बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के नो गारंटी बयान पर किरकिरी

राजस्थान यंसरकार की एक बार फिर किरकिरी हो रही है। ताज़ा वाकया बना है बजट घोषणा के दिन मुख्यमंत्री  का वो विवादास्पद बयान जिसमें एक सवाल के जवाब में 'नो गारंटी' शब्द का इस्तेमाल किया गया था। अब ये मामला आलाकमान तक पहुंच गया है। सूत्रों की माने तो इस मामले में अब आलाकमान जल्द ही 'सरकार' से जवाब-तलब कर सकती है।

ये था मामला 

विधानसभा में  सोमवार 12-2-2018  को बजट घोषणा के बाद मुख्यमंत्री प्रेस वार्ता को सम्बोधित कर रहीं थीं। इस दौरान पत्रिका रिपोर्टर ने उनसे कार्यकाल के शेष रही समयावधि में इन तमाम घोषणाओं के लागू होने से जुड़ा सवाल पूछा था।

 जवाब में उन्होंने 'नो गारंटी' कहते हुए अपनी बात रखी थी। बस यही विवादास्पद जवाब अचानक से तूल पकड़ गया।

बजट घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्रीका ये बयान राजनितिक गलियारों के साथ ही हर आम और ख़ास वर्ग के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

 नेशलन मीडिया में भी सरकार के शीर्ष नेतृत्व के इस बयान पर जमकर खिंचाई की जा रही है।

ये बन रहे 'सरकार' के 'सिपहसालार'

वित्त मंत्री के 'नो गारंटी' बयान के सुर्ख़ियों में आने के बाद अब 'सरकार' बैक फुट पर नज़र आने लगी है। हर बार की तरह इस बार भी विवाद गहराने पर सरकार के 'सिपहसालार' बने हैं कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ और बीजेपी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी।

ये दे रहे दलीलें 

संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। उनके कहने का यह मतलब था कि जो बड़ी घोषणाएं और हजारों करोड़ रुपए की हैं, उनमें तो समय लगता ही है और बाकी सभी बजट घोषणाएं समय पर पूरी हो जाएंगी।

वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि बयान को गलत तरीके से लिया गया है। उनके कहने का यह मतलब था कि वे काम करने में विश्वास रखती है। अब तक जितने बजट पेश किए गए, सारी घोषणाएं पूरी हुई हैं।

 


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें