मंगलवार, 27 मार्च 2018

वसुंधराराजे की जनसंवाद यात्रा-नाराज लोग व नाखुश कार्यकर्ता


- करणीदानसिंह राजपूत -

 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की तीन दिवसीय श्री गंगानगर जिले की यात्रा से कहीं भी प्रसन्नता दृष्टिगोचर नहीं हो रही।

भारी विरोध और ना खुशी के स्वर सभी और से से प्रगट हो रहे हैं।भारतीय जनता पार्टी के पुराने कार्यकर्ता भी नाराज नजर आ रहे हैं और यह नाखुशी सड़कों पर उजागर हो रही है। नाखुशी का आलम यह है कि भाजपा के कार्यकर्ता वसुंधरा के आगमन की तैयारियों से दूर अपने अपने निजी कामों में लगे हुए आलोचनात्मक बातें करते नजर आ रहे हैं। 

वसुंधरा राजे भारी पुलिस और सुरक्षा बंदोबस्त के घेरे में जनसंवाद से आखिर किसको प्रसन्न कर पाएगी? कार्यकर्ताओं का मानस रूष्ट होने का कारण यह है कि कुछ नियत किए हुए कार्यकर्ता ही वसुंधरा राजे के दर्शन कर पाएंगे। यह कार्यकर्ता विधायक और संगठन पदगधिकारियों  की ओर से चुने हुए कार्यकर्ता होंगे । यह कार्यकर्ता हांजी हांजी कहने वाले होंगे और सच्चाई को किसी भी हालत में वसुंधरा राजे के समक्ष नहीं रखने वाले होंगे। सूची बनाते वक्त ही यह तय हो रहा था कि जबान वाले और लिखने वाले वाले कार्यकर्ताओं को दूर रखा जाए या इस तरह से समझा दिया जाए कि वे वसुंधरा राजे के आगे मौन व्रत रखेंगे। कुछ कार्यकर्ता  बोलेंगे जो नीतियों का बखान करेंगे व अच्छा बताएंगे। 

श्रीगंगानगर और जुड़े हुए हनुमानगढ़ जिले के किसान पिछले कई सालों से सिंचाई पानी और फसलों के मूल्यों को को लेकर को लेकर नाराज हैं। अभी भी यात्रा के समय भी किसानों के धरना प्रदर्शन और आरोप चल रहे हैं।

 वसुंधरा राजे जयपुर से चलकर आएगी लेकिन शहरों से 10- 11 किलोमीटर दूर मैरिज पैलेसों में उनका जनसंवाद कार्यक्रम होगा। इस प्रकार के जनसंवाद से केवल दौरे का कार्यक्रम ही पूरा हो पाएगा। इससे न तो वसुंधरा राजे को लाभ होगा और न ही भारतीय जनता पार्टी को लाभ होगा।  आगामी चुनावों में खड़े होने वाले प्रत्याशियों को  भी कोई लाभ नहीं होगा। 

जनता बेहद नाराज है और उस नाराजगी में भाजपा के पुराने कार्यकर्ता भी शामिल हो गए। इस बुरी स्थिति का पता दौरे के बाद समीक्षा में मालूम पड़ना चाहिए था लेकिन दौरे से पहले ही यह मालूम पड़ रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के ताबूत में वसुंधरा राजे का यह दौरा आख़िरी कील साबित होगा। जब कार्यकर्ता ही नाराज हो तब आम जनता कैसे खुश हो सकती है? 

इलाके के चुने हुए जनप्रतिनिधियों ने कभी भी कार्यकर्ताओं से मेल मिलाप नहीं रखा। जन संवाद कार्यक्रम में स्थिति और ज्यादा बिगड़ जाएगी। कार्यकर्ताओं का जो रूख नजर आ रहा है उससे लगता है कि ऐन चुनाव के वक्त नाराज कार्यकर्ता कहेंगे जिनसे जनसंवाद किया गया था उन्हीं को बूथ पर लगा दिया जाए और चुनाव का कार्य करवा लिया लिया जाए। जब ऐसी स्थिति पूर्व में ही नजर आने वाली हो तो समझा जा सकता है कि आने वाला चुनाव परिणाम क्या होगा?

भारतीय जनता पार्टी हाल ही के उपचुनावों में हारने के बाद झूठे रूप से मूंछ मरोड़ती हुई दावा कर रही है कि आगामी चुनाव में हमारा टारगेट 180 सीटें जीतने का है। राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सीटें हैं और भारतीय जनता पार्टी 180 सीटें जीतने का लक्ष्य रख रही है। यह लक्ष्य तब रखा जाता जब राजस्थान में कोई नाराज नजर नहीं आता लेकिन राजस्थान का चप्पा चप्पा वसुंधरा राजे से नाराज है। किसी भी जगह पर सवाल किया जाता है तो उत्तर मिलता है कि वसुंधरा राजे को आने वाले चुनाव में सबक सिखाकर रहेंगे,अगर वसुंधरा राजे को सबक सिखाया गया तो निश्चित है कि राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी सत्ता में नहीं होगी और जब भाजपा सत्ता में नहीं होगी तब भारत की महानता का मोदी का सपना बीच में लटक कर रह जाएगा रह जाएगा।

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