रविवार, 4 फ़रवरी 2018

जनता व कार्यकर्ताओं का गुस्सा कम करने को वसुंधरा बजट में क्या देगी?

- करणी दान सिंह राजपूत- 

भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार के अंतिम वर्ष का बजट सत्र सोमवार 5 फरवरी 2018 से शुरू होगा।

 सरकार का कार्यकाल अब सिर्फ कुछ महीनों का ही बाकी रह गया है, फिर उपचुनावों में करारी हार और ऊपर से दिनों दिन सामने आते भ्रष्टाचार के मामलों ने शीर्ष नेतृत्व के लिए यह सत्र मुश्किल होगा।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती और उप चुनाव जीत के बाद तीखे तेवर लेकर विधानसभा में प्रवेश करते कांग्रेस के विधायक होंगे। 

इसके अलावा चुप रहने वाले भाजपा विधायक भी शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथ लेकर वसुंधरा व मंत्रियों को परेशान कर सकते हैं, क्योंकि उपचुनाव के बाद से ही सरकार का मनोबल गिरा हुआ है।

 वसुंधरा के साथ समझे जाने वाले विधायक  भी उत्साहित नहीं नजर आ रहे हैं। सरकार आक्रामक होने की जगह बचाव की मुद्रा में दिखाई देने लगी है।

उप चुनाव में  कांग्रेस की जीत ने उसके विधायकों में जमकर उत्साह भरा है।आंकड़ों में उनकी संख्या भले ही कम है, लेकिन वे कोशिश करेंगे कि हर हाल में सरकार को इस सत्र में  कठघरे में खड़ा रखा जाए।

सरकार पर विधानसभा सत्र में अपने आप को बचा कर रखना और विपक्ष को हावी नहीं होने देने की बड़ी चुनौती होगी। फ्लोर मैनेजमेंट का जिम्मा भी एेसे मंत्रियों को देना होगा, जो विधानसभा के दौरान परिपक्वता से सत्र को चलाने में कामयाब हो जाए, क्योंकि कांग्रेस सरकार को घेरेगी और कोशिश करेगी कि वह जनता में यह मैसेज दे कि इस सरकार ने कुछ नहीं किया।

कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि वे सदन में किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारों को रोजगार, मंत्रियों के भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाए, जिससे उसकी छवि जनता की आवाज उठाने वाली साबित हो।

 बजट घोषणाओं को पूरा नहीं होने का मामला भी सदन में उठाया जाएगा।

इस विधानसभा में ना सिर्फ विपक्षी, बल्कि अपने ही अपनों से नाराज हैं।

 विधायक घनश्याम तिवाड़ी, नरपत सिंह राजवी समेत एेसे कई विधायक हैं, जो सरकार और मंत्रियों से नाराज चल रहे हैं। एेसे में उनकी कोशिश रहेगी कि सरकार के कामकाज को कठघरे में खड़ा किया जा सके। कई अन्य विधायक भी सरकार को घेरनेे की कोशिश करेंगे।

सरकार इस सत्र के दौरान ही अपना आखिरी बजट पेश करेगी। एेसे में सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौति जनता की उम्मीदें पूरी करना होंगी। उप चुनाव में जिस तरह से भाजपा की हार हुई, उससे जनता ने यह साफ मैसेज दे दिया था कि उनके काम नहीं हो रहे और उनकी सुनवाई नहीं हो रही। एेसे में बजट में कुछ एेसा देना होगा, जिससे जनता के गुस्से को कम किया जा सके। 

 

 

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