थान भाजपा के नए अध्यक्ष होंगे। 72 दिन बाद राजस्थान भाजपा को उसका चीफ मिला है। 

मदनलाल सैनी 1952 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक से जुड़े बाद में लगातार संघ के विभिन्न संगठनों में सक्रिय रहे। वे एबीवीपी के प्रदेश मंत्री भी रहे है। 1975 तक वकालत के पेशे से जुडऩे के बाद आपातकाल में जेल में भी रहे। संघ की ओर से सैनी ने भारतीय मजदूर संघ में प्रदेश महामंत्री व अखिल भारतीय कृषि मजदूर संघ के राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व निभाया। 1990 में झुंझुनूं के उदयपुरवाटी विधानसभा से विधायक रहे तथा 1991 व 1996 में लोकसभा में भाजपा के झुंझुनूं से प्रत्याशी रहे। भाजपा में प्रदेश महामंत्री व अनुशासन समिति के सदस्य भी रहे है। वर्तमान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के प्रदेश प्रभारी है।

सादगी का रहा हर कोई कायल 

सैनी संगठन के जमीन से जुड़े कार्यकर्ता रहे है। सादगी पर हर कोई चर्चा करता रहा है। सैनी जयपुर से सीकर आते समय अधिकतर राजस्थान रोडवेज में सफर करते है। कई बाद कार्यकर्ताओं के आग्रह पर भी अपने निजी वाहन की बजाय सैनी बस में ही सफर पसंद करते रहे है।

- सैनी के प्रदेश अध्यक्ष बनने से सीकर की राजनीतिक पकड़ मजबूत होगी। इसके साथ ही पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता व पदाधिकारियों को तवज्जो मिलेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि सैनी का आज भी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव बना हुआ है।


गुरुवार, 28 जून 2018

सूरतगढ कांग्रेस के पास सही ज्ञापन लिखने वाला भी नही:


 - करणीदानसिंह  राजपूत -

सूरतगढ़ 28 जून 2018.

कांग्रेस पार्टी के टिकटार्थियों पूर्व विधायक गंगाजल मील, पूर्व पंचायत समिति प्रधान परमजीत सिंह रंधावा और अमित कड़वासरा की ओर से हस्ताक्षर किया हुआ एक ज्ञापन आज 28 जून को उपखंड अधिकारी के मार्फत मुख्यमंत्री राजस्थान को भिजवाया गया।

 इस ज्ञापन में तारीखें सही नहीं है जिसके कारण पूरा मैटर ही गलत सिद्ध हो रहा है।

 ऐसा लगता है कि टिकटार्थी कांग्रेसियों ने हस्ताक्षर तो कर दिए लेकिन उस में लिखे हुए मैटर को पढ़ने की किसी को फुर्सत नहीं थी। मैटर लिखा गया उसको समझने जितना ध्यान तो होना ही चाहिए था। 

कांग्रेस जब जब सत्ता से बाहर रही है तब तब नेता संज्ञा सुन्न जैसी हालत में हो जाते हैं। ऐसी मुद्रा जिसमें किसी प्रकार का होश नहीं रह पाता।

गंगाजल मील 2013 में बुरी तरह से हारने और तीसरे क्रम पर पहुंचने के बाद पुनः 2018 में टिकट मांगने वालों की लाइन में है और गांवों में मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।  लेकिन सच्चाई यह है कि मील के प्रति लोगों की ओर से किसी प्रकार की रूचि ही प्रगट नहीं हो रही।

 कांग्रेस के पास अपनी सही विज्ञप्ति ज्ञापन आदि लिखने के लिए भी कोई राजनीतिक बुद्धिमान व्यक्ति नहीं है। आश्चर्य यह है की इस ज्ञापन अनेक कार्यकर्ताओं ने भी हस्ताक्षर किए लेकिन मैटर नहीं पढा। क्योंकि ज्ञापन देने का एक काम पूरा करना था। संख्या बल भी नहीं होने जैसा था। 

यह ज्ञापन 28 जून को दिया गया जिसमें लिखा गया कि 11 जून की भाखड़ा ब्यास प्रबंध मंडल की बैठक 15 जून को टाली गई और 15 जून को जो पानी छोड़ा गया वह 18 जून तक खेतों में पहुंच पाएगा इसकी संभावना तक नहीं।

अब समझने वाली बात यह है कि 18 जून के बाद 28 जून तक के समय में कांग्रेस यह नहीं देख पाई कि पानी खेतों में पहुंचा या नहीं पहुंचा? 

 आश्चर्यजनक यह भी है कि सत्ता से बाहर रहने की कारण आर्थिक हालात भी कमजोर हो जाते हैं  और कांग्रेस के पास पार्टी का अपना लेटर पैड भी नहीं। यह ज्ञापन ब्लॉक के अध्यक्ष परसराम भाटिया के लेटर पैड पर दिया गया और इसी के साथ दूसरा ज्ञापन सफेद कागज पर दिया गया।

कांग्रेस के कार्यक्रमों में कार्यकर्ता कम रहने का कारण भी चर्चा में रहता है। चर्चा यह रहती है की मील को ही प्रचारित करने की नीति के तहत अनेक लोगों को बुलाया नहीं जाता व कार्यक्रमों की सूचना तक नहीं दी जाती। भाजपा से सत्ता लेने के लिए तड़प रहे काग्रेसी नेता एक नहीं है। एक दूसरे को देखकर राजी नहीं। दस टिकटार्थी और दस दिशाएं। ऐसी हालत में कैसे जीत पाएगी कांग्रेस?


सिंचाई पानी की कमी: कांग्रेस का सूरतगढ में प्रदर्शन:सीएम को ज्ञापन



श्रीगंगानगर जिले में सिंचाई पानी की  मांग को लेकर आज 28 जून 2018 को कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया के नेतृत्व में उपखंड अधिकारी के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया।

 कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उपखंड कार्यालय के आगे नारेबाजी की और वर्तमान सरकार के शासन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पानी की कमी से श्रीगंगानगर जिला और इंदिरा गांधी नहर के अलावा भाखड़ा और गंग कैनाल के क्षेत्र में किसान पीड़ित हो रहे हैं। 

इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण के किसानों को जो पानी मिलना चाहिए था वह मिल नहीं पाया है।

राज्य सरकार और बीबीएमबी कि गत बैठक में पंजाब से पानी लेने में नाकाम रही। 

काश्तकार धरना प्रदर्शन कर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

भखड़ा,गंग कैनाल आईजीएनपी क्षेत्र के किसानों में राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश और बढा है। खरीफ की फसल बिजाई का अंतिम दौर चल रहा है लेकिन ऐसे समय में पानी की कमी से किसान परेशान है।

उप खंड अधिकारी को जीीी पेश करने वालों में परसराम भाटिया,पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व प्रधान परमजीतसिंह रंधावा,अमित कड़वासरा,पूर्व पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल, ओम साबनिया,ओम प्रकाश कालवा,सतनाम वर्मा,राय साहब मेहरड़ा,सलीम कुरैशी,रमेश छाबड़ा,आकाशदीप बंसल,किशन आसेरी,त्रिलोकचंद,इरफान भाटी,कमलेश मीणा, जयप्रकाश गहलोत,विनोद चौधरी आदि ने आज प्रदर्शन किया।


मंगलवार, 26 जून 2018

घनश्याम तिवाड़ी के अचानक इस्तीफे से भाजपा में आपातकाल

- करणीदानसिंह राजपूत -

घनश्याम तिवाड़ी के आपातकाल की बरसी से ठीक एक दिन पहले पार्टी छोड़ने के बाद प्रदेश की राजनीति में लाभ हानि के अनुमान शुरू हो गए हैं।


 तिवाड़ी का विरोध तो जयपुर से दिल्ली तक सब को मालूम था लेकिन निष्कासित होने का इंतजार किए बिना ही उनके पार्टी छोड़ देने की संभावना किसी को नहीं थी।

 वे छह बार विधायक और प्रदेश की भैरोंसिंह शेखावत व वसुधंरा राजे के नेतृत्व वाली सरकारों में दो बार विधायक रहे हैं।

घनश्याम तिवाड़ी का आखिरी नमस्कार इस्तीफे से हुआ है जो भाजपा के लिए एक बड़े झटके के तौर पर माना जा रहा है। 

हालांकि भाजपा नेता इसे तवज्जो नहीं दे रहे हैं और मामूली सी बात बताने मे लगे हुए हैं लेकिन यह फीकी हंसी जैसा है।

 केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रांतीय नेतृत्व की रस्साकस्सी के चलते तिवाड़ी के पार्टी छोड़ने से राजनीति जयपुर से गांवों तक गरमाई हुई साफ दिख रही है।

 

तिवाड़ी ने पार्टी छोड़ते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सीधे निशाने पर लिया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व व राजे के बीच नए प्रदेशाध्यक्ष को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है। लगभग दो महीने से प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली है और राज्य में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं।


चार साल से वसुंधरा का विरोध


राजे के खिलाफ तिवाड़ी का विरोध तो चार साल पहले शुरू हो गया था। 

 तिवाड़ी जब वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सर्वाधिक मतों से जीते मगर इसके बावजूद उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। क्या इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं थी?

इसके बाद से तिवाड़ी व राजे के बीच छत्तीस का आंकड़ा सदन से सड़क तक दिखा। इसके लिए उन्हें कारण बताओ नोटिस भी दिया गया, लेकिन पार्टी उन्हें निष्कासित करने से इसलिए भी कतराती रही। भाजपा डर रही थी कि तिवाड़ी खुद को शहीद बताते हुए सहानुभूति बटोर लेंगे।

इस बात की पुष्टि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी के उस बयान से भी होती है, जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी ने धैर्य रखा, तिवाड़ी ने स्वतः इस्तीफा दे दिया।

जातिगत गणित और चुनावी समीकरण

तिवाड़ी के पार्टी छोड़ने को गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया भी तवज्जो नहीं दे रहे और कह रहे हैं कि तिवाड़ी कौनसी बड़ी तुरूप हैं। उनके जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन प्रदेश के 9 विधानसभा सीटें ब्राह्मण बाहुल्य हैं। इसके अलावा 18 से ज्यादा सीटों पर वोटर संख्या के हिसाब से दूसरे या तीसरे नम्बर पर आने वाले ब्राह्मण मतदाता निर्णायक भूमिका अदा करते हैं।

 राजे के विरोध के साथ दीनदयाल वाहिनी के गठन अपने बेटे की नई पार्टी भारत वाहिनी के पंजीकरण से पहले तिवाड़ी ब्राह्मण संगठनों में भी सक्रिय रहे हैं। इस स्थिति में तिवाड़ी भले ही जातिगत मतों का फायदा न ले सकें, लेकिन भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी के चलते उन्होंने जिस तरह से भ्रष्टाचार, अघोषित आपातकाल व आंतरिक लोकतंत्र के सवाल उठाए हैं, उससे लगता है कि वे अपने नाम से सहानुभूति का लाभ लेने में सफल हो सकते हैं।

 

भाजपा नेता नहीं मानते नुकसान


भाजपा के नेता कहते हैं कि तिवाड़ी के जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि इनकमबेंसी में जो वोट कांग्रेस के खाते में जाने थे, वे वोट तिवाड़ी खींचेंगे तो पार्टी को तो फायदा ही होगा। लेकिन, तिवाड़ी की संघ से नजदीकी और राजे की संघ से दूरी का फैक्टर भी आज की स्थिति में अहम साबित हो सकता है।

यदि बात तिवाड़ी के जाने से सम्भावित तीसरे मोर्चे की की जाए तो जाट-ब्राह्मण गठजोड़ भी भाजपा पर भारी पड़ सकता है। प्रदेश में भले ही तीसरा मोर्चा कभी सफल नहीं रहा और कांग्रेस-भाजपा की ही पांच पांच साल में सरकार बनती रही है, लेकिन पिछले दो चुनावों में भाजपा से बगावत कर अलग अलग चुनाव लड़ने वाले देवीसिंह भाटी व किरोड़ीलाल मीणा को पार्टियों के मिले चार फीसदी से ज्यादा मत जातिगत मतों का प्रभाव बढ़ने का संकेत तो कर ही रहे हैं।

