मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

कांग्रेस नेता जगदीश टाईटलर को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग


दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने नवंबर 84 के दंगों के मामले में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।


कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने एक स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि टाइटलर ने 1984 में कथित तौर पर 100 सिखों के कत्ल की बात स्वीकार की है।


जीके ने संवाददाता सम्मेलन में 5 वीडियो क्लिप जारी किए। उन्होंने कहा कि यह वीडियो क्लिप उनके घर किसी अज्ञात व्यक्ति ने भेजी है।

टाइटलर ने किया था सिखों की हत्या

जीके ने कहा कि वीडियो में टाइटलर स्वयं कह रहे हैं कि उन्होंने 100 सिखों का कत्ल किया है पर कुछ नहीं हुआ, जांच जारी है। यह टाइटलर का इकबालिया जुर्म है।

जीके ने कहा कि अगर अब जांच एजेंसियों ने 24 घटें के भीतर टाइटलर को गिरफ्तार नहीं किया, तो हम पुलिस मुख्यालय का घेराव करने पर मजबूर होंगे। अकाली दल इस मसले पर चुप नहीं बैठेगा, जरूरत पड़ने पर अकाली सांसद इस मसले को संसद में भी उठाएंगे।

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कुछ ही दिन पहले मोदी सरकार के अंतर्गत 1984 के सिख दंगों के मामले में कुछ केस को उच्च न्यालय में दोबारा से खोला गया और हाई कोर्ट के एक जज के तहत एक नई कमेटी का गठन किया गया जो इस मुद्दे पे जांच करेगी|तभी से ही कांग्रेस के हाव भाव बदले बदले नज़र आ रहे है और कांग्रेस को गहरा झटका लगा है|


तभी से ही कांग्रेस नई नई चालें चल रही है|इसी के बाद ही सुप्रीम कोर्ट के चार न्याधिशों ने कांग्रेस के आदेश पे मुख्य न्याधीश पर आरोप लगाये थे क्यूँ की वे इन सब मुद्दों की जांच जो कर रहे है और कांग्रेस के काले कारनामे दुनिया के सामने आ रहे है|कांग्रेस अब इसमें बुरी फसती हुई नज़र आ रही है|


हाल ही में सिख दंगों के मुख्य आरोपी कांग्रेस नेता जगदीश टाईटलर ने इस बात का खुलासा किया था की तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दंगों के वक्त हालात का जायजा लेने के लिए उनके साथ उत्तरी दिल्ली के कई चक्कर लगाए थे| 

अब कांग्रेस को एक और बड़ा झटका देते हुए इसमें मुख्य रहे आरोपी कांग्रेस नेता जगदीश टाईटलर ने अपना गुना कबूल कर लिया है|"जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है"| कांग्रेस अपने द्वारा किये हुए गुनाहों के दाग कभी नही धो सकती|कांग्रेस को उसके किये और सिखों पर किये इस नरसंहार की कीमत चुकानी होगी|


1984 के सिख दंगे और सिखों पर हुए नरसंहार की दर्द भरी दास्ताँ


31अक्टूबर 1984 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगा भड़क गए| देशभर में सिखों के घरों और उनकी दुकानों को लगातार हिंसा का निशाना बनाया गया।

दिल्ली में खासकर मध्यम और उच्च मध्यमवर्गीय सिख इलाकों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया। राजधानी के लाजपत नगर, जंगपुरा, डिफेंस कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, महारानी बाग, पटेल नगर, सफदरजंग एनक्लेव, पंजाबी बाग आदि कॉलोनियों में हिंसा का तांडव रचा गया। गुरुद्वारों, दुकानों, घरों को लूट लिया गया और उसके बाद उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। इंदिरा गांधी के मरने के बाद प्रधानमंत्री बने उनके बेटे राजीव गांधी ने हिंसा के जवाब में कहा कि जब कोई मजबूत पेड़ गिरता है तब उसके आसपास की धरती हिलती ही है।

राजीव गाँधी का ये बयान आग में घी की तरह काम कर रहा था लोगोँ को इशारा मिलना काफ़ी था। कुछ लोगोँ ने बाक़ायदा रजिस्टर लेकर दिल्ली के घरों में जा जाकर उनकी पहचान करनी शुरू कर दी ताकि कोई भी सिख परिवार उनके इस कोप से बच न सके। उस वक्त सिखों के परिवार पर किये गये जुल्मों से रूह भी काँप गयी होगी। गर्भवती महिलाओँ को पेट के बल लिटाकर उसके ऊपर दंगगाई कूदने लगे। जवान लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया और पुरुषों को टायर का हार डाल कर जला दिया गया।

इतना भीभत्स कांड होने के बावजूद आज 34 वर्षो से सिख समुदाय को इंसाफ नहीं मिल पाया है। किसी भी आरोपी को सजा नहीं दी गयी।पर कहते है की हर गुनहगार को उसके किये की सज़ा जरुर मिलती है|सच की हमेशा जीत होती है और इन्साफ जरुर एक दिन दरवाज़ा खटखटाता है।


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