शनिवार, 5 मई 2018

बीजेपी का बीज ही नहीं डालेंगे तो बीजेपी कहीं भी ऊग नहीं पाएगी*स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत*

श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ दो जिलों में यह आवाज हर गांव और शहर में सुनाई पड़ रही है। देश के अन्न भंडार कहे जाने वाले राजस्थान के इन दो जिलों के सालों से पीड़ित किसानों ने अपने को ठगा हुआ पाया। अब इन जिलों से आवाज उठ रही है कि बीजेपी का बीज ही नहीं डालेंगे तो बीजेपी ऊगेगी कहां से? किसानों की साफ घोषणा है कि बीजेपी को कहीं भी ऊग नहीं पाएगी।

यह घोषणा मामूली नहीं लेकिन महारानी के ही कदमों पर चल रहे इस इलाके के मंत्री और विधायक भी उसी सत्ता अहंकार में डूबे समझ नहीं रहे।

श्रीगंगानगर की 6 सीटें है अभी 4 पर बीजेपी और 2 पर जमींदारा पार्टी के विधायक हैं। सभी पर नाराजगी है। हनुमानगढ़ में 5 सीटें है। केवल एक सीट पर बीजेपी की जीत मानी जा रही है। अभिषेक मटोरिया पर कोई विवाद नहीं है। 

मंत्री डा.रामप्रताप और राज्यमंत्री सुरेंद्रपालसिंह टीटी से तो लोग बेहद नाराज हैं।

बीजेपी का कैप्सूल इस बार कार्यकर्ता भी गटक लें तो बड़ी उपलब्धि होगी। बघजेपी के विरूद्ध आवाज तो सारे राजस्थान से ही उठी हुई है।

राजस्थान बीजेपी संगठन और राजे सरकार को अहंकार की जानलेवा बीमारी लग चुकी है। यह बीमारी  संघ से भी दूर नहीं हुई।

दुनिया की बड़ी पार्टी का दावा कर अपनी पीठ थपथपाने वाली पार्टी राजस्थान में प्रदेशअध्यक्ष ही तय नहीं कर पाई।

जनता से कहा जाता रहा है कि केवल कार्य करते रहो और फल भगवान पर छ़ोड दो। गीता का संदेश सुनाते रहे और हम सुनते भी रहे।लेकिन गीता में तो यह भी लिखा है कि कृष्ण अर्जुन से कह रहे हैं कि ये सामने खड़े भाई बंधु रिश्तेदार हैं,इस मोह में मत पड़ो, सबको बींध दो। यह संदेश आपने नहीं दिया लेकिन जनता तो कथाओं में सुनती रही है।

कांग्रेस के आपातकाल को काला अध्याय बताने और उसका विरोध करने वाले परिवारों को ही अहंकार में कभी पूछा नहीं गया।

आपातकाल लोकतंत्र सेनानी और उनकी पत्नियां 80-90 साल में माता पिता के तुल्य हैं जिनको संभालने का कर्त्तव्य नहीं निभा रहे।वे कैसे गुजारा कर रहे है? जो लोकतंत्र सेनानी दिवंगत हो गए,उनके पीछे वीरांगनाओं का गुजर बसर कैसे हो रहा है? थोड़ी शर्म हया नहीं बची कि कभी उनके हाल ही जान लेते।मंत्री विधायक उनके घर जाते। चरण रज लेते। संस्कारों के संदेश केवल कार्यकर्ता हीच पालन करें। कभी इनको यह संदेश नहीं दिया गया।

भाजपा अंधड़ का तूफान का संदेश सुना रही है,लेकिन राजस्थान भर में खुद के विरूद्ध उठ रहे तूफान को देख नहीं रही।

बिल्ली को देख कबूतर आंखें बंद कर लेता है,सोचता है खतरा टल गया।

जनता केवल मतदान का इंतजार कर रही है। कड़वा कैप्सूल जनता के पास है। भाजपा तो लेना नहीं चाहेगी,मगर जनता मुंह पकड़ कर खोल कर गटकवा देगी।( सही लगे तो आगे शेयर करें ताकि दूर दूर तक रहने वाले पढ सकें)






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