 इस बीच, इनकमबेंसी कम करने के चक्कर में भाजपा कई विधायकों के टिकट काटकर नए विधायकों को मैदान में उतारेगी। इससे होने वाली अन्तरकलह भी भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।


कहीं दिल्ली का इशारा तो नहीं


तिवाड़ी के इस्तीफे को कई लोग नए प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर भाजपा आलाकमान की राजे से रस्साकस्सी से जोड़कर भी देख रहे हैं। तिवाड़ी के इस्तीफे के बाद केंद्रीय नेतृत्व को राजे पर दबाव बनाने का मौका मिल सकता है। कुछ लोग केंद्र में सक्रिय राजे विरोधी तिवाड़ी के पुराने मित्रों की भूमिका भी इस प्रकरण में मान रहे हैं कि उनकी सलाह पर ही निष्कासन का इंतजार कर रहे तिवाड़ी ने अचानक पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है, ताकि राजे पर प्रदेशाध्यक्ष मुद्दे पर दबाव की राजनीति की जा सके। लेकिन यह अनुमान सही नहीं लग रहा क्योंकि न ई पार्टी भारत वाहिनी के आने के बाद फिर इंतजार संभव नहीं था। इस पार्टी को भी चुनाव से पहले चार पांच माह का समय तो चाहिए था।

 

इसलिए माने जाते हैं सियासी 'दिग्गज' 


- 7वीं, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 13वीं तथा 14वीं विधानसभा के सदस्य रहे हैं तिवाड़ी

- तिवाड़ी 1980 से 1989 तक सीकर से तीन बार चुने गए थे विधायक

- शेखावत सरकार में ऊर्जा मंत्री बने

- तिवाड़ी राजे सरकार में भी 2003 से 2008 तक रहे काबिना मंत्री

- पिछले विस चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों से सांगानेर से जीते थे तिवाड़ी


सूरतगढ में आपातकाल काला दिवस मनाया गया


सूरतगढ़ 26 जून।

आपातकाल 1975 के काला अध्याय को लागू की गई तारीख 26 जून को यहां काले दिवस के रूप में मनाया गया। लोकतंत्र रक्षा सेनानी संघ राजस्थान के संयोजक करणीदानसिंह राजपूत के आह्वान पर शहीद गुरूशरण छाबड़ा के स्मारक पर आपातकाल में जेलों में बंद रहे सेनानी व लोकतंत्र समर्थक एकत्रित हुए।आपातकाल काल का विरोध गुरूशरण छाबड़ा के नेतृत्व में हुआ था इसलिए उनक

ो याद किया गया।छाबड़ा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।

करणीदानसिंह राजपूत ने छाबड़ा का और आपातकाल का बयौरा दिया। खुद करणीदानसिंह राजपूत जेल में डाल दिए गए थे।उनके अखबार को सेंसर किया और बाद में बंद करवा दिया गया।

इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी महावीर तिवाड़ी,डा.टी.एल.अरोड़ा,मुरलीधर उपाध्याय ने उस काल के अत्याचारों को बताया। 

कार्यक्रम में जेलों में बंद रहे सुगनपुरी,हनुमानमोट्यार,गुरनामसिंह,

सहयोगी रहे श्याम मोदी,एडवोकेट एन.डी.सेतिया ने भाग लिया। 

पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कासनिया, पूर्व विधायक अशोक नागपाल,नागरिक समिति के सचिव राजेंद्र मुद्गल,सीटू नेता मदन ओझा, नारी उत्धान केंद्र की अध्यक्ष श्रीमती राजेश सिडाना,भाजपा नगर मंडल के अध्यक्ष महेश सेखसरिया,भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष रजनी मोदी,मुरलीधर पारीक, बाबूसिंह खीची,महावीर चीनिया, नगरपालिका उपाध्यक्ष पवन ओझा, घनश्याम शर्मा,राजस्थानी साहित्यकार मनोजकुमार स्वामी,गोविंद भार्गव आदि ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर देश में लोकतंत्र को कायम रखने का संकल्प लिया गया।

इसके बाद अतिरिक्त जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिये गए। 

ज्ञापन में लिखा गया है कि आपातकाल 1975 को देश की स्वतंत्रता में काला अध्याय माना गया है जिसके

बारे में आपको सर्वविदित है कि किस प्रकार से नेताओं व कार्यकर्ताओं को

जेलों में बंद किया गया व किस प्रकार से कष्ट उठाते हुए कार्यकर्ताओं ने

सबकुछ न्यौछावर करते हुए जान की परवाह नहीं करते हुए विरोध करके खत्म भी करवाया।

आपातकाल के विरोध में भारतीय

दंड प्रक्रिया संहिता की धाराओं 107/151/116-3 व मीसा रासुका की विभिन्न धाराओं में जेलों में ठूंसा गया। यहां तक की नाबालिगों को भी जेलों में

ठूंस दिया गया था। सालों के बाद जब राष्ट्रवादियों की सरकारें प्रदेशों में आई तब आपातकाल के बंदियों को कुछ राज्यों में पेंशन सुविधा प्रदान की गई लेकिन समस्त प्रकार के राजनैतिक बंदियों को पेंशन नहीं दी गई। केवल मीसा रासुका बंदियों को कुछ राज्यों में ही सुविधा पेंशन दी जाने लगी और आंदोलन करने वाले सैंकड़ों राजनैतिक कार्यकर्ता वंचित रह गए। जहां पर राष्ट्रवादियों की सरकारें नहीं हैं उन राज्यों में कुछ भी नहीं मिल रहा है। जहां पर कांग्रेस की सरकारें हैं वहां पर भी कुछ नहीं मिल रहा।ऐसी स्थिति में आपसे ही आग्रह है कि -

1.समस्त भारत में एक रूपता से सभी प्रकार के आपातकाल के राजनैतिक बंदियों

को चाहे वे किसी भी कानून की किसी भी धारा में हो उन्हें स्वतंत्रता

सेनानियों के समकक्ष मानते हुए पेंशन व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाए।

2. जिन राजनैतिक बंदियों का जेल का व अन्य रिकार्ड गुम हो गया व जेलों

में व सरकारी कार्यालयों में खत्म हो गया है। उनके लिए जेल में बंद रहे

अन्य कार्यकर्ता का शपथ पत्र लेकर सुविधाएं प्रदान करवाई जाएं।

3. जो आपातकाल बंदी दिवंगत हो चुके हैं,उनकी वीरांगनाओं को स्वतंत्रता

सेनानी वीरांगनाओं की तरह ही पेंशन व सुविधाएं प्रदान करवाई जाएं।

4. रेल यात्रा व प्रदेशों की रोडवेज में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाए

जिसमें किलो मीटर निर्धारित कर दिए जाएं। अधिकांश सेनानी 60-70 से 80-85

वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं इसलिए एक सह यात्री की भी निशुल्क

यात्रा  सुविधा प्रदान की जाए।

5. अनेक लोकतंत्र रक्षा सेनानियों के परिवारों के पास स्वयं का आवास नहीं

है इसलिए स्थानीय संस्थाओं नगरपालिका,नगरपरिषद व ग्राम पंचायत क्षेत्र

में निशुल्क भवन या निशुल्क भूखंड प्रदान किया जावे।

6. लोकतंत्र सेनानियों को राजकीय विश्राम गृहों /सर्किट हाऊस आदि में

राजकीय स्तर पर  ठहरने की सुविधा दी जाए।

7. राष्ट्रीय दिवस समारोह स्वतंत्रता दिवस गणतंत्र दिवस समारोह व अन्य

मंत्री आदि के समारोह में जिला स्तर पर या जिस स्थान पर निवास है वहां

उपखंड/तहसील में आमंत्रित किया जाए।

8.अंतिम संस्कार में राजकीय सम्मान से समस्त प्रक्रिया हो।

9. जो आपातकाल रक्षा लोकतंत्र सेनानी पति पत्नी दोनों ही दिवंगत हो चुके

हैं उनके परिवारजनों ने आपातकाल में कष्ट तो सहन किया ही था इसलिए वारिस

परिजनों पुत्रों आदि को एकमुस्त 10 लाख रूपए तक की सम्मान निधि प्रदान की

जाए।

       आपातकाल में अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करनेे की कोई कीमत नहीं

होती और न कार्यकर्ता कीमत प्राप्त करने के लिए ही आंदोलन करता है। लेकिन

कार्यकर्ताओं का सम्मान करना कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय विकास की धारा

में बराबर का स्थान प्राप्त हो सके इसके लिए पेंशन निधि आदि की सुविधा

प्रदान कराना राष्ट्रीय विचारधारा की सरकारों का परम कर्तव्य है। वर्तमान

में यह दायित्व निभाने का कर्तव्य आपका है।

हम आशा करते हैं कि आपके नेतृत्व में सभी को समान रूप से लोकतंत्रसेनानी

का सम्मान और स्वतंत्रता सेनानी के समकक्ष का दर्जा प्रदान किया जाए।

लोकतंत्र सेनानियों की उम्र  60 साल से लेकर 90-95 साल की हो चुकी

है,अनेक दिवंगत हो गये जिनकी पत्नियां बहुत कष्ट व परेशानियों में है,

उसको भी ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय प्रदान करें।



******

संयोजक, 

करणीदानसिंह राजपूत,

आपातकाल लोकतंत्र रक्षा सेनानी संघ,

सूरतगढ़

9414381356.



सोमवार, 25 जून 2018

भाजपा से वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी का इस्तीफा: भारत वाहिनी से चुनाव लड़ेंगें



जयपुर 25-6-2018.भाजपा में सीएम वसुंधरा से नाराज चल रहे सांगानेर विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने आखिरकार भाजपा से अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेज दिया है। तिवाड़ी अपने वर्तमान विधानसभा क्षेत्र सांगानेर से न ई पार्टी भारत वाहिनी से चुनाव लड़ेंगे।आज पिंकसिटी प्रेस क्लब में पत्रकारों के समक्ष ये बताया। भाजपा को चुनाव से पहले यह तगड़ा झटका लगा है,क्योंकि उन्होंने यह दावा भी किया है कि भाजपा के 15 विधायक उनके संपर्क में है और उनको भारत वाहिनी की टिकट पर लड़ाया जा सकता है।

भैरोंसिंह शेखावत सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे तिवाड़ी ने अपना सालों पुराना नाता पार्टी से तोड़ लिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वालेतिवाड़ी कई अहम पदों पर रह चुके हैं। वे राजस्थान की 7वीं, 8वीं, 10वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं विधानसभा के मेंबर रहे हैं। तिवाड़ी 1980 से 1985 तक पहली बार सीकर से विधायक बने। जिसके बाद 1985 से 1989 तक पुन: विधानसभा क्षेत्र सीकर से विधायक रहे। 1993 से 1998 तक विधानसभा क्षेत्र चौमूं से विधायक बने। फिलहाल 2003 से वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र सांगानेर से ही विधायक है।

हाल ही तिवाड़ी की ‘भारत वाहिनी पार्टी‘ को केंद्रीय निर्वाचन आयोग से हरी झंडी मिल चुकी है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने ‘भारत वाहिनी पार्टी‘ का बुधवार को विधिवत रूप से पंजीयन कर दिया। घनश्याम तिवाड़ी की इस नई पार्टी के पंजीयन व चुनाव लड़ने से राजस्थान में न ई राजनीतिक छवि उभरने की संभावनाएं है। घनश्याम तिवाड़ी के बेटे अखिलेश तिवाड़ी भारत वाहिनी पार्टी के अध्यक्ष व संस्थापक हैं।

