गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए धार्मिक स्थलों नियमन क्यों? हाईकोर्ट ने पूछा

राजस्थान प्रदेश में सरकारी जमीन पर बने धार्मिक स्थलों को नियमित करने की नीति को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है।  

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब राज्य में धर्मस्थल अधिनियम, 1954 लागू है तो सरकार अवैध रूप से बने धार्मिक स्थलों को जहां है, जैसे हैं, के आधार पर नियमित करने की नीति कैसे बना सकती है? इसके साथ ही अदालत ने सरकार को सरकारी भूमि पर अनधिकृत रूप से बने धार्मिक स्थलों की सूची भी पेश करने को कहा है।


मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी की खंडपीठ ने यह आदेश लोक संपत्ति संरक्षण समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाकर्ता समिति के पीएन मैंदोला ने अदालत को बताया कि वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को सार्वजनिक स्थानों, सड़क, सुविधा क्षेत्र और सरकारी कार्यालयों सहित पार्क आदि में बने धार्मिक स्थलों की सूची तैयार करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा था।

याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में केबीनेट प्रस्ताव पारित कर धार्मिक स्थलों को जहां हैं वहीं नियमित करने की नीति लागू कर दी, जबकि प्रदेश में धर्मस्थल अधिनियम, 1954 लागू है। ऐसे में राज्य सरकार मूल कानून के विपरीत नीति नहीं बना सकती है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार को जवाब पेश करने के लिए एक माह का समय दिया है।

साभार (अमर उजाला 14-2-2018.)

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