बुधवार, 16 मई 2018

राजस्थान भाजपा और कांग्रेस वालों सुधर जाओ नहीं तो कर्नाटक की तरह लटका दिए जाओगे


* करणीदानसिंह राजपूत*

 राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी सरकार में चल रहे भयानक भ्रष्टाचार पर रोक नहीं और कांग्रेस की ओर से कोई बोल नहीं।

इन दोनों दलों को कर्नाटक चुनाव परिणाम से सबक लेना चाहिए कि जनता सरकार और प्रतिपक्ष दोनों को अधर में लटका कर के रख देती है।

 जनता ने कर्नाटक में  कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों की हेकड़ी    पर दोनों के नाक पर  घूसा दे मारा।  ना कांग्रेस जीती ना भारतीय जनता पार्टी जीती। 

नरेंद्र मोदी की हालत सांप सीढ़ी के खेल जैसी कर दी। सांप सीढी में जीतते हुए को बड़ा अहंकार होने लगता है उसे 99 पर सांप काटता है और 10 पर ले जाकर छोड़ देता है। नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को इतना अहंकार हो गया था कि दावे के 130 सीटें जीतने और सरकार बनाने का था लेकिन जनता ने 112 के बहुमत पर पहुंचने से पहले ही 104 पर ही एकदम से ब्रेक लगा दिया। मोदी की तूफानी गाड़ी को 104 पर  रोक दिया। भाजपा बनाने को चाहे जोड़-तोड़ करके खरीद फरोख्त करके सरकार बना ले लेकिन जो इमानदारी का ठप्पा लगा हुआ है वह एक बार फिर धूल में मिलेगा।

 दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी फिर से सत्ता में लौटने का दावा कर रही थी। जनता ने उसका दावा भी मटियामेट कर दिया और उसकी सीटे घटाकर 78 पर पहुंचा दिया। 

जनता के इस खेल को समझना चाहिए। सत्ता में हो चाहे प्रतिपक्ष में हो जनता दोनों को ही सबक सिखा सकती है।

 

 राजस्थान में नवंबर दिसंबर में चुनाव होंगे और अभी 5 महीने बाकी पड़े हैं।  भारतीय जनता पार्टी की सरकार को और कांग्रेस पार्टी को अपने अपने कार्यों पर नजर डाल कर सुधार कर लेना चाहिए।अन्यथा भारतीय जनता पार्टी का 180 का मिशन फेल होकर 100 से कम सीटों पर सिमट जाएगा। जनता 90 - 95 के बीच में लटका कर के रख सकती है। यह स्थिति प्रतिपक्ष कांग्रेस की भी हो सकती है कि उसे भी बहुमत से पहले रोक ले। कारण स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी राज में भ्रष्टाचार बढ़ा है कोई सुनवाई नहीं होती। आम जनता चाहती है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता जनता से तमीज से बात तो करे। भ्रष्टाचार से दुखी जनता जब कोई बात करना चाहती है तो तमीज से बात भी नहीं की जाती कोई सुनवाई तक नहीं की जाती। दूसरी और कांग्रेस पार्टी यह मानकर चल रही है कि उस की झोली में सत्ता आ रही है। कांग्रेस पार्टी इस बहुत बड़े भुलावे में जनता का काम नहीं कर रही। कांग्रेस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज नहीं उठा रही। इसलिए इन दोनों पार्टियों को ही कर्नाटक के चुनाव परिणाम से सबक ले लेना चाहिए,अगर दोनों पार्टियों ने इन चार पांच महीनों में सुधार नहीं किया तो  जनता निश्चित रूप से बीच में लटका कर रख देगी।

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