अमित शाह को पत्र

जानकारी के अनुसार सांगानेर विधायक तिवाड़ी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को इस्तीफा भेजते हुए एक पत्र भी लिखा है, जिसमें उन्होंने कई आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि वे अगला चुनाव भारत वाहिनी पार्टी के चुनाव चिह्न पर सांगानेर विधानसभा से लड़ेंगे। उन्होंने लिखा कि अब स्पष्ट हो चुका है राजस्थान के भ्रष्टाचार में पहले केंद्र ने सांठगांठ की और अब केंद्र ने राजस्थान के आगे अपने घुटने टेक दिए हैं। इस्तीफा देने के बाद तिवाड़ी ने दावा किया है कि उनके संपर्क में भाजपा के 15 विधायक हैं। तिवाड़ी के भाजपा से इस्तीफा देने के बाद से प्रदेश में अब राजनीतिक हलचलें और तेज हो गई हैं।

मौजूदा सरकार ने राजस्थान को किया तबाह

तिवाड़ी ने कहा कि राजस्थान भाजपा एक व्यक्ति की निजी दुकान बन कर रह गई है। मौजूदा सरकार ने राजस्थान को तबाह कर दिया। राजस्थान में भाजपा और वसुंधरा में कोई फर्क नहीं रह गया है। अब वसुंधरा राजे का नेतृत्व हो या नहीं हो, वापस पार्टी में नहीं आऊंगा। तिवाड़ी ने कहा कि उनके मन में पार्टी छोडऩे की पीड़ा है, लेकिन उनके पास अब और कोई रास्ता नहीं बचा है।

सीएम वसुंधरा के खिलाफ खुलकर विरोध

तिवाड़ी की भाजपा से नाराजगी इतनी बढ़ गई थी कि वे सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ खुलकर विरोध करने लगे थे। साथ ही संगठन के प्रति अपनी नाराजगी को समय-समय पर जाहिर करने लगे थे।

6 मई 2017 को मिला था कारण बताओ नोटिस

सीएम के खिलाफ लगातार बयानाबाजी को लेकर भाजपा केन्द्रीय अनुशासन समिति ने घनश्याम तिवाड़ी को 6 मई 2017 को कारण बताओ नोटिस देकर कर जवाब मांगा था। तिवाड़ी ने इसका जवाब भी दे दिया था। लेकिन इसके बाद भी तिवाड़ी की सीएम के खिलाफ बयानबाजी नहीं रूकी।


रविवार, 24 जून 2018

आपातकाल 1975 विरोध दिवस पर सूरतगढ मेंं कार्यक्रम होगा

आपातकाल 1975 के काला अध्याय के विरोध के दिवस 26 जून पर यहां लोकतंत्र रक्षा सेनानी संघ की ओर से यादगार दिवस मनाया जाएगा और देश में लोकतंत्र को कायम रखने का संकल्प लिया जाएगा।

लोकतंत्र रक्षा सेनानी संघ व अन्य सहयोगी संगठन 26-6-2018 को सुबह 9 बजे शहीद गुरूशरण छाबड़ा के स्मारक ( राजकीय चिकित्सालय के पास) पर एकत्रित होंगे। गुरूशरण छाबड़ा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा। गुरूशरण छाबड़ा के नेतृत्व में यहां आपातकाल के विरोध में राजस्थान में एकमात्र सूरतगढ़ में  26-6-1975 को आमसभा की गई थी। गुरूशरण छाबड़ा ने श्रीगंगानगर जेल में स्वतंत्रता दिवस पर 15-8-1975 को आमरण अनशन शुरू किया था जिस पर सरकार ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को राजनीतिक दर्जा दिया।

आपातकाल में सूरतगढ़ से रासुका व सीआरपीसी में बंदी रहे,विरोध में प्रदर्शन कर गिरफ्तारियां देने वाले सेनानी और सेनानियों की सहायता करने वाले लोग भी मौजूद होंगे। यहां पर विचार भी रखे जाएंगे। 

इसके बाद प्रशासन को प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया जाएगा जिसमें लोकतंत्र रक्षा सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष दर्जा दिए जाने की मांग होगी।

संयोजक, 

करणीदानसिंह राजपूत,

आपातकाल लोकतंत्र रक्षा सेनानी संघ,

सूरतगढ़

9414381356.



देश में ज्वालामुखी फूटेगा: कविता- करणीदानसिंह राजपूत



मेरा देश बोलता नहीं

मेरा देश देखता नहीं 

मेरा देश सुनता नहीं

अजब है मेरा देश

घटनाओं पर घटनाएं

कुछ भी हो जाए

क्या मेरे देश के आँखें नहीं

क्या मेरे देश के कान नहीं

क्या मेरे देश के मुंह नहीं।


अरे। इसका विशाल रूप

ताकत का स्वरूप

कंकाल कैसे हो गया?

सुनते रहे पुरानी कहानियों में

कंकाल भी बोल उठते थे।

क्या मेरे देश में बदलाव आएगा?


क्या कभी वह दिन आएगा

जब मेरा देश देखेगा

जब मेरा देश सुनेगा

जब मेरा देश बोलेगा

मेरे देश के दिल में 

मेरे देश के दिमाग में

हलचल मचेगी और

ज्वालामुखी फूटेगा

भ्रष्टाचार के विरूद्व

तानाशाही के विरूद्ध

हर गली हर मोड़ से

क्रांतिकारियों के चौक से

तूफान उठेगा।

ठहर नहीं पाएंगे

भाग जाएंगे

सफेदपोश भ्रष्टाचारी दुराचारी 

क्या ऐसा दिन आएगा?

हां,आएगा ऐसा भी दिन

जब चप्पे चप्पे से

भारत मां का जयघोष

और अधिक जोर से गूंजेगा।

जब क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं

स्मारकों से निकल कर

संसद में बैठेंगी

सीमा पर सैनिक बन

दुश्मन को मार भगाएंगी

आएगा जल्दी वह दिन

जब हम और तुम 

एक दिल एक जान

एक सोच से 

मशाल उठा कर

शक्तिशाली बन जाएंगे

भारत बन जाएंगे।

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करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़।

गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया सड़क दुर्घटना में घायल:नाक व आंख पर चोट

जयपुर. गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की कार शनिवार 23-6-2018 की  रात में  शिवदासपुरा इलाके में टोल प्लाजा के पास आगे चल रहे एस्कॉर्ट वाहन से टकरा गई. गृहमंत्री की नाक आैर आंख पर चोट आई. उन्हें निजी अस्पताल में पहुंचाया गया. गृहमंत्री शाम को कोटा में सुंदर सिंह भंडारी ट्रस्ट के समारोह और व्याख्यानमाला की समाप्ति के बाद सड़क मार्ग से जयपुर के लिए रवाना हुए थे. शिवदासपुरा इलाके में टोल के पास स्पीड ब्रेकर देख उनकी गाड़ी के आगे चल रही एस्कॉर्ट के ड्राइवर ने अचानक ब्रेक लगाए. इस पर कटारिया की गाड़ी चला रहे ड्राइवर रशीद ने भी गाड़ी की स्पीड कंट्रोल करने ब्रेक लगाए, मगर गाड़ी एस्कॉर्ट से जा भिड़ी.

राजस्थान में भाजपा के विरुद्ध नईपार्टी भारत वाहिनी सभी सीटों पर लड़ेगी चुनाव


^ वसुंधरा राजे के घमंड को चूर करने को बनी है भारतवाहिनी^

- सभी 200 सीटों पर लड़ेगी चुनाव -

* करणीदानसिंह राजपूत *

भारत वाहिनी की पिंक सिटी प्रेस क्लब में 25 जून को सुबह 11:30 बजे प्रेस कांफ्रेंस होगी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्वमंत्री वर्तमान विधायक घनश्याम तिवाड़ी पत्रकारों से बात करेंगे।

सभी जानते हैं कि वसुंधरा राजे ने अपने को ऐसी स्थिति में ढाल लिया है कि विधायकों की क्या मंत्रियों तक की पावर नजर नहीं आ रही है। सभी वसुंधरा के आगे कुछ भी कहने से डरते हैं। अब तो भाजपा संगठन भी वसुंधरा के आगे लाचार है। भाजपा के मनोनीत  प्रदेशाध्यक्ष को स्वीकार नहीं करके राष्ट्रीय नेतृत्व को भी चुनौती दे दी गई।

घनश्याम तिवाड़ी ने राष्ट्रीय नेतृत्व को बहुत बार चेताया भी मगर कार्रवाई नहीं होने से वसुंधरा की निरंकुशता बढती गई।

घनश्याम तिवाड़ी की वसुंधरा राजे से बिल्कुल ही नहीं बनती।तिवाड़ी ने ही यह नई पार्टी भारतवाहिनी का गठन करवाया है और चुनाव आयोग से भी कानूनी रूप से पंजीकरण भी करवाया है। यह पार्टी राजस्थान के आगामी चुनाव 2018 में विधानसभा की समस्त 200 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करने की घोषणा कर चुकी है। 

घनश्याम तिवाड़ी इस पत्रकार वार्ता में भाग लेंगे तो उनका भाजपा से इस्तीफा देने की घोषणा भी संभव हो सकती है।

नयी पार्टी खुद कितनी सीटें जीत पाएगी? लेकिन भाजपा को भारी नुकसान पहचा सकती है जो कि बिगाड़ना आसान होता है कि तर्ज पर होगा।

नाम की व्यापकता से अनुमान लगाया जा सकता है कि यह अन्य राज्यों में भी काम कर सकेगी।


शुक्रवार, 22 जून 2018

निरंकारी बाबा हरदेव की बेटी द्वारा पति पर मुकदमा:हजारों करोड़ की ठगी का आरोप




नई दिल्ली 22-6-2018.

दो साल पहले कनाडा में सड़क हादसे में जान गंवाने वाले निरंकारी मिशन के बाबा हरदेव सिंह की बड़ी बेटी समता ने अपने ही पति संदीप खिंड़ा पर 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का आरोप लगाया है।


समता का कहना है कि उसके डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया गया। इस फर्जीवाड़े के बाबत समता ने दिल्ली के वसंत कुंज पुलिस स्टेशन में एफआइआर दर्ज कराई है। हरदेव सिंह की 13 मई 2016 को कनाड़ा में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। यह इत्तेफाक ही है कि उस वक्त संदीप उनके साथ कार में ही था। जानकारी के मुताबिक, संदीप खिंड़ा बाबा हरदेव सिंह का बड़ा दामाद है, बावजूद इसके निरंकारी मिशन की एग्जीक्यूटिव बॉडी में संदीप खिंड़ा का कोई स्थान नहीं है।


 समता की पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, उन्होंने अपने पति संदीप खिंड़ा और वरुण और सूरज पर इतनी बड़ी रकम की ठगी करने का आरोप लगाया है। समता का कहना है कि इसके लिए पति संदीप ने डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया। समता ने बताया कि उन्होंने डिजिटल सिग्नेचर के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था और हैरानी की बात है कि कंपनी ने उनके डिजिटल सिग्नेचर बना दिए। 


पुलिस को दी गई शिकायत के बाद दर्ज एफआइआर में संदीप, उसके पिता बलदेव सिंह, जालंधर के कुलविंदर सिंह, दिल्ली के रहने वाले कंपनी सेक्रेटरी अनुज गुप्ता, गुड़गांव निवासी कंपनी सेक्रेटरी रासू शर्मा, सिफी टेक्नोलॉजी लिमिटेड के चेयरमैन, कंपनी के कर्मचारी आलोक सक्सेना और हिमांशु कपूर का नाम है।

समता का आरोप क्या है?


पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, पति संदीप ने जैन फ्लोरीकल्चर लिमिटेड (जेएफएल) नाम की एक कंपनी खरीदी थी, इसमें मुझसे करोड़ों रुपये निवेश भी करवाए। समता का आरोप है कि कंपनी में 100 फीसदी शेयर मेरे थे। बावजूद इसके संदीप ने उनके फर्जी डिजिटल सिग्नेचर से इन्हें अपने नाम करवा लिया। वहीं, समता ने डिजिटल सिग्नेचर वेरीफाई करने वाली कंपनी सिफी टेक्नोलॉजी पर भी मामला दर्ज कराया है। 

13 मई, 2016 को संत निरंकारी मंडल के प्रमुख बाबा हरदेव सिंह की अमेरिका के न्यूयार्क से कनाडा के मॉन्टि्रयल शहर जाने के दौरान सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। बाबा अपने दोनों दामाद संदीप खिंड़ा व अवनीत सेतिया के अलावा विवेक शर्मा के साथ कार से एक भक्त से मिलने जा रहे थे। मॉन्टि्रयल से करीब 40 किमी पहले टायर फटने से उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और अस्पताल में इलाज के दौरान निरंकारी बाबा का निधन हो गया। 


सविंदर कौर से की थी शादी

बाबा हरदेव सिंह का जन्म 23 फरवरी, 1954 को दिल्ली में हुआ था। 1980 में पिता की मौत के बाद उन्हें निरंकारी मंडल का मुखिया बनाया गया था। इसके पूर्व वह 1971 में निरंकारी सेवा दल में शामिल हुए थे। 1975 में उन्होंने फर्रुखाबाद की सविंदर कौर से शादी की थी।


1929 में निरंकारी मिशन की हुई स्थापना

संत निरंकारी मिशन की 1929 में स्थापना हुई थी। इस मिशन की 27 देशों में 100 शाखाएं चल रही हैं। भारत में भी तकरीबन हर राज्य में लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हैं। बाबा हरदेव सिंह को विश्व में मानवता की शांति के लिए कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके थे। उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ भी सम्मानित कर चुका है। निरंकारी मंडल की ओर से बुराड़ी स्थित मैदान में हर साल नवंबर में वार्षिक समागम का आयोजन किया जाता है। इसमें भारत समेत दुनिया भर के लाखों भक्त भाग लेते हैं।


गुरुवार, 21 जून 2018

जम्मूकश्मीर में एन एस जी के ब्लैक कैट कमांडो नियुक्त


आतंकवाद विरोधी बल एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को जम्मू कश्मीर में तैनात किया गया है। जहां वे मुठभेड़ और लोगों को बंधक बनाने जैसी स्थितियों से निपटने में सुरक्षाबलों की मदद करेंगे। यहां तैनाती के बाद एनएसजी को भी लाइव मुठभेड़ों से निपटने का अनुभव होगा।

जम्मू-कश्मीर में पहले से ही तैनात सुरक्षा एजेंसियों को लेकर सेना नहीं चाहती थी कि एनएसजी भी यहां आए। लंबे विचार विमर्श के बाद बीते महीने गृह मंत्रालय ने एनएसजी की तैनाती पर मुहर लगाया था। एनएसजी बीएसएफ के साथ मिलकर हुमहमा कैंप पर ट्रेनिंग कर रही है।   

गृह मंत्रालय कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय सुरक्षा बल (एनएसजी) को इसलिए तैनात किया है ताकि उच्च जोखिम वाली, आतंकवाद से संबंधित घटना होने पर वे भारतीय सेना, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के साथ मिल कर काम कर सकें। 


यह पहली बार नहीं है जब ब्लैक कैट  के नाम से पहचाने जाने वाले एनएसजी कमांडो जम्मू कश्मीर में तैनात किये जाएंगे। इस बल के कमांडो पूर्व में भी घाटी में तैनात हो चुके हैं। 

अधिकारी ने बताया कि आतंकियों को पकड़ने के लिए की जाने वाली घेराबंदी के दौरान बंधकों को रिहा करने का उनका विशेष कौशल ऐसे हालात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2017 सुरक्षाबल के 82 लोग मारे गए थे और इस साल अब तक करीब 34 लोग मारे गए हैं। वहीं, आम लोगों की बात करें तो 2017 में 68 लोग मारे गए थे और इस साल अभी तक 38 लोग मारे गए हैं।

हाल ही में तेलंगाना में एनएसजी के एक समारोह के दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि देश के समक्ष नयी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुये सरकार विचार कर रही है कि बल की भूमिका को कैसे बढ़ाया जा सकता है क्योंकि आतंकियों द्वारा लोगों को मानव ढाल बनाने और नागरिक परिसर में घुस आने वाली जैसी  स्थिति में अभियानों के दौरान ये कमांडो एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद वर्ष 1984 में एनएसजी का गठन किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान पंजाब के अमृतसर शहर में स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकवादियों का सफाया किया गया था। 

एनएसजी में करीब 7,500 जवान

ब्लैक कैट कमांडो को मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमलों से जनवरी 2016 में पठानकोट वायु सेना शिविर पर हुए आतंकी हमले से और गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में हुए आतंकी हमले से निपटने के लिए तैनात किया गया था। 

संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार जम्मू कश्मीर में इस साल जनवरी से मार्च के मध्य तक आतंकी हिंसा की करीब 60 घटनाएं हुईं जिनमें 15 सुरक्षा कर्मी और 17 आतंकी मारे गए।

( दैनिक हिन्दुस्तान)

बसपा की सत्ता प्राप्त करो बाइक रैली व जैतसर सभा



* कांग्रेस, भाजपा की बंदरबांट को जनता अब समझ चुकी हैं - डूंगरराम गेदर*

 - करणीदानसिंह राजपूत -

 सूरतगढ़ -21जून 2018.

 बहुजन समाज पार्टी के तत्वाधान में प्रदेश स्तरीय सत्ता प्राप्त करो संकल्प बाइक रैली" जिला परिषद सदस्य श्री डूंगरराम गेदर के नेतृत्व में गांव 7 LC से प्रातः 8:30 बजे रवाना होकर मघेवाली ढाणी, किकर वाली जोहड़ी, मानेवाला, सादकवाला, 3 चक ,8चक ,7 SGM, 9 SGM, सरदारगढ़ ,हिंदो, सरूपसर ,से होकर शाम को धानक मोहल्ला जैतसर में पहुंचकर जनसभा की गई । इससे पूर्व रैली के दौरान गांव में नुक्कड़ सभाओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डूंगरराम गेदर ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की बंदरबांट को लोग अब समझने लगे हैं , तथा लगातार जन आंदोलनों से किसान, मजदूरों में जागृति आई है ,गेदर ने  प्रदेश व केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसान, मजदूर, बेरोजगारों और व्यापारियों का दमन करने वाली सरकार हैं । इनकी नीतियां किसान हितेषी न होकर, पूंजीपतियों के पक्ष में है ,उन्होंने कहा कि प्रदेश में कर्ज माफी और सिंचाई पानी के लिए किसानों द्वारा किए गए आंदोलनो के आगे सरकार को झुकना पड़ा है ,लेकिन अभी भी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने, आवारा पशुओं के लिए नंदी गौशाला सहित सिंचाई पानी व बिजली के भारी भरकम बिलों की समस्या से निपटने के लिए सरकार के पास कोई नीति नहीं है। बसपा के वरिष्ठ नेता रामजीवन मेघवाल ने कहा कि लोग बसपा को आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं ,आगरा से पहुंचे राजेंद्र बोगिया ने कहा कि SC, ST का बैकलॉग भरने ,दलितों पर जुल्म ज्यादतिया और महिला अत्याचार रोकने में प्रदेश सरकार विफल रही है,  पूर्व प्रदेश सचिव श्रवण सिंगाठिया व मंगल घारू ने ग्रामीणों को इस बार बसपा का साथ देने के लिए हाथ उठाकर संकल्प दिलवाया। बसपा के अमित कल्याणा ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं । कार्यक्रम में बसपा जिला महासचिव कालूराम कड़ेला ,नगर अध्यक्ष पवन सोनी,जेठाराम धानका ,महावीर मेघवाल, एडवोकेट लोकेश गहरवार, राकेश शीला, हंसराज भाट ,इंद्राज कालवा, राजा राम बेनीवाल ,भागीरथ नायक ने भी संबोधित किया!  रैली के दौरान ग्राम वासियों ने जगह-जगह बसपा नेता डूंगरराम गेदर का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम समापन पर पंचायत समिति सदस्य आदराम मेघवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया ।


बुधवार, 20 जून 2018

रेलवे में ग्रुप सी कर्मचारियों को अफसर बनाने की प्रक्रिया शुरू: करीब 3 लाख का प्रमोशन होगा

 नईदिल्ली 20-6-2018.

रेलवे ने ग्रुप-सी के पदों पर काम कर रहे लाखों कर्मचारियों को अफसर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों को प्रोन्नति कर ग्रुप-बी अधिकारियों का दर्जा देने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।


एक माह बाद समिति की सिफारिशें लागू होने पर सालों से ग्रुप -सी के पदों पर कार्यरत कर्मचारी अधिकारी बन जाएंगे।


सूत्रों ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिश में 4600 रुपये ग्रेड पे कर्मचारियों को ग्रुप सी से प्रोन्नत कर ग्रुप-बी का दर्जा देने की बात कही गई। 

कई राज्य सरकारों से 4200 रुपये ग्रेड पे को ग्रुप-बी का दर्जा मिल चुका है। कर्मचारियों के दबाव के बाद रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों को अफसर बनाने के लिए 12 जून को उच्च स्तरीय अधिकारियों की समिति का गठन कर दिया है।


अगले माह यह समिति अपनी सिफारिशें सौंप देगी। इसके बाद सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, टेलीकॉम आदि कैडर के ग्रुप-सी के कर्मचारियों को ग्रुप -बी का दर्जा दिया जाएगा। 


रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समिति की सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों को फायदा होगा। तकनीकी स्टाफ लगभग नौ हजार है और गैर तकनीकी सटाफ लगभग चार लाख से ऊपर है।


इस तरह से ढाई से तीन लाख लोगों को इसका लाभ मिल सकता है। अधिकारी ने बताया कि ग्रुप -सी के कर्मचारियों को ग्रेड पे के अनुसार ग्रुप-बी राजपत्रित (गजेटेड) व ग्रुप-बी गैर राजपत्रित (नॉन गजेटेड) का दर्जा दिया जा सकता है। 


इन्हें मिलेगा प्रमोशन


 अगले माह यह समिति अपनी सिफारिशें सौंप देगी। इसके बाद सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, टेलीकॉम आदि कैडर के ग्रुप-सी कर्मचारियों को ग्रुप-बी का दर्जा दिया जाएगा। 


इन्हें होगा फायदा


ग्रुप-बी अफसर बनने के बाद कर्मियों का ग्रेड पे 4800 रुपये हो जाएगा। रेलवे के विशेष पास, अफसर क्लब आदि की सुविधा के अलावा क्लास वन अफसरों के बंगले मिलेंगे। रेलवे की ओर से चपरासी,वाहन आदि मिलेंगे।

जम्मूकश्मीर में राज्यपाल शासन लागू


नई दिल्ली20-6-2018.

 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से मंजूरी मिलने के बाद जम्मू – कश्मीर में बुधवार को तत्काल प्रभाव से राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया है.

 बेहद आश्चर्यजनक तरीके से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार 19-6-2018  को खुद को प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार से अलग कर लिया था. इसके बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस्तीफा दे दिया.


भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस लेते हुए कहा था कि राज्य में बढ़ती कट्टरता और आतंकवाद के बीच सरकार में बने रहना असंभव हो गया है.


मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद राज्यपाल एनएन वोहरा ने राष्ट्रपति को भेजे गए एक पत्र में राज्य में केंद्र का शासन लागू करने की सिफारिश की थी. इसकी एक प्रति केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेजी गई थी.


राष्ट्रपति ने वोहरा की सिफारिश को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद बुधवार को तत्काल प्रभाव से प्रदेश में राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया है.


बीते एक दशक में यह चौथी बार है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगा है.


गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर में तत्काल प्रभाव से राज्यपाल शासन लगाने की मंजूरी दे दी है.’


