बुधवार, 18 अप्रैल 2018

वसुंधरा के खास अशोक परनामी का भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से इस्तीफा: बड़े बदलाव होंगे





*  करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने इस्तीफा दे दिया है। 

 अब नया प्रदेश अध्यक्ष किसे बनाया जाएगा इस बारे में अभी तक साफ़ नहीं हो पाया है।

बताया जा रहा है कि केंद्रीय संगठन के इशारे पर परनामी ने इस्तीफा दिया है। वहीं इस बात को लेकर पहले से ही क़यास लगने शुरू हो गए थे कि परनामी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया दिया जाएगा। उपचुनाव में पार्टी को मिली हार और संगठन में कमज़ोर होती पकड़ के चलते उनकी जगह किसी अन्य को ये महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देने की बात सामने आई है।

गौरतलब है कि परनामी पिछले कुछ समय से विवादों की वजह से सुर्ख़ियों में रहे थे। उनके अतिक्रमण को बढ़ावा देने सम्बन्धी बयान से पार्टी की किरकिरी हुई थी। उनके विवादित बयान की खबर को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हाईकोर्ट तक में सुनवाई हुई थी और उन्हें माफ़ी मांगनी पड़ी थी।

बीजेपी की रणनीति का हिस्सा!

आगामी चुनावों को देखते हुए राजस्थान भाजपा अब जातिगत समीकरण साधने की रणनीति बना रही है। इसके तहत केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी और सांसद ओम बिड़ला में से किसी एक को अब भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हाल ही हुए उपचुनावों में भाजपा की करारी हार का कारण भी जातिगत समीकरण मे गड़बड़ी होना माना जा रहा है।

इन चुनावों में भाजपा के परंपरागत वोटर रहे ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत समाज की नाराजगी भाजपा की हार का मुख्य कारण रही। अब इन समाजों को पार्टी के साथ फिर से जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है। ऐसे में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी पर गाज गिरी है। उन्हें इसका खामीयाजा अपनी कुर्सी गवाकर चुकाना पड़ा है। परनामी को अध्यक्ष पद से हटाए जाने के साथ ही अब अधिकांश प्रदेश पदाधिकारी और जिला अध्यक्ष की भी छुट्टी होने के संकेत हैं।

लोगों में फिर से अपनी पकड़ बनाने के लिए संगठनात्मक कामकाज प्रदेश प्रभारी और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ही संभाल रहे हैं। अर्जुन राम मेघवाल और ओम बिड़ला पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निकट होने के साथ ही आरएसएस की पहली पसंद भी हैं।

इसी के साथ मेघवाल और बिड़ला को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोधी खेमे का माना जाता है। वहीं अरूण चतुर्वेदी पूर्व में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। साथ ही उन्हे संघ के स्वयंसेवक के नाते कई सालों तक काम करने का अनुभव भी प्राप्त है।

‌सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अरूण चतुर्वेदी को अध्यक्ष बनवाना चाहती हैं। इसके लिए सीएम राजे ने प्रदेश में आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ दो बार बातचीत कर चुकी है और केंद्रीय नेतृत्व तक भी अपनी बात पहुंचा चुकी है। चतुर्वेदी को मध्यम मार्गीय माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम शीघ्र तय कर लिया जाएगा।

भाजपा को बदलाव से कितना लाभ मिल पाएगा? यह समय ही बतलाएगा।









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