गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

पुलिस की कई मजबूरी- गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया

22-2-2018.

कसानों के प्रदर्शन घेराव घोषणा बाबत विधानसभा में गृह मंत्री कटारिया ने कहा कि यह गंभीर मसला है। सभी को लोकतंत्र में विरोध करने और अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन सच्चाई तो ये है कि पुलिस की कई तरह की मजबूरी है। राजस्थान उच्च न्यायालय के 4 जुलाई 2017 को जारी अंतरिम आदेश में प्रशासन को पांबद किया गयया था कि जयपुर में कार्य दिवस के दौरान विरोध प्रदर्शन, रैली, जुलूस नहीं हो। 8 दिसम्बर 2017 को संशोधित आदेश में राजनीतिक व अन्य रैलियों को कार्य दिवस में दोपहर 12 से लेकर 4 बजे तक करने की छूट दी गई। 17 फरवरी को किसान सभा के संयुक्त सचिव संजय माधव ने किसान महापड़ाव की घोषणा की। महापड़ाव का अर्थ है, अनिश्चितकालीन धरना। वहीं कोर्ट के फैसलेे का पालन करना जरूरी है कि महापड़ाव नहीं हो।

किसानों ने अपने महापड़ाव के लिए न तो स्थान बताया न यह बताया कि कितने घंटे प्रदर्शन करेंगे। ऐसे में जयपुर में महापड़ाव संभव नहीं होगा। इसके चलते पुलिस विभिन्न स्थानों पर किसानों को रोक रही है और गिरफ्तारी भी कर रही है। अब तक 179 लोगों को विभिन्न धाराओं में गिरफतार किया है। 17 लोगों अपनी जमानत पर रिहा हो गए। किसान यदि कह देंगे कि महापड़ाव नहीं होगा तो पुलिस उन्हें रिहा कर देगी।


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