मंगलवार, 6 मार्च 2018

भारत के त्रिपुरा मेंं वामपंथी नेता लेनिन की मूर्ति उखाड़ी गई


त्रिपुरा में जीत के 48 घंटे के भीतर और सरकार बनने के पहले ही बीजेपी समर्थकों पर कम्युनिस्टों के आदर्श ब्लादिमीर लेनिन की मूर्ति ढहाने का आरोप लगा है। इस दौरान भारत माता की जय के नारे लगाए गए। पुलिस ने जेसीबी चालक को गिरफ्तार कर लिया है।सीपीएम ने इसे जहां डर पैदा करने की राजनीति करार दिया है, वहीं बीजेपी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि वामपंथी शासन में दमन के शिकार लोगों ने मूर्ति को ढहाया। त्रिपुरा में भले ही बीजेपी ने सत्ता में आते ही मूर्ति ढहा दी हो, मगर कोलकाता में आज भी लेनिन की मूर्ति खड़ी है। जबकि 34 वर्षों वामपंथी सरकार को हराकर 2011 में ममता बनर्जी की सरकार बनी। ऐसे में त्रिपुरा में मूर्ति ढहाने को लेकर एक धड़ा आलोचना कर रहा है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घटना करीब ढाई बजे की है। जब सैकड़ों की संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता जुटे, उन्होंने एक बुल्डोजर मंगवाया फिर भारत माता की जय के नारे लगाते हुए रूसी क्रांति के हीरो लेनिन की मूर्ति ढहा दी। पुलिस ने बाद में चालक आशीष पाल को गिरफ्तार करने के साथ बुल्डोजर सीज कर दिया। यह मूर्ति सीपीएम शासन के 21 साल पूरे होने पर 2013 में त्रिपुरा के बेलोनिया में लगाई गई थी।

मूर्ति ढहाने की योजना तैयार करने के लगे आरोपों पर बीजेपी नेता राजू नाथ ने कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसे से विदेशी लेनिन की मूर्ति क्यों म्यूनिसिपॉलिटी ने लगाई थी? अगर सीपीएम के पूर्व मुख्यमंत्री नृपेन चक्रबर्ती की मूर्ति होती तो कोई उसे छूता भी नहीं। एसपी कमल चक्रवर्ती के मुताबिक बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शराब पिलाकर चालक से मूर्ति पर जेसीबी चलवाई। सीपीआईएम नेता तापसस दत्ता ने कहा, प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मूर्ति गिराने के बाद उसे तोड़ना शुरू किया। उन्होंने लेनिन के सिर से फुटबाल की तरह खेलना शुरू किया।”


25 साल बाद सत्ता से बाहर हुई सीपीएम ने बीजेपी पर जीत के उन्माद में उत्पीड़न का आरोप लगाया है। कहा है कि जीत के बाद पार्टी के दफ्तरों और काडर पर बीजेपी कार्यकर्ता लगातार हमला कर रहे हैं। पार्टी के सांसद के मुताबिक अब दो सौ से ज्यादा हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। उधर, लेनिन की मूर्ति तोड़ने की घटना पर सीपीएम ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। कहा कि-, ”त्रिपुरा में चुनाव जीतने के बाद हुई हिंसा प्रधानमंत्री के लोकतंत्र पर भरोसे के दावों का मजाक है।”


लेनिन के बारे में जानिएः ब्लादिमीर लेनिन वामपंथियों के आदर्श माने जाते हैं। इनके विचार लेनिनवाद के नाम से जाने जाते हैं। रूस में कम्युनिस्ट विचारधारा की जड़ें जमाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया। कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने 1898 में बोल्शेविक पार्टी बनाई।1917 में रूस के पुनर्निमाण की मुहिम चलाते हुए केरेनन्सकी सरकार की विदाई कर दी। इसके बाद 1917 में लेनिन की अध्यक्षता में सोवियत सरकार बनी। वामपंथी लेनिन के विचारों से खुद को प्रेरित मानते हैं।


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