रविवार, 4 मार्च 2018

मेघालय के सीएम बनने जा रहे कोनराड संगमा

*पिता भी रह चुके हैं मुख्यमंत्री*

कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो देश के संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक उन्हें 6 महीने के अंदर राज्य की विधानसभा का सदस्य बनना पड़ेगा। यानी कि उन्हें एक बार फिर से चुनाव लड़ना पड़ेगा।

कोनराड संगमा मेघालय के नये मुख्यमंत्री होंगे। वह दस साल पुरानी कांग्रेस की मुकुल संगमा सरकार को हटाकर नये सीएम बनने जा रहे हैं। 40 साल के कोनराड संगमा को सियासत विरासत में मिली है। कोनराड संगमा के पिता पी ए संगमा देश के पूर्व लोकसभा स्पीकर रह चुके हैं। उनकी बहन अगाथा संगमा भी राजनीति में सक्रिय रही हैं। कोनराड संगमा इस वक्त मेघालय के तूरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं, इसस पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व उनकी बहन अगाथा करती थीं। अगर कोनराड संगमा मेघालय के मुख्यमंत्री बन जाते हैं तो देश के संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक उन्हें 6 महीने के अंदर राज्य की विधानसभा का सदस्य बनना पड़ेगा। यानी कि उन्हें एक बार फिर से चुनाव लड़ना पड़ेगा। कोनराड संगमा ने बतौर कैम्पेन मैनेजर राजनीति की शिक्षा ली, वह अपने पिता के प्रचार का जिम्मा संभालते थे। 2008 में वह पहली बार मेघालय विधानसभा के लिए चुनकर आए। इसी साल वह कैबिनेट में शामिल किये गये। तब वह राज्य के सबसे कम उम्र के वित्त मंत्री बने। 2009 में वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने।

2013 तक वह राज्य की राजनीति में विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय रहे। 2016 में पिता की मृत्यु के बाद वह अपने पिता की पारंपरिक सीट तूरा से लोकसभा सदस्य चुने गये। बता दें कि पीए संगमा ने ही नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) की स्थापना की थी। इस चुनाव में NPP ने बढ़िया प्रदर्शन किया है और 19 सीटों पर जीत हासिल की है। राजनीतिक के अलावा कोरनाड संगमा सामाजिक कामों में भी सक्रिय हैं। कोनराड अपने पिता के नाम पर चलाये जा रहे पीए संगमा फाउंडेशन से भी जुड़े हैं। यह संस्था मेघालय के ग्रामीण इलाकों में स्कूल और कॉलेज चलाती है। इसके अलावा पर्यावरण से जुड़े मुद्दे पर भी इस संस्था के द्वारा काम किया जाता है। कोनराड मेघालय क्रिकेट एसोसिएशन के भी अध्यक्ष हैं। उनकी बहन अगाथा संगमा यूपीए-2 के दौरान केन्द्रीय मंत्री थी।

कोनराड संगमा ने राज्यपाल गंगा प्रसाद से मिलकर राज्य में नयी सरकार बनाने का दावा पेश किया है। 60 सदस्यों वाली विधानसभा में उन्होंने 34 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। इनमें एनपीपी के 19, यूडीपी के 6, एचएसपीडीपी के 2 और भाजपा के 2, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के 4 विधायक शामिल हैं। साथ ही इस गठबंधन को एक निर्दलीय विधायक का भी साथ हासिल है।


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