शुक्रवार, 27 अप्रैल 2018

राजस्थान में प्रदेशाध्यक्ष महिला को बनाओ और आधी टिकटें महिलाओं को दो





वसुंधरा की नारी शक्ति के आगे डगमग भाजपा हाईकमान

* करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान में कुछ महीनों से कहा जा रहा है आरोप लगाए जा रहे हैं वसुंधरा राजे कमजोर पड़ रही है। भारतीय जनता पार्टी उनकी अगुवाई वाले नेतृत्व में कमजोर पड़ रही है इसलिए आगामी चुनाव में कोई नया चेहरा आना चाहिए। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बदलने का निर्णय और कार्यवाही इसी श्रंखला में पहला कदम रहा।भा ज पा प्रदेश अध्यक्ष को को बदला जाने की योजना के तहत प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी का त्यागपत्र 16 अप्रैल 2018 को केंद्रीय कमान ने ले लिया और 18 को मंजूर भी कर लिया। अशोक परनामी को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का अति निकट माना जाता है और उन पर आरोप है कि उन्होंने वसुंधरा राजे के दिशा निर्देश पर ही संगठन के समस्त कार्य किए। 


भारतीय जनता पार्टी का अलग अलग स्थानों पर संगठन के रूप में अलग अलग चेहरा सामने आता है। सारे राजस्थान के लोगों को मालूम है और भारतीय जनता पार्टी के संगठन को मालूम है कि विधायक गण के हाथ खुले रखने के लिए स्थानीय संगठन नगर मंडल देहात मंडल आदि को विधायकों  पर ही छोड़ दिया गयाथा।विधायकों ने अपनी मनमर्जी से उन पदों पर कार्यकर्ताओं को मनोनीत करवाया। जब भाजपा का विधायक अपनी मनमर्जी से संगठन में मनोनयन करवाता है तो निश्चित रुप से वह अपनी ही मर्जी से करवाएगा और ऐसा ही हुआ।अब ऊपर से लेकर नीचे तक कोई कमजोरी रही और उसका असर हुआ है तो उससे दिल्ली की केंद्रीय कमान भी अपने आप को अलग नहीं रख सकती।जो कुछ हुआ उसमें उनकी सहमति रही थी।

 राजस्थान में उपचुनाव में 2 संसदीय क्षेत्र और 1 विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की पराजय और कांग्रेस की जीत के मध्य नजर वसुंधरा राजे और संगठन पर आरोप लगाए जाने लगे। लेकिन इस हार का कारण केवल राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा  और पार्टी के अध्यक्ष अशोक परनामी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

 इन उप चुनावों के परिणाम में केंद्रीय सरकार की भी अनेक नीतियां जनता को प्रभावित करने में रही। जनता ने उन नीतियों से भी भी भाजपा के विरुद्ध अपना मत प्रकट किया।

 केंद्रीय कमान ने प्रदेशाध्यक्ष पद पर से अशोक परनामी को हटाने की कार्यवाही की और अपनी इच्छा से अन्य को इस पद पर मनोनीत करना चाहा। वसुंधरा राजे ने और राजनीतिक सोच रखने वालों का यह विचार रहा कि यह कार्यवाही आगामी चुनाव से पहले वसुंधरा राजे के पर कतरने वाली वाली है। निश्चित रूप से वसुंधरा राजे को भी यह बात यह निर्णय अखरा और उन्होंने एक प्रकार से मुख्यमंत्री पद और संगठन की मर्यादाओं के अनुरूप अपना विरोध प्रकट किया।

 अपनी प्रभावी शक्ति दिखाई जिससे केंद्रीय कमान तुरंत  अपनी मर्जी का अध्यक्ष मनोनीत नहीं कर पाई। राजस्थान में वसुंधरा राजे की शक्ति को इनकार नहीं किया जा सकता। केंद्रीय कमान को राजस्थान की यह शक्ति वसुंधरा ने व्यक्तिगत रूप से दिखा भी दी।

 इस हालात में वसुंधरा राजे की मर्जी के विपरीत कोई भी अध्यक्ष मनोनीत नहीं किया जा सकता और आने वाले चुनाव में वसुंधरा राजे की मर्जी के विपरीत प्रत्याशी भी खड़े नहीं किए जा सकेंगें। 

वसुंधरा राजे की नारीशक्ति को देखते हुए राजस्थान मे भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर महिला नेता को ही मनोनीत किया जाना चाहिए। आगामी विधानसभा चुनाव में भी नारी शक्ति का प्रचंड  रूप दिखाने के लिए 200 सीटों में से आधी सीटें महिला नेताओं को दी जानी चाहिए।  राजस्थान में नगर पालिकाओं में में और पंचायतों में आधी सीटों पर महिलाओं ही दिए जाने का प्रावधान है इसलिए अच्छा यही है कि कानून बने या ना बने लेकिन महिलाओं की बहुत पुरानी मांग को राजस्थान विधानसभा से आगे लाया जाए।

भाजपा आधी सीटों पर महिलाओं को खड़ा करके समस्त दलों पर अपनी नारी शक्ति दिखलाए। राजस्थान का यह कदम सराहनीय कदम होगा और संपूर्ण भारत के लिए अनुकरणीय उदाहरण भी होगा।







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