बुधवार, 7 मार्च 2018

राजस्थान पत्रिका स्थापना दिवस 7 मार्च ऐतिहासिक यादगार दिवस


 - करणीदानसिंह राजपूत-

 राजस्थान पत्रिका समूह आज समाचार जगत में विश्व स्तर पर  अपना स्थान बना चुका है।

 पत्रिका का स्थापना दिवस 7 मार्च मेरे लिए सदा स्मरणीय और यादगार के रूप में रहेगा।

 अजेय अमर सम्मानीय कर्पूर चंद्र कुलिश ने 7 मार्च 1956 को राजस्थान पत्रिका की शुरुआत की थी। यह दिवस पत्रिका की ओर से हर वर्ष मनाया जाता है। इस स्थापना दिवस पर मैं अनेक कार्यक्रमों में सम्मानित होता रहा हूं और भाग लेता रहा हूं। 

मेरा पत्रकारिता और लेखन स्वतंत्र होते हुए भी राजस्थान पत्रिका से 1972 से जुड़ने का मौका मिला और यह जुड़ाव 15 मई 2009 तक निरंतर चलता रहा।

आज भी विभिन्न स्तरों पर यह जुड़ाव कायम है।

 राजस्थान पत्रिका से मैंने कड़वा मीठा सच स्तंभ में और तीर निशाने पर व अन्य स्तंभों पर राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त किए। एक प्रकार से पुरस्कार प्राप्त करने का भी यह इतिहास बना।

कड़वा मीठा सच स्तंभ बहुत ही महत्वपूर्ण और सर्वाधिक पठनीय स्तंभ रहा जिसकी शुरुआत  सन 1990 में हुई। 

इस स्तंभ की शुरुआत वर्ष में घग्घर नदी और उसकी कृत्रिम झीलों पर मेरा एक लेख प्रकाशित हुआ जो जजों की कमेटी के द्वारा राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया। जयपुर में  7 मार्च 1991 को जयपुर से कुछ दूरी पर महारानी सिसोदिया गार्डन में यह समारोह आयोजित हुआ था जिसमें मुझे सम्मानित किया गया।

 माननीय कर्पूर चंद्र कुलिश उस समारोह में मेरे पुरस्कार ग्रहण करते वक्त तालियां बजा रहे थे। उन्हें बहुत खुशी महसूस हो रही थी। मैं पत्रिका में उस दिन विशेष मेहमान के रूप में उपस्थित था और केसरगढ़ मैं स्थापित पत्रिका का संपूर्ण भवन मुझे दिखाया गया। मशीनें दिखाई गई कंप्यूटर कक्ष दिखाए गए और संपूर्ण स्टाफ से भेंट करवाई गई। मेरे लिए बहुत बड़ा यादगार का दिन रहा।

 कड़वा मीठा सच स्तंभ में सन 1991 में मैंने अनेक लेख लिखे जिनमें इंदिरा गांधी नहर की श्रंखला बहुत ही महत्वपूर्ण थी जिसकी 12 किश्तें प्रकाशित हुई थी।  उसके प्रकाशन के समय राजस्थान में मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत थे और इस सरकार को महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े तथा भ्रष्टाचार में लिप्त अनियमितताओं में लिप्त अभियंताओं व अन्य स्टाफ के विरुद्ध कार्यवाही करनी पड़ी थी। माननीय विजय भंडारी राजस्थान पत्रिका के संपादक की ओर से पत्रिका प्रगति की ओर एक पुस्तक का प्रकाशन हुआ उसमें मेरा और मेरी राजस्थान नहर की श्रंखला का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। 

मेरी यह श्रृंखला निर्णायक समिति की ओर से राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार के लिए चुनी गई। यह पुरस्कार मुझे 7 मार्च 1992 को जोधपुर के उम्मेद पैलेस गार्डन में प्रदान हुआ। संध्या के समय यह समारोह आयोजित हुआ जिसमें माननीय कर्पूर चंद्र कुलिश भी शामिल थे।

 पत्रकारों के बीच कुलिश जी ने कहा मैं तुम्हारे हर लेख को पढ़ता हूं। मेरे लिए यह बहुत बड़े गौरव की बात थी। राजस्थान पत्रिका के संपादक की ओर से कहे गए शब्द बहुत ही महत्वपूर्ण थे। उस समय कुलिश जी के साथ एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाया गया।

