रविवार, 4 मार्च 2018

सूरतगढ से कांग्रेस टिकट किसे मिल सकता है?

कौन है दावेदार?

- करणीदानसिंह राजपूत-

सूरतगढ़ के पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


पिछले काफी समय से यहां मांग चल रही है कि जाट जाति में से कैंडिडेट खोजने के साथ ही अन्य जातियों में भी कैंडिडेट की खोज की जाए।


 कांग्रेस इस बार कोई नया चेहरा उतारना चाहती है।


 पुराने देखे भाले चेहरों के बजाय नए चेहरे पर दांव लगाया जाएगा ताकि यह सूरतगढ़ सीट कांग्रेस की झोली में चली आए।


 कांग्रेस के गैर जाट कार्यकर्ता काफी समय से यह प्रयास कर रहे हैं कि अन्य समुदाय के बीच में से भी पार्टी का कैंडिडेट उतारा जाए।


 सूत्र के अनुसार कांग्रेस पार्टी आने वाले चुनाव के लिए जन भावनाओं को मुख्यरूप से सामने रखते हुए कार्य करेगी।


सूरतगढ़ से सिख समुदाय, अरोड़ा व किसी अन्य समुदाय में से टिकट दे सकती है।


पूर्व में यहां कांग्रेस की ओर से बिश्नोई जाट दो समुदायों को विशेष रूप से प्रमुखता दी हुई है।


 जाट समुदाय वैसे यहां राजा राम साईं, चौधरी मनफूल सिंह भादू गंगाजल मील व बिश्नोई समुदाय से सुनील बिश्नोई और उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी बिश्नोई को प्रमुखता रही है।


सुनील बिश्नोई ने 4 बार चुनाव लड़ा दो बार चुनाव लड़ा दो बार जीते दो बार हारे।

 विजयलक्ष्मी ने दो बार चुनाव लड़ा एक बार जीती एक बार हारी। एक ही परिवार ने 30 साल तक यहां क्षेत्र पर कब्जा जमाए रखा रखा।

 इससे पूर्व इस क्षेत्र में भादू परिवार का विशेष कब्जा रहा 1952 में मनफूल सिंह भादू व 1962 और 1967 में मनफूल सिंह भादू इस इलाके सेे विजई रहे। 1957 में एक बार राजा राम  साईं को विधायक चुना गया।


इस प्रकार से देखा जाए तो इस क्षेत्र में जाट और बिश्नोई परिवारों का ही वर्चस्व रहा था।

सन 2008 में गंगाजल मील कांग्रेस की टिकट पर जीते लेकिन 2013 में जनता ने उन्हें तीसरे क्रम पर पहुंचा दिया। मील परिवार अभी भी टिकट की ट्राई करने में लगा हुआ है,मगर जनता मील के नाम पर उत्सुक नहीं है।


 गंगाजल मील ने 2003 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से पीलीबंगा सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा से नाराज होकर स्वतंत्र रूप से लड़ने वाले रामप्रताप कासनिया से मात खाई।


 इस क्षेत्र में जो सूरतगढ़ तहसील कहलाती है लोगों ने भाजपा और कांग्रेस में रामप्रताप कासनिया गंगाजल मील और राजेंद्र सिंह भादू को ही 15 सालों से देखा है। ये तीनों एक दूसरे का विरोध भी नहीं करते।

लोगों का मानस है कि कांग्रेस पार्टी इस बार अपनी सीट को हर हालत में जीतने के लिए परिवर्तन करें जिसमें समुदाय का परिवर्तन भी हो और नया प्रत्याशी कोई मैदान में आए। पिछले 15 सालों से जो लोग यहां चर्चा में रहे हैं, उनको जनता इस 2018 के चुनाव में देखने को उत्सुक नहीं है।

चाहे भाजपा हो चाहे कांग्रेस हो।


दोनों पार्टियों में लोग नए चेहरों को देखना चाहते हैं । 


भाजपा की राजनीतिक स्थिति बहुत कमजोर नजर आती है ऐसी स्थिति में कांग्रेस का नया चेहरा लोगों को प्रभावित कर सकता है।


राजस्थान के तीन उपचुनाव कांग्रेस ने जीते जो 17 विधानसभा क्षेत्र में हुए। इस परिवर्तन को नजर में रखते सूरतगढ़ पर खास नजर है।

 सूरतगढ़ से स.हरचंदसिंह सिद्धु वरिष्ठ वकील का भी दावा है।सिद्धु चार बार चुनाव लड़ चुके हैं। दो बार जीते दो बार हारे।  पहली बार जनता दल से जनतापार्टी की टिकट पर बाद में कांग्रेस टिकट पर जीते। बीस पच्चीस सालों से कांग्रेस में हैं। कुछ सालों से टिकट के लिए संघर्ष कर रहे बलराम वर्मा भी दावेदार हैं। युवा कांग्रेस के गगनदीपसिंह विडिंग और पुराने स.परमजीत सिंह रंधावा के अलावा जमींदारा पार्टी त्याग कर आए अमित कड़वासरा भी दावेदार हैं। अमित कड़वासरा परिवार पुराना कांग्रेसी है।

इनके अलावा भी नये लोग सामने आ सकते हैं।


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