जम्मू-कश्मीर में मंगलवार रात भर राजनीतिक घटनाक्रम जारी रहा. जब राज्यपाल एनएन वोहरा ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति भवन को भेजी उस वक्त राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद विमान में थे.


राज्यपाल की रिपोर्ट का ब्यौरा तुरंत ही सूरीनाम भेजा गया जहां राष्ट्रपति अपने पहले दौरे पर जा रहे थे और उनका विमान भारतीय समयानुसार तड़के तीन बजे वहां उतरना था.


राज भवन के एक प्रवक्ता ने मंगलवार रात श्रीनगर में बताया, ‘सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श करने के बाद राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को भेज दी है जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 92 के तहत राज्यपाल शासन लागू करने की सिफारिश की है.’


राष्ट्रपति ने रिपोर्ट को देखने के बाद अपनी मंजूरी दे दी और इस बाबत बुधवार सुबह छह बजे केंद्रीय गृह मंत्रालय को सूचित किया गया. इसके बाद राज्यपाल शासन लगाने की प्रक्रिया तैयार की गई और इसे श्रीनगर भेजा गया.


बीते चार दशक में यह आठवीं बार है जब राज्य में राज्यपाल शासन लगाया गया है और वर्ष 2008 से वोहरा के कार्यकाल में चौथी बार राज्य में राज्यपाल शासन लागू किया गया है.


भाजपा ने मंगलवार दोपहर अचानक ही राज्य में पीडीपी के साथ तीन साल पुराने सत्तारूढ़ गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया था और यहां राज्यपाल शासन लगाने की मांग की थी.


भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने घोषणा की थी कि पार्टी गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले रही है. गठबंधन में कटु राजनीतिक कलह और बदतर होती सुरक्षा स्थितियों की वजह से दरारें पड़ने लगी थीं.


माधव ने कहा था, ‘जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार में बने रहना भाजपा के लिए मुश्किल हो गया है.’


वोहरा के कार्यकाल में राज्य में पहली बार राज्यपाल शासन वर्ष 2008 में 174 दिन के लिए लगाया गया था जब गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस और पीडीपी की गठबंधन सरकार से पीडीपी ने अमरनाथ भूमि विवाद के चलते समर्थन वापस ले लिया था.


उमर अब्दुल्ला के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही राज्यपाल शासन पांच जनवरी 2009 को समाप्त हुआ था.

(साभार दी वायर)

मंगलवार, 19 जून 2018

ट्रेन कैप्टन यात्रा में समस्याओं का तुरन्त निराकरण करेगा:बीकानेर व जयपुर मंडल में शुरुआत



श्रीगंगानगर, 19 जून 2018.

भारतीय रेल द्वारा यात्रियों को ट्रेन में यात्रा के दौरान सेवाओं से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की समस्याओं के निराकरण के लिये अलग-अलग व्यक्तियों से सम्पर्क करने के स्थान पर एक ही जिम्मेदार व्यक्ति से सम्पर्क करने की सुविधा प्रदान की जा रही है।

 लम्बी दूरी की मेल/एक्सप्रेस रेल सेवाओं में ‘‘ट्रेन कैप्टन’’ की अवधारणा को लागू किया जा रहा है। यात्रा के दौरान यात्रियों को प्रदान की जा रही सेवाओं तथा उनको होने वाली समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिये ट्रेन में नामित ‘‘ट्रेन कैप्टन’’ जिम्मेदार होगा।


उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी तरूण जैन के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे पर भारतीय रेलवे में सर्वप्रथम बीकानेर मण्डल पर ट्रेनों में ट्रेन कैप्टन नामित करने का कार्य शुरू हो गया ह

 बीकानेर मण्डल पर 

गाडी सं 12556 हिसार-गोरखपुर एक्सप्रेस,

गाडी स. 14888 बाडमेर-कालका एक्सप्रेस,

 गाडी सं 22982 श्रीगंगानगर-कोटा एक्सप्रेस 

गाडी स. 14724 भिवानी-कानपुर एक्सप्रेस में

 ट्रेन कैप्टन नामित कर कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। 

इसके साथ ही जयपुर मण्डल पर 

गाडी सं 12976/12955 में जयपुर-कोटा-जयपुर के मध्य, 

गाडी सं. 12985/86, जयपुर-दिल्ली सराय-जयपुर, 

 गाडी सं 12956/19714 में जयपुर-कोटा-जयपुर के मध्य,

 गाडी सं.12215/16 में जयपुर-अहमदाबाद-जयपुर के मध्य 

गाडी सं. 12413/14 में जयपुर-दिल्ली-जयपुर के मध्य 

कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है।

ट्रेन कैप्टन यात्रा के दौरान होने वाली सभी समस्याओं जैसे बैडरोल, पानी, एसी, सुरक्षा, खाना इत्यादि के लिये ट्रेन में सम्बंधित कार्यरत कर्मचारियों से समन्वय का कार्य करेगा तथा सम्बन्धित शिकायत का उसी समय निराकरण के लिये कार्य करेगा। ट्रेन कैप्टन के पास गार्ड, टीटीई, पैन्ट्रीकार के कर्मचारी, सफाई कर्मियों सभी के नम्बर होगें जिससे वह उनसे तुरन्त समन्वय कर यात्रियों की शिकायत को तुरंत दूर करने का कार्य करेगा।


शताब्दी, राजधानी व दुरन्तो तथा ऐसी ट्रेन में जहॉ ट्रेन सुपरवाइजर है उनमें उन्हें ट्रेन कैप्टन के रूप में नामित किया जायेगा तथा अन्य ट्रेन में सबसे वरिष्ठतम टिकट निरीक्षक को ट्रेन कैप्टन के रूप में नामित किया जायेगा।

यात्रियों से सम्पर्क के लिये आरक्षण चार्ट पर ट्रेन कैप्टन के नम्बर अंकित रहेंगे तथा ट्रेन कैप्टन को यूनिफार्म के साथ ट्रेन कैप्टन का बेच होगा, जिससे यात्रा उसको आसानी से पहचान सकें और अपनी किसी भी प्रकार की समस्या से अवगत करवा सकेंगे।


सोमवार, 18 जून 2018

खान राज्यमंत्री अपने गांव के आसपास करेंगेें 6 दिन दौरा और घर में रात्रि विश्राम


* करणीदानसिंह राजपूत *

विधानसभा चुनाव अब लगभग सिर पर आ गए हैं और ऐसे में अपने ही घर को संभालना जरूरी हो गया है कि वहीं पर.कोई गड़बड़ ना हो जाए। घर में नाराजगी हो जाए तो मालूम नहीं पड़ता कि साथ चलता कोई भी विश्वास वाला ही कब पीठ पर तगड़ा धौल जमा कर सिट्टीपिट्टी गुम कर दे। खान राज्य मंत्री सुरेंद्रपालसिंह टीटी से लोग नाखुश नजर आ रहे हैं। उनका विधानसभा क्षेत्र श्रीकरणपुर और उसी में गुलाबेवाला में घर। मंत्री जी का श्रीगंगानगर जिले का दौरा होता है तो गुलाबेवाला के इर्दगिर्द अधिक रहता है।

अब पांच माह चुनाव के बाकी बचे हैं। मंत्री जी का दौरा देखलें। अच्छा है जनता की नाराजगी जितनी दूर हो सके।

(श्रीगंगानगर, 18 जून 2018.)

 खान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सुरेन्द्र पाल सिंह टीटी 18 जून को रात्रि 9.30 बजे रेल द्वारा जयुपर से प्रस्थान कर 19 जून प्रातः 7.30 बजे सूरतगढ़ पहुंचेगें। सूरतगढ़ से रवाना होकर 9.30 बजे गुलाबेवाला पहुंचेगें। प्रातः 11.30 बजे उपखण्ड श्रीकरणपुर की ग्राम पंचायत मोटासरखुनी में तथा दोपहर 2 बजे उपखण्ड पदमपुर की ग्राम पंचायत 4 बीबी में राजस्व कैम्पों में भाग लेगें एवं निरीक्षण करेंगे। रात्रि विश्राम गुलाबेवाला में करेगें। 20 जून को प्रातः 9 से 10 बजे तक गुलाबेवाला में जनसुनवाई करेंगे। प्रातः 11 बजे ग्राम सेवा सहकारी समिति 16 एफएफए में किसान ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित करेगें। दोपहर 1.05 बजे उपखण्ड श्रीकरणपुर की ग्राम पंचायत 9 एफए मांझीवाला में तथा सायं 3 बजे उपखण्ड पदमपुर की ग्राम पंचायत 3 आरबीए में राजस्व शिविरों में भाग लेगें एवं निरीक्षण करेंगे। रात्रि विश्राम गुलाबेवाला में करेगें। 21 जून को प्रातः 9 से 10 बजे तक गुलाबेवाला में जनसुनवाई करेंगे। प्रातः 11 बजे ग्राम सेवा सहकारी समिति 50 एफ रूपनगर में किसान ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित करेगें। दोपहर 12.30 बजे उपखण्ड श्रीकरणपुर की ग्राम पंचायत 25 एफ गुलाबेवाला में तथा सायं 3 बजे उपखण्ड पदमपुर की ग्राम पंचायत उड़सर में राजस्व शिविरों में भाग लेगें एवं निरीक्षण करेंगे। रात्रि विश्राम गुलाबेवाला में करेगें। 22 जून को प्रातः 9 से 10 बजे तक गुलाबेवाला में जनसुनवाई करेंगे। प्रातः 11 बजे बींझबायला में किसान ऋण माफी कार्यक्रम में भाग लेगें व किसानों को ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित करेगें। दोपहर 1.30 बजे उपखण्ड पदमपुर की ग्राम पंचायत 23 बीबी बेरा के राजस्व शिविरों में भाग लेगें व निरीक्षण करेगे। दोपहर 2.30 ग्राम सहकार समिति 2 ओ में तथा सायं 4 बजे ग्राम सेवा सहकार समिति कमीनपुरा में किसान ऋण माफी कार्यक्रम में भाग लेगें व किसानों को ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरित करेगें। रात्रि विश्राम गुलाबेवाला में करेगें। 23 जून को प्रातः 9 से 11 बजे तक गुलाबेवाला में जनसुनवाई करेंगे। 11.30 बजे स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेगें। रात्रि विश्राम गुलाबेवाला में करेंगें। 24 जून को प्रातः 11.30 बजे स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेगें। 

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रेलों के चद्दरें तकिये धोने की लांड्री श्रीगंगानगर में निर्माण का शुभारंभ


श्रीगंगानगर, 18 जून। उतर-पश्चिम रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक, बीकानेर श्री ए.के.दुबे ने कहा कि यात्रियों को अच्छी सुविधाएं मिलें, इसके लिये रेल में उत्तरोतर विकास हो रहा है। इसी कड़ी में आधुनिक लॉंडरी की वर्कशॉप की शुरूआत होने जा रही है। 

डीआरएम बीकानेर सोमवार 18-6-2018 को रेलवे स्टेशन श्रीगंगानगर में आधुनिक लॉंडरी वर्कशॉप प्रोजेक्ट के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट 4 से 6 माह का है, लेकिन मैं उम्मीद करता हूॅ कि यह प्रोजेक्ट 4 माह में पूर्ण हो, जिससे यात्रियों को सुविधाओं के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी मिलेगें।