 राजस्थान पत्रिका में मुझे बहुत ही सम्मान मिलता रहा है। कड़वा मीठा सच स्तंभ में मैंने सन 1993 में राजस्थान की शिक्षा प्रणाली को चुनौती देते हुए एक लेख लिखा जो दो किश्तों में प्रकाशित हुआ। इस लेख को निर्णायक समिति ने अत्यंत महत्वपूर्ण माना और राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार के लिए चुना। यह समारोह 7 मार्च 1994 को कोटा में आयोजित हुआ। इस समारोह में जब मुझे पुरस्कार प्रदान किया गया तब गुलाबचंद जी कोठारी खुशी से झूम रहे थे और तालियां बजा रहे थे। यह कार्यक्रम सुबह हुआ था। 

कड़वा मीठा सच स्तंभ में सन 1996 में राजस्थान की चिकित्सा प्रणाली पर मेरा एक लेख चार श्रृंखलाओं में प्रकाशित हुआ। चयन समिति ने राजस्थान राज्य स्तरीय पुरस्कार में द्वितीय श्रेणी में मेरा यह लेख चयन किया।  यह सम्मान मुझे उदयपुर में 7 मार्च की शाम को प्रदान किया गया।  होटल लेक एंड के गार्डन में आयोजित हुआ था जिसमें पत्रिका की समस्त हस्तियां विराजमान थी।

पुरस्कार और सम्मान की लगातार वर्षा मेरे पर हो रही थी।

 राजस्थान में भयानक सूखा और अकाल के समय सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना की प्रथम इकाई का लोकार्पण और द्वितीय इकाई का शिलान्यास कार्यक्रम के लिए सोनिया गांधी को आमंत्रित किया गया था। राजस्थान भयानक सूखे और अकाल में आर्थिक रूप से परेशान था।

 उस समय करीब 1 करोड़ रुपए के लगभग सोनिया गांधी की यात्रा व्यवस्था पर खर्च हुए थे। इस पर मेरा एक लेख प्रकाशित हुआ और 3 जनवरी 2003 को जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुझे सम्मानित किया गया।यह पुरस्कार दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे साहिब सिंह वर्मा ने प्रदान किया और मुझे विशेष रूप से कहा कि आपने बहुत अच्छा विषय चुना। उस दिन मेरी इच्छा माननीय कपूरचंद जी कुलिश जी से मिलने की और आशीर्वाद लेने की थी। यह इच्छा ईश्वर ने बड़े आश्चर्यजनक रूप में पूर्ण की। मैं मंच पर जब पुरस्कार ग्रहण कर रहा था तब मेरी नजर काफी दूर व्हीलचेयर पर विराजमान कुलिश जी पर पड़ी। समारोह की समाप्ति पर बड़े उत्साह के साथ में कुर्सियों के बीच में से बहुत तेजी से निकल कर कुलिश जी के पास पहुंचा। विजय भंडारी उनके पास खड़े थे। मैंने मेरे पुरस्कार प्रशस्ति पत्र कुलिश जी के आगे रखे और सिर नवाया कहा कि मुझे आज यह पुरस्कार प्राप्त हुए हैं । बड़ा की खुशी का वह अवसर था। कुलिश जी ने मेरा सिर अपने घुटनों पर रखा और मेरे सिर पर काफी देर तक हाथ फिराते रहे और पुरस्कारों के बारे में आशीर्वाद दिया। दोनों गदगद हो रहे थे। खुशी में मेरे आंसू छलक रहे थे और यही स्थिति सम्मानीय कुलिश की भी हो रही धी। उनकी भी आंखें भर आई थी। उसी समय कृष्ण कुमार 'आशु ' ने भी कुलिश जी से आशीर्वाद ग्रहण किया।

मैं पत्रिका के अनेक समारोहों में बाद में भी सम्मानित होता रहा।

 माननीय गुलाबचंद जी कोठारी ने श्रीगंगानगर कार्यालय में सन 2006 में सर्वश्रेष्ठ संवाददाता के रूप में सम्मानित किया। वह दिन भी एक इतिहास के रूप में कायम हुआ।

 राजस्थान पत्रिका का 7 मार्च का स्थापना दिवस मेरे लिए यादगार दिवस है। यह दिवस और कपूरचंद कुलिश की प्रेरणा निरंतर सत्य लिखने की ओर अग्रसर करती है।

 आज मेरा ब्लॉग 'करणी प्रेस इंडिया' अत्यंत महत्वपूर्ण विचारों लेखों और समाचारों में गिना जाता है। जनता के द्वारा पाठकों के द्वारा सराहना की जाती है। मेरा लेखन और मेरे विचार बड़े-बड़े लेखकों और पत्रकारों से प्राप्त अनुभवों के होते हैं। 

मैं 7 मार्च के दिवस पर माननीय अमर पत्रकार कुलिश जी याद कर रहा हूं।


करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़

9414381356.

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