बुधवार, 28 फ़रवरी 2018

राजस्थान मध्यप्रदेश के उपचुनावों में भाजपा की हार: सत्ता विरोधी लहर

* करणीदानसिंह राजपूत *

केन्द्र और राजस्थान व मध्यप्रदेश में भाजपा का राज होते हुए दोनों राज्यों। में उपचुनावों में लोकसभा व विधानसभा की सीटों पर हारना शर्मनाक ही माना जाएगा। 

हार भी उस कांग्रेस के सामने हुई जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी ने कांग्रेस मुक्त का नारा दिया था।

यह पराजय राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की नीति पर सीधे चोट करती हैं।

वसुंधराराजे तो अब इधर उधर भागती घूम रही हैं। यही हाल शिवराजसिंह का भी होगा। दोनों राज्यों में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। 

मध्य प्रदेश में दो सीटों के उपचुनाव ने मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार को चिंतित कर रख दिया। मुंगावली और कोलारस दोनों सीटों पर कांग्रेस ने परचम लहरा दिया। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए यह चौथा झटका है। साल के आखिर में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के साथ मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में शिवराज कैंप में बेचैनी लाजिमी है। आमतौर पर माना जाता है कि उपचुनावों में सत्ताधारी दलों का पलड़ा ही हावी रहता है। मगर, यह मान्यता राजस्थान और मध्य प्रदेश के हालिया हालिया उपचुनाव के नतीजों ने गलत साबित कर दी है।

मध्य प्रदेश में भाजपा की हार की शुरुआत 24 नवंबर 2015 से हुई। जब 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के डेढ़ साल के भीतर ही मध्य प्रदेश में भाजपा को उपचुनाव में अपनी लोकसभा सीट गंवानी पड़ी। बीजेपी के कब्जे में रही रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट उपचुनाव में कांग्रेस ने छीन ली। यह सीट बीजेपी सांसद दिलीप सिंह भूरिया के निधन पर खाली हुई थी। पार्टी ने उनकी बेटी निर्मला भूरिया पर दांव लगाया था। इस सीट पर हार इसलिए भी चौंकाने वाली थी, क्योंकि केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी की सरकार और साथ ही  सहानुभूति की लहर भी बीजेपी प्रत्याशी के लिए जीत की इबारत नहीं लिख सकी।

आमतौर पर निधन पर खाली हुई सीटों पर दल संबंधित सांसद-विधायक के घर वालों को ही प्रत्याशी बनाते हैं, ताकि चुनाव मैदान में सहानुभूति का कार्ड चल सके। खास बात है कि सीएम शिवराज सिंह चौहान ने रतलाम-झाबुआ सीट के लिए छह दिन में 27 रैलियां की थीं। इसके बाद अप्रैल 2017 में अटेर विधानसभा के उपचुनाव में भी कांग्रेस से बीजेपी को हार झेलनी पड़ी। नवंबर, 2017 में चित्रकूट विधानसभा के उपचुनाव में भी कांग्रेस ने परचम लहराया। चित्रकूट में कांग्रेस उम्मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने भाजपा उम्‍मीदवार शंकर दयाल त्रिपाठी को 14,333 वोटों से हराया था।

इससे पहले इसी साल दो फरवरी को राजस्थान उपचुनाव मे बीजेपी को कांग्रेस के हाथों अलवर और अजमेर लोकसभा सीट तथा मांडलगढ़ विधानसभा सीट गंवानी पड़ी थी।अलवर सीट से कांग्रेस उम्‍मीदवार करण सिंह यादव ने जहां भाजपा के जसवंत सिंह यादव को 1,56,319 वोट से हराया था, वहीं अजमेर में कांग्रेस के रघु शर्मा ने जीत दर्ज की है। जबकि मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक धाकड़ ने भाजपा के शक्ति सिंह को 12,976 मतों से हराया था। सियासी जानकार दोनों राज्यों में बीजेपी की हार के पीछे सत्ताविरोधी लहर( एंटी इन्कमबेंसी) और पार्टी के अंदर आंतरिक असंतोष को वजह मानते हैं।


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