सीनियर डीएमई श्री पुष्कर सिंगला ने बताया कि यात्रियों को दी जाने वाली चद्दर तकिया इत्यादि एक यूनिट का वजन लगभग 1 किलोग्राम होता है। इस ऑटोमेटिक लॉंडरी में 8 घंटे की शिफ्ट में लगभग 2000 यूनिट की धुलाई होगी। प्रतिदिन 3.30 से 4 टन चद्दर कम्बल तकियों की धुलाई की जा सकेगी। इस आधुनिक लॉंडरी की क्षमता 6 टन है तथा काम बढ़ने पर इसकी क्षमता को बढ़ाकर 8 टन किया जा सकेगा। उन्हांने कहा कि वाशिंग लाईन बनने से नई गाड़ियां आने की संभावना बढ़ गई है तथा इस लॉंडरी से हिंसार, बीकानेर, भिवानी तक धुली हुई चद्दरें जायेंगी। इस प्रोजेक्ट की कीमत लगभग साढे़ इक्कीस करोड़ रूपये है। जयपुर के बाद राजस्थान में यह दूसरा प्रोजेक्ट है तथा देश भर में इस प्रकार के 12-13 प्लांट संचालित है। इस अवसर पर श्री प्रदीप धेरड़ ने कहा कि माननीय सांसद श्री निहालचंद के प्रयासों से इस क्षेत्र को मिलने वाली सुविधाओं की दिशा में एक और सुविधा की शुरूआत हुई है। नई वाशिंग लाईन तैयार होने से भी नई गाड़िया लाने के प्रयास किये जा रहे है। माननीय सांसद द्वारा किये गये प्रयासों के फलस्वरूप इस क्षेत्र को सुविधाएं मिली है तथा ओर सुविधाएं मिलने की संभावना प्रबल हुई है। 


आयोजित कार्यक्रम में श्री सीताराम बिश्नोई, श्री प्रहलाद राय टॉक, श्री प्रदीप धेरड़, श्री हरभगवान बराड, जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य श्री भीम शर्मा, श्री बंशीधर जिंदल, रेलवे के सीनियर डीएमई श्री पुष्कर सिंगला, एडीएन श्री अवधेश मीणा, स्टेशन अधीक्षक श्री दिनेश कुमार त्यागी सहित रेलवे के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे। 

रविवार, 17 जून 2018

सूरतगढ:विश्व योग दिवस की तैयारी का प्रदर्शन



मारवाड़ी युवा मंच एवं नगर पालिका के संयुक्त तत्वाधान तथा पतंजलि के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों को लेकर योग प्रदर्शन कार्यक्रम शनिवार 16-6-2018 को 7:30 बजे से 9:00 बजे तक सुभाष चौक पर आयोजित किया गया। इसमें राज्य स्तरीय चयनित छात्रों द्वारा पावर योग का प्रदर्शन किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता  SDM श्रीमती सीता शर्मा ने की इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में नगर पालिका अध्यक्षा श्रीमती काजल छाबड़ा व्यापार मंडल अध्यक्ष ललित सिडाना मारवाड़ी युवा मंच अध्यक्ष मनीष सोनी मौजूद थे प्रचारक शिव प्रकाश गोदारा एवं प्रशिक्षक ओमप्रकाश गोदारा ने योगाभ्यास करवाएं।

योग दिवस पर 21 जून को नए बस स्टैंड पर सुबह 6:00 बजे से 8:00 बजे तक योग शिविर का कार्यक्रम रखा गया है

इस अवसर पर भरत ऋषि रांका, अशोक सोनी,जयमल नाथ तँवर, डॉ तरुण खुराना, नितेश सोमानी, कपिल गुप्ता,गोपाल कोठारी,अंकित कुकड,सहित शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।


महेंद्र सिंह शेखावत के काव्य संग्रह सफ़र का लोकार्पण










* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 17 जून 2018.

भाषा के प्रखर ज्ञाता महेंद्र सिंह शेखावत के काव्य संग्रह सफ़र का लोकार्पण आज साहित्यकार डॉक्टर हरिमोहन सारस्वत की अध्यक्षता में टैगोर PG कॉलेज के सभागार में हुआ।

 शहर के लब्ध प्रतिष्ठित लोग जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं वे इस समारोह में शामिल हुए। मुख्य अतिथि

गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के जिला अध्यक्ष परसराम भाटिया और कार्यक्रम अध्यक्ष हरिमोहन सारस्वत सहित मंचासीन अतिथियों ने काव्य संग्रह का लोकार्पण किया।

महेंद्रसिंह शेखावत

 इस अवसर पर संग्रह में समायोजित कविताओं के बारे में महेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि सफ़र में हर प्रकार के  सुख दुख की अनुभूति होती है। पिछले करीब 15 सालों में विभिन्न प्रकार के अनुभव मिलते रहे हैं जिन्हें काव्य रूप में संयोजित किया गया। यह काव्य संग्रह राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित हुआ है।

मुख्य अतिथि परसराम भाटिया ने काव्य रचनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। 

हरिमोहन सारस्वत 'रूंख'

डॉक्टर हरिमोहन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में साहित्य और शहर के बारे में विभिन्न प्रकार के सम्मेलन आदि पर अपने विचार रखे। 

विशिष्ट अतिथि साहित्यकार रामेश्वर दयाल तिवारी ने विस्तृत विचार व्यक्त किए।

 विशेष  अतिथियों एडवोकेट अमित कपूर व पार्षद सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने  महेंद्र सिंह शेखावत के काव्य संग्रह सफ़र पर अपने विचार प्रकट किए।

आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक रमेश शर्मा ने काव्य संग्रह पर पत्र वाचन किया जिसमें समायोजित कविताओं पर विचार रखे। 

इस अवसर पर अमरपुरा जाटान से पधारे किसान कवि के नाम से विख्यात रिडमाल सिंह राठौड़ ने राजस्थान की धरती के विकास व हरियाली का सांगोपांग राजस्थानी और हिंदी  कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।

रिड़मालसिंह राठौड़

इस समारोह का संयोजन शब्द के ज्ञाता मांगीलाल शर्मा ने किया।

आभार श्रीमती रजनी मोदी की ओर से किया गया। 

समारोह में साहित्यिक संस्थाओं से संबंधित बुद्धिजीवी पत्रकार व रूचि रखने वाले लोगों ने भाग लिया।


 इस अवसर पर साहित्य गोष्ठियां आयोजित किए जाने का आह्वान किया गया।



गंगाजल मील को टिकट मिलना मुश्किल




* करणीदानसिंह राजपूत *


-  मील पिछला चुनाव 32593 वोटों से हारे और तीसरे क्रम पर धकेले गए -


- अमित कड़वासरा को भी टिकट मिलना मुश्किल पिछला चुनाव जमीदारा पार्टी से लड़ा और 48 491 वोटों से हारे

 लेकिन इस बार कांग्रेस में आकर के बने हैं दावेदार -


* करणीदानसिंह राजपूत *


कांग्रेस पार्टी आगामी 2018 का चुनाव उन नेताओं के बल पर नहीं लड़ना चाहती जो 2013 के चुनाव में 20 हजार वोटों से हारे। ऐसे नेता टिकट पर दावेदारी जता रहे हैं।


सूरतगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस की टिकट पर 2008 में जीत कर विधायक बने गंगाजल मील 2013 के चुनाव में तीसरे क्रम पर रहे। गंगाजल मील फिर से 2018 में दावेदार हैं मगर इस बार टिकट मिलना मुश्किल है।

 कांग्रेस 108 सीटों पर बदलाव करने का प्रयत्न करने वाली है जहां पर प्रत्याशी 20,000 वोटों से हारे। सूरतगढ़ सीट पर गंगाजल मील 32593 वोटों से हारे और तीसरे नंबर पर पहुंचा दिए गए इसलिए गंगाजल मील को 2018 में कांग्रेस की टिकट मिलना बहुत ही मुश्किल है।

यह मानकर चलना चाहिए कि गंगाजल मील को टिकट मिलने की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं है। 

 गंगाजल मील 2003 में पीलीबंगा से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े। भाजपा के दिग्गज नेता प्रमोद महाजन ने पीलीबंगा में प्रभावशाली भाषण दिया लेकिन आजाद उम्मीदवार रामप्रताप कासनिया ने मील की बुरी गत बनादी। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर आजाद उम्मीदवार के रूप में उतरे रामप्रताप कासनिया ने मील को पटखनी दी।


मील ने इसके बाद  2008 में सूरतगढ़ में कांग्रेस की टिकट पर भाग्य आजमाया और जीत हासिल की। लेकिन पूरा कार्यकाल विवादों में रहा और भ्रष्टाचार व्यापक रूप से हुआ। परेशान जनता ने 2013 में मील को करारी मात दी और तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया।

 गंगाजल मील ने हारने के बाद पिछले 5 सालों में कोई विशेष उल्लेखनीय कार्य फील्ड में नहीं किया। भारतीय जनता पार्टी के विधायक राजेंद्र सिंह भादू के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार पर चुप्पी धारण करके एक प्रकार से भाजपा के भ्रष्टाचार को खुली छूट दे दी। किसी एक भ्रष्टाचार पर भी और राजेंद्र भादू के कार्यकलापों पर अपना मुंह नहीं खोला और कोई कार्यवाही कहीं लिखित रूप में नहीं की। चुनाव पराजय के बाद कम से कम प्रत्याशी की पार्टी के प्रति कर्तव्यनिष्ठा के रूप में जो कार्य मील को करने चाहिए थे, उससे मील दूर रहे। कांग्रेस पार्टी और मील के नहीं बोलने के कारण, विरोध नहीं करने के कारण भारतीय जनता पार्टी के राज में भ्रष्टाचार और लूट-खसोट को खुली छूट मिली जिसकी जिम्मेवारी मील पर आती है।


 इसके अलावा कांग्रेस पार्टी में अमित कड़वासरा ने भी टिकट की दावेदारी जताई है जो जमींदारा पार्टी से कांग्रेस में घुसे हैं। अमित ने पिछला  2013 का चुनाव सूरतगढ़ सीट से जमींदारा पार्टी के टिकट पर लड़ा और बुरी तरह से मात खाई जिससे 48 491 वोटों से पराजय मिली। अमित कड़वासरा को 18 275 वोट ही मिल पाए। कांग्रेस पार्टी 20000 वोटों से पराजित कांग्रेसी को टिकट नहीं देने की प्रक्रिया अपनाने वाली है,ऐसी स्थिति में 48491 वोटों से हारे हुए  अमित कड़वासरा को टिकट मिलना असंभव है। अमित कड़वासरा ने भी भाजपा के भ्रष्टाचार घोटालों व विधायक राजेंद्र भादू के कार्यकाल पर मुंह नहीं खोला।

कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ से पुराने कांग्रेसी को उतार सकती है जो लगातार 20- 25 सालों से कांग्रेस पार्टी में रहा हो। 




शनिवार, 16 जून 2018

कांग्रेस के बुरी तरह से हारे 108 नेताओं की टिकट पर संकट!


- हारे नेता 2018 में भी टिकट के हैं दावेदार-

- नए प्रत्याशी उतारे जाएंगे -

- श्रीगंगानगर जिले की 4 सीटों श्रीगंगानगर, अनूपगढ,रायसिंहनगर और सूरतगढ में संकट- 


* करणीदानसिंह राजपूत *


कांग्रेस पार्टी  चुनाव 2018 की जीत की पकायत के लिए राजस्थान में 108 सीटों पर पिछले प्रत्याशियों में परिवर्तन कर नए चेहरे उतार सकती है।

 पिछले विधानसभा चुनाव-2013 में करीब 108 उम्मीदवार 20 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव हारे।  इन 108 उम्मीदवारों में करीब 30 उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जो तीसरे से चौथे नंबर पर चले गए।

राज्य विधानसभा के 2013 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान तत्कालीन कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 20 हजार से ज्यादा वोटों से हारे उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने का प्रावधान लागू किया था। इसको लेकर पार्टी के पर्यवेक्षकों से लेकर सभी बड़े नेताओं ने सूची तक बनाई थी। हालांकि एक-दो मामलों में यह गणित पार्टी का नहीं चला, लेकिन कई दावेदार इस प्रावधान से टिकट की दौड़ में पिछड़ गए थे।

अब राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में अब होने वाले विधानसभा चुनाव 2018 में क्या नियम बनेंगे, लेकिन पार्टी में टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं में यह डर सता रहा है। पार्टी मुख्यालयों में इस तरह की चर्चा पार्टी नेताओं में आम है।


दूसरे दावेदार दे रहे हवा


कांग्रेस पार्टी में 20 हजार से ज्यादा वोटों से हारे उम्मीदवार बड़ी संख्या में फिर से टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं। वहीं इन सीटों पर टिकट को लेकर तैयारी जुटे दूसरे दावेदार पिछले चुनाव के नियमों का हवाला देकर बड़े नेताओं को पार्टी के नियम याद दिला रहे हैं। कांग्रेस में यह चुनावी जोड़तोड़ काफी तेजी से चल रहा है।


जयपुर में 19 में से 10 सीटों पर बड़ी हार

जयपुर जिले में 19 विधानसभा सीटों में से 8 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार 20 हजार से ज्यादा वोटों से चुनाव हारे। जबकि 2 सीटें ऐसी रहीं, जिन पर कांग्रेस उम्मीदवार दूसरे क्रम से भी नीचे चले गए। इस तरह तीसरे-चौथे स्थान पर रहे उम्मीदवारों को भी शामिल करें तो कांग्रेस को जिले में 19 में से 10 सीटें 20 हजार से भी ज्यादा के अंतर से गंवानी पड़ी।


-जिले जिनमें 20 हजार से ज्यादा अंतर से गंवाई गई सीटों की संख्या-


अजमेर - 6 सीट 

अलवर - 7 सीट 

बांसवाड़ा - 3 सीट 

बांरा - 1 सीट 

बाड़मेर - 5 सीट 

भरतपुर - 4 सीट 

भीलवाड़ा - 5 सीट 

बीकानेर - 1 सीट 

बूंदी - 1 सीट 

चित्तौडग़ढ़ - 2 सीट 

चूरू - 3 सीट 

दौसा - 4 सीट 

धौलपुर - 2 सीट

डूंगरपुर - 1 सीट 

गंगानगर - 4 सीट 

हनुमानगढ़ - 3 सीट 

जयपुर - 10 सीट 

जैसलमेर - 1 सीट 

जालौर - 3 सीट 

झालावाड़ - 4 सीट 

झुंझुंनूं - 4 सीट 

जोधपुर - 5 सीट 

कोटा - 3 सीट 

नागौर - 5 सीट 

पाली - 3 सीट 

प्रतापगढ़ - 1 सीट 

राजसमंद - 3 सीट 

सवाई माधोपुर - 2 सीट 

सीकर - 3 सीट 

सिरोही - 3 सीट 

टोंक - 3 सीट 

उदयपुर - 3 सीट

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शुक्रवार, 15 जून 2018

आदर्श क्रेडिट सोसायटी और बैंक से करोड़ों की निकासी।

* आयकर विभाग की जांच में चैंकाने वाले तथ्य सामने आए। *

* हथियार लाइसेंस में भी उलझा है मोदी परिवार। *

12 जून को मंदिर में चढ़ाया था 1 किलो सोना।

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15 जून 2018 को भी लगातार दूसरे दिन राजस्थान की मशहूर आदर्श क्रेडिट सोसायटी एवं बैंक के मालिक मुकेश मोदी के अनेक ठिकानों पर आयकर विभाग की जांच का काम जारी रहा। करीब सौ अफसरों के 6 जांच दल विभाग के संयुक्त निदेशक एम रघुवीर के नेतृत्व में जांच का कार्य कर रहे हैं। जांच 15 जून को देर रात तक जारी रहने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि मोदी परिवार ने पिछले दिनों अपनी अनेक कम्पनियों के लिए आदर्श क्रेडिट सोसायटी और बैंक से करोड़ों रुपए निकाले हैं। सोसायटी में आम उपभोक्ताओं की राशि जमा होती है। हालांकि आदर्श बैंक का संचालन रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के अनुरूप होता हैं, लेकिन जांच में लगे अधिकारियों को आश्चर्य है कि सोसायटी की विभिन्न शाखाओं में से कंपनियों के लिए करोड़ों रुपए निकाले गए। ऐसी सभी कंपनियों के मालिक भी मुकेश मोदी और उसके परिवार के सदस्य ही हैं। जांच में कंपनियों के काम काज की भी जानकारी ली जा रही है। मुकेश मोदी, रोहित मोदी और अन्य परिजन से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि सोसायटी के खातों से कंपनियों में राशि स्थानांतरित क्यों की गई। हालांकि अभी नोटबंदी के दौरान जमा करोड़ों रुपए की राशि को जांच के दायरे में शामिल नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि आगे चल कर आयकर विभाग उन व्यक्तियों की जांच करेगा, जिन्होंने नोटबंदी के दौरान राशि जमा कराई है। आयकर विभाग की ताजा कार्यवाही से आदर्श क्रेडिट सोसायटी और बैंक में खलबली मच गई है। जांच का कार्य उदयपुर, सिरोही, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर आदि शहरों में कड़ी सुरक्षा के बीच हो रहा है।

हथियार लाइसेंस में भी उलझेः

सोसायटी और बैंक के मालिक मुकेश मोदी और उनका पुत्र रोहित मोदी देश के बहुचर्चित हथियार लाइसेंस के मामले में भी उलझे हुए हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए पिता पुत्र ने अदालत से अग्रिम जमानत करवा रखी हैं। हालांकि इस मामले में अधिकांश धनाढ्य व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन मुकेश मोदी और रोहित मोदी अभी तक बचे हुए हैं। आरोप है कि पिता-पुत्र ने फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर कश्मीर से रिवाल्वर का लाइसेंस हासिल किया। हालांकि अब राजस्थान की एटीएस कश्मीर से जारी लाइसेंसों की भी जांच कर रही है। इस बीच इस गंभीर मामले की जांच सीबीआई से कराने की घोषणा की गई है। फर्जी दस्तावेज से हथियार लाइसेंस पूर्वोत्तर राज्यों से भी जारी करवाए गए हैं। 

मंदिर में एक किलो सोना चढ़ायाः

इसे एक संयोग ही कहेंगे कि मुकेश मोदी ने 12 जून को अपने परिवार के साथ गुजरात स्थित अंबाजी मंदिर में एक किलो सोना अर्पित किया और 14 जून को आयकर विभाग की जांच शुरू हो गई। मालूम हो कि आदर्श क्रेडिट सोसायटी की विभिन्न शाखाओं में लाखों लोगों की राशि जमा हैं। सोसायटी में जमाओं पर अन्य बैंकों से ज्यादा ब्याज मिलता है।

एस.पी.मित्तल) (15-06-18)


ओम माथुर की शक्ल देखना पसंद नहीं था सीएम वसुंधरा राजे को.उन्हीं के घर पर 3घंटे तक बैठी रही


* अब पता चला कैसी होती है राजनीति* 

*शेखावत ही हो सकते हैं प्रदेश अध्यक्ष।*

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राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे जिन ओम माथुर की शक्ल देखना पसंद नहीं करती थी, उन्हीं ओम माथुर के दिल्ली स्थित सरकारी आवास 9 सफदर गंज में 15 जून को तीन घंटे तक बैठी रहीं। मुख्यमंत्री का पूरा लवाजमा भी माथुर के घर पर टिका रहा। लम्बे अर्से बाद माथुर के आवास पर इस तरह की चहल पहल देखी गई। 14 जून की रात को राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति और अन्य मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह के बीच जो गंभीर मंत्रणा हुई उसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर भी उपस्थित रहे।


 इससे वसुंधरा राजे के समझ में आ गया कि अब राजस्थान की राजनीति में ओम माथुर को महत्व मिलने वाला है। इसे राजनीति का चरित्र ही कहा जाएगा कि वसुंधरा राजे प्रातः 11 बजे ही ओम माथुर के सरकारी आवास पर पहुंच गई। कोई तीन घंटे की मुलाकात में ओम माथुर ने भी बता दिया कि राजस्थान के बारे में राष्ट्रीय नेतृत्व क्या चाहता है।


 हालांकि सीएम राजे अभी भी दिल्ली में ही है और प्रधानमंत्री से मिलने का इंतजार कर रही हैं। लेकिन जानकारों की माने तो ओम माथुर के घर से निकल कर सीएम राजे बीकानेर हाउस पहुंच गई। सीएम के प्रवेश करने के साथ ही बीकानेर हाउस में मीडिया की एंट्री बंद कर दी गई है। जानकारों के अनुसार माथुर से मिलने के बाद सीएम राजे बेहद खफा है। मालूम हो कि पिछले दो दिन से दिल्ली में रहते हुए सीएम राजे ने प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जबरदस्त लाॅबिंग की। राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने यह दिखाने की कोशिश की कि राजस्थान भाजपा के सारे नेता और मंत्री एक साथ हैं। यहां तक कि औंकार सिंह लखावत जैसे नेताओं को भी दिल्ली बुला लिया गया लेकिन मुख्यमंत्री के इन तौर तरीकों का राष्ट्रीय नेतृत्व पर कोई असर नहीं पड़ा। सीएम के विरोधी माने जाने वाले राज्यसभा के सांसद ओम माथुर को ही मोदी और अमितशाह की मंत्रणा में शामिल किया गया। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व अभी भी केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता है। जबकि सीएम राजे अंतिम समय तक विरोध में है। सूत्रों के अनुसार सीएम राजे ने पिछले दो दिन में दिल्ली में जो राजनीतिक गतिविधियां की उससे भी राष्ट्रीय नेतृत्व बेहद खफा है। अब देखना है कि सीएम की मुलाकात प्रधानमंत्री से हो पाती है या नहीं। इस बीच भाजपा में  पुनः शामिल हुए राज्यसभा के सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने 15 जून को दिल्ली में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से कोई एक घंटे तक मुलाकात की। राजस्थान की राजनीति की दृष्टि से इस मुलाकात को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

माथुर से मतभेदः

राजस्थान की राजनीति में ओम माथुर और वसुंधरा राजे का विवाद जग जाहिर है। हालांकि माथुर लम्बे समय तक प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे और राजस्थान भर में संगठन को मजबूत करने में माथुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, लेकिन सीएम राजे से विवाद के चलते माथुर को राजस्थान की राजनीति से दूर कर दिया गया। कभी गुजरात तो कभी यूपी, के चुनावों का प्रभारी बना दिया। माथुर जब कभी राजस्थान आते तो भाजपा के कार्यकर्ता नेता बचते दिखे। ऐसा माहौल बना कि यदि माथुर का स्वागत सत्कार किया गया तो सीएम राजे नाराज हो जाएंगी। यही वजह रही कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के बाद भी राजस्थान में माथुर का कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। राज्यसभा का सदस्य भी राष्ट्रीय नेतृत्व के दबाव से बनाया गया। लेकिन 15 जून उन्हीं ओम माथुर के दर पर सीएम राजे को जाना पड़ा। 

एस.पी.मित्तल) (15-06-18)

आतंकियों ने कश्मीर में 1 संपादक और 2 सुरक्षाकर्मियों को गोली से उड़ाया



- श्रीनगर के लाल चौक के पास आतंकियों ने बुखारी पर हमला किया

- बुखारी अपने दफ्तर से इफ्तार पार्टी में शामिल होने जा रहे थे


श्रीनगर.14-6-2018.

राइजिंग कश्मीर अखबार के संपादक शुजात बुखारी की गुरुवार शाम आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। लाल चौक के पास शाम 7.15 बजे हुए हमले में बुखारी के 2 सुरक्षाकर्मियों की भी जान चली गई। एक नागरिक भी घायल हुआ है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस घटना पर शोक जाहिर किया है। राजनाथ ने कहा- बुखारी निडर पत्रकार थे, उनकी हत्या कायरता का परिचय है।


बाइक पर आए तीन आतंकियों ने किया हमला


- जम्मू-कश्मीर के डीजीपी एसपी वैद ने कहा, "हमला इफ्तार के वक्त हुआ। बुखारी अपने प्रेस एन्क्लेव स्थित दफ्तर से बाहर निकले थे और कार में सवार होने जा रहे थे। इसी दौरान बाइक पर आए 3 आतंकियों ने उन पर और सुरक्षाकर्मियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।" 


ईद से पहले आतंकियों का गंदा चेहरा सामने आया- मुफ्ती

- महबूबा मुफ्ती ने बुखारी के परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कहा, "ईद से एक दिन पहले आतंकियों का गंदा चेहरा सामने आया है। बुखारी की हत्या चौंकाने वाली घटना है। कुछ दिन पहले ही वे मुझसे मिलने आए थे।" 

- नेशनल कॉन्फ्रेंस लीडर उमर अब्दुल्ला ने कहा, "बुखारी ने अपना कर्तव्य निभाते हुए जान दी। उनकी हत्या कायराना हरकत है।" 

बुखारी न्याय और शांति के लिए निडरता से लड़े- राहुल

- राहुल ने ट्वीट किया, "शुजात बुखारी की हत्या की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। वे काफी हिम्मत वाले थे। बुखारी जम्मू-कश्मीर में न्याय और शांति के लिए निडरता से लड़े।"

- केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने ट्वीट किया, "ये शर्मनाक हरकत है। भारत में मीडिया स्वतंत्र है। केंद्र और राज्य सरकार मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्ध हैं।"


गुरुवार, 14 जून 2018

राजस्थान भाजपा के आगे मोदी-शाह पस्त: प्रदेशाध्यक्ष प्रकरण लेटेस्ट

देश के सबसे अधिक ताकतवर नरेंद्र मोदी और अमित शाह इन दिनों परेशान  कसमसाए से हैं एक प्रधानमंत्री है और दूसरा भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष है।

यह पावरफुल जोड़ी राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की खाली पड़ी कुर्सी भरने में सफल नहीं हो पार रही है। 

इनके प्रस्तावित  नाम गजेंद्र सिंह शेखावत पर राजस्थान सरकार की मुखिया वसुंधरा राजे सहमति नहीं दे रही है। 

कई दौर की बैठकों के बाद भी मामला जैस का तैस बना हुआ है और यहां राजस्थान की मुख्यमंत्री है जो टस से मस नहीं हो रही है।

नए प्रदेशाध्यक्ष के सहमति बनाने के लिए 13-6-2018 को अनेक नेता दिल्ली में एकजुट हुए, लेकिन ये कोशिश फिर से नाकाम हुई। 

भाजपा कार्यकर्ता सहित जनता को भी यह समझ में आ गया है कि चाहकर भी दिल्ली में बैठे बड़े नेता राजस्थान को लेकर कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं।

ऐसे में एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि राजस्थान के आगामी विधानसभा चुनाव 2018 में आखिर दिल्ली की कितनी चल पाएगी?

भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले अमित शाह राजस्थान के प्रदेश नेतृत्व के आगे बौने नजर आ रहे हैं।

 यह पहला मौका है जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी प्रदेश को लेकर इतने चिंतन और मंथन के दौर से गुजर रहे हैं। 

नए अध्यक्ष को लेकर जिस तरह से प्रदेश और दिल्ली के बीच मामला ठना हुआ है, उसने पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों की नींद उड़ा दी है।

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विश्वासपात्र केंद्रीय राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को प्रदेशाध्यक्ष के पद पर देखना चाहते हैं तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जातिगत समीकरण गड़बड़ाने के हवाले से शेखावत के नाम पर कतई तैयार नहीं हैं। शेखावत का नाम जब-जब पार्टी नेतृत्व की ओर से आगे रखा गया है, तब-तब वसुंधरा राजे केंद्रीय नेतृत्व की राह मे खड़ी हो गई। 

राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रदेशाध्यक्ष पद की इस तनातनी के बीच आगामी चुनाव में पार्टी को नुकसान होने की आशंका बढ़ती जा रही है।

हर राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति में माहिर अमित शाह को राजस्थान में अत्यधिक मुश्किल पेश आ रही है।

 प्रदेश अध्यक्ष पद से वसुंधरा के चहेते अशोक परनामी की अघोषित छुट्टी के बाद जैसे ही अमित शाह ने नए प्रदेशाध्यक्ष के रुप में जोधपुर से लोकसभा सदस्य एवं केंद्र में कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के नाम का दांव चला, वसुंधरा राजे के खुले विरोध से वो उलटा पड़ गया।

अब राज्य के नए प्रदेशाध्यक्ष का नाम तय होने के बाद भी आलाकमान उसे घोषित नहीं कर पा रहा है। वो इंतजार में बैठा है कि राजस्थान थोड़ा नरम हो तो आगे कदम बढ़ाया जाए, लेकिन अभी तक के हालात ये बताते हैं कि राजस्थान के मामले में मोदी-शाह को पटखनी मिली है। दिल्ली से चले हर आदेश का पालन हर राज्य करते रहे हैं, लेकिन राजस्थान में ये आदेश हर बार हवा में ही उड़ते रहे हैं।

आलाकमान की मुश्किल ये है कि प्रदेशाध्यक्ष के मामले में यदि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश के नेताओं की अनदेखी करते हुए निर्णय करता है तो चुनाव के नतीजों के लिए वह जिम्मेदार हो जाएगा। साथ ही टिकट बंटवारे से लेकर भी स्थिति उलझ जाएगी।

इस बीच माना जा रहा है कि भाजपा में इस गुटबाजी का लाभ कांग्रेस को चुनाव के दौरान मिल सकता है। साथ ही इस अंदरूनी कलह को कांग्रेस चुनाव में कैश भी करने की कोशिश कर सकती है। इस खींचतान के बीच एक बात साफ नजर आ रही है कि इसका बड़ा कारण टिकट वितरण में अपना वर्चस्व बनाए रखना ही मुख्य है। अगर केंद्रीय नेतृत्व गजेंद्रसिंह को अध्यक्ष बनाने में नाकाम रहता है तो विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण का काम भी दिल्ली के पास नहीं होगा।

भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष तो होगा ही,लेकिन इस प्रकरण में खटास तो पड़ ही गई है और उसके परिणाम पार्टी को न चाहते हुए भी भोगने ही पड़ेंगे।

सूरतगढ़: सेठ धर्मचंद चोपड़ा का निधन

- अंतिम संस्कार सम्पन्न -

सूरतगढ़ 14 -6-2018.

छवि सिनेमा रोड पर जनरल स्टोर मालिक ( गट्टी वाले के नाम से प्रसिद्ध) धर्मचंद चौपड़ा का आज निधन हो गया। तेरापंथी जैन समाज में उनका नाम रहा है।

उनकी अंतिम संस्कार यात्रा उनके निवास वार्ड नं 19 से शाम 5 बजे रवाना होकर मुख्य कल्याण भूमि पहुंची जहां अंतिम संस्कार किया गया।

वे कुछ समय से बीमार थे। बीकानेर में ईलाज चल रहा था। आज ही बीकानेर से लाया गया था। यहां पहुंचने के बाद सुबह 11-30 बजे निधन हो गया।

बुधवार, 13 जून 2018

बालिका लक्ष्मी (3 वर्ष)के परिजनों को खोजें:श्रीगंगानगर में है बालिका

श्रीगंगानगर, 13 जून 2018.

गुमशुदा बालिका लक्ष्मी को अपने परिवारजनों की तलाश है। यह बालिका 10 मई 2018 को समन्वय चाईल्ड लाईन श्रीगंगानगर द्वारा एक अज्ञात गुमशुदा बालिका को बाल कल्याण समिति श्रीगंगानगर के समक्ष पेश किय गया। यह बालिका अपने माता-पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य का नाम बताने में असमर्थ है। बालिका के परिवार का पता लगाने का प्रयास किया गया। लेकिन आज दिनांक तक कोई जानकारी नही मिली। 

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि बालिका का नाम लक्ष्मी, आयु 3 वर्ष, रंग गेहूंआ तथा काली एवं गुलाबी रंग की फरोक पहनी हुई है। (अधिक से अधिक शेयर करें ताकि परिजनों की खोज हो सके)




बीजेपी का कोषाध्यक्ष कौन? कैसे बनी 1000 करोड़ वाली सबसे अमीर पार्टी?

*जब अगस्त 2014 में अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तब उन्होंने पार्टी कार्यकारिणी का नए सिरे से गठन किया था। इस नवगठित टीम में कोषाध्यक्ष का पद खाली रखा गया था।*


(जनसत्ता ऑनलाइनUpdated: June 13, 2018.)


पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2016-17 में 1034 करोड़ रुपये की कुल आमदनी के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) देश की सबसे अमीर राजनीतिक पार्टी बन गई है। बीजेपी ने चुनाव आयोग को सौंपे अपने सालाना रिटर्न्स में भी इसका खुलासा किया है। यानी 2016-17 का वित्त वर्ष बीजेपी के लिए धनवर्षा का वर्ष रहा है। इस साल पार्टी की कुल आमदनी में करीब 81 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है मगर हैरत की बात है कि जिसके कंधे पर पार्टी के लिए फंड इकट्ठा करने और सभी तरह के आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने की जिम्मेदारी है उसके नाम का कोई अता-पता नहीं है। पार्टी ने अपने कोषाध्यक्ष के बारे में न तो अपनी वेबसाइट पर किसी नाम का उल्लेख किया है और न ही चुनाव आयोग को सौंपे गए ऑडिट रिपोर्ट में कोषाध्यक्ष का नाम लिखा है। साल 2016-17 के ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक कोषाध्यक्ष के स्थान पर फॉर लिखकर किसी का हस्ताक्षर किया हुआ है जो स्पष्ट नहीं है। हालांकि, ऑडिट रिपोर्ट पर दो अन्य हस्ताक्षरी चार्टर्ड अकाउंटेंट वेणी थापर और पार्टी के महासचिव रामलाल के दस्तखत हैं।


‘द वायर’ ने इस बारे में कई लोगों से रायशुमारी की है। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने द वायर को बताया कि बीजेपी द्वारा चुनाव आयोग को सौंपा गया डिक्लरेशन गलत है। आयोग को चाहिए कि वो डिक्लरेशन स्वीकार करने की बजाय पार्टी को नोटिस जारी कर उससे कोषाध्यक्ष के बारे में पूछे। एक अन्य पूर्व सीईसी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि आयोग द्वारा साल 2014 में जारी राजनीतिक दलों के वित्तीय पारदर्शिता के दिशा-निर्देश के मुताबिक सभी पार्टी को अपने कोषाध्यक्ष या उस हैसियत के शख्स की जानकारी देना अनिवार्य है। उन्होंने भी कहा कि आयोग को इस बाबत संज्ञान लेना चाहिए और पार्टी विशेष से पूछना चाहिए कि क्यों कोषाध्यक्ष या उसकी हैसियत वाले पदधारी का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।


बता दें कि साल 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने से पहले पीयूष गोयल बीजेपी के घोषित कोषाध्यक्ष थे। मई 2014 में गोयल केंद्रीय मंत्री बन गए थे। इसके बाद जब अगस्त 2014 में अमित शाह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तब उन्होंने पार्टी कार्यकारिणी का नए सिरे से गठन किया था। इस नवगठित टीम में कोषाध्यक्ष का पद खाली रखा गया था। पार्टी सूत्रों ने तब कहा था कि पीएम मोदी के विश्वस्त कहे जाने वाले परिंदु भगत उर्फ कक्का जी पार्टी के कोषाध्यक्ष हो सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ और करीब चार साल से बिना खजांची (कोषाध्यक्ष) के सहारे ही बीजेपी देश की सबसे अमीर पार्टी बन गई है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पार्टी के लिए आखिर कौन फंड जुटा रहा है और अगर कोई शख्स यह काम कर रहा है तो वो कहीं इंटरेस्ट ऑफ कन्फ्लिक्ट्स का उल्लंघन तो नहीं कर रहा है? इसके साथ बड़ा सवाल यह कि आखिर चुनाव आयोग पिछले तीन सालों से बीजेपी का आर्थिक विवरणी (ऑडिट रिपोर्ट) कैसे स्वीकार कर रहा है।


(साभार)


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