शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

बीजेपी के 15 मंत्री और 14 विधायक भी तो उपचुनाव में हारे


राजस्थान के  अलवर, अजमेर लोकसभा क्षेत्र और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव के नतीजे 1-2-2018 को आ गए हैं। 

वहीं भाजपा के तीनों प्रत्याशियों ही नहीं हारे, बल्कि 15 मंत्रियों व 14 विधायकों को भी शिकस्त मिली है। वह इसलिए कि भाजपा को जिताने का दारोमदार इन्हीं पर था। राज्य सरकार की एंटी इनकमबेंसी व केंद्र के जीएसटी-नोटबंदी जैसे फैसले भी हार की वजह रहे। तभी तो गांवों में ही नहीं, शहरों में भी भाजपा पिछली बढ़त बरकरार नहीं रख सकी।

- कांग्रेस ने जिस तरह से भाजपा को पटखनी दी, उससे इन मंत्रियों के कद और आगामी चुनाव में मौजूदा विधायकों के टिकट पर संकट खड़ा हो सकता है।

- यह इसलिए भी होगा क्योंकि अजमेर और अलवर लोकसभा क्षेत्र की 8-8 सीटों में से 7-7 सीटें भाजपा के पास हैं और कोई भी विधायक अपने क्षेत्र में कांग्रेस की बढ़त नहीं रोक पाया।

- हर विधानसभा सीट पर भाजपा ने एक-एक मंत्री को प्रभारी बनाया, लेकिन ये फौज भी बेअसर रही।

- अजमेर संसदीय क्षेत्र की भाजपा के कब्जे वाली सात सीटों के विधायकों में से दो मंत्री व दो संसदीय सचिव हैं।

- अलवर में खुद श्रम मंत्री डॉ. जसवंत प्रत्याशी थे। यहां भी भाजपा के कब्जे वाली सभी सात सीटों पर कांग्रेस को लीड मिली है। मांडलगढ़ में यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी प्रभारी थे।

- उधर, हार के कारणों पर मंथन के लिए भाजपा मुख्यालय में शुक्रवार को मीटिंग रखी गई है।

जीत का नायक

- विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे इस उपचुनाव में तीनों सीटें भाजपा के कब्जे में थीं और तीनों कांग्रेस ने छीन ली।

- उपचुनाव प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के नेतृत्व में लड़ा गया, ऐसे में जीत का नायक भी उन्हें ही बताया जा रहा है।

- इस सियासी उलटफेर ने न केवल पायलट के कद में बढ़ोतरी की है, बल्कि अजमेर से चुनाव नहीं लड़ने को लेकर उन पर उठे सवालों पर भी लगाम लगी है।

- पायलट ने अजमेर तो जिताया ही, अलवर और मांडलगढ़ भी जीता।

भाजपा के इन मंत्री-विधायकों पर गिर सकती है हार की गाज

अलवर लोकसभा सीट:

- 8 विधानसभा सीट हैं यहां

- 7 भाजपा के कब्जे में हैं

- 6 मंत्री, 1 दर्जा प्राप्त मंत्री

- 7 विधायकों के पास थी जिम्मेदारी

ये मंत्री : जल संसाधन मंत्री रामप्रताप, सामान्य प्रशासन मंत्री हेम सिंह भड़ाना, वन मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, खाद्य मंत्री बाबूलाल वर्मा, खान मंत्री सुरेंद्र पाल, पीएचईडी मंत्री सुरेंद्र गोयल, उद्योग मंत्री के अलावा दर्जा प्राप्त मंत्री रोहिताश्व पर जिम्मेदारी थी।

ये विधायक : रामगढ़ से विधायक ज्ञानदेव आहूजा, अलवर शहर से बनवारी लाल सिंघल, मुंडावर से धर्मपाल चौधरी, किशनगढ़बास से रामहेत यादव, अलवर ग्रामीण से जयराम जाटव, तिजारा से मामन सिंह व खुद प्रत्याशी डॉ. जसवंत बहरोड़ विधायक।

अजमेर लोकसभा सीट

- 8 विधानसभा सीट हैं यहां

- 7 भाजपा के कब्जे में हैं

-6 मंत्री, 2 दर्जा प्राप्त मंत्री

- 7 विधायकों के पास थी जिम्मेदारी

ये मंत्री : पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान, स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण, पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी, देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवा, सहकारिता मंत्री अजय सिंह के अलावा दर्जा प्राप्त मंत्री मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर व उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़ को जीत दिलाने का जिम्मा सौंपा गया था।

ये विधायक : पुष्कर से सुरेश रावत, केकड़ी से शत्रुघ्न गौतम, किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी, मसूदा से सुशीला कंवर, अजमेर दक्षिण से अनीता भदेल, अजमेर उत्तर से और दूदू से प्रेमचंद बैरवा के पास चुनाव की जिम्मेदारी थी।

मांडलगढ़

यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी यहां प्रभारी थे। यह सीट भाजपा के कब्जे में थी, अब कांग्रेस के हाथ में गई। यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के वोटों में सेंध लगाने का काम उसी के बागी प्रत्याशी ने किया, लेकिन भाजपा अपने सियासी समीकरण नहीं साध पाई।

नतीजों के सियासी मायने

भाजपा के लिए

1. भाजपा के सभी विधायकों के इलाकों में पार्टी हारी। विधानसभा चुनाव पर इसका असर पड़ेगा। मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरे उतारे जा सकते हैं। मंत्रिमंडल व संगठन में भी बदलाव संभव। डॉ. जसवंत की हार सवाल खड़े करेगी कि उनको मंत्री बनाए रखा जाए या नहीं?

2. तीनों सीटों पर कांग्रेस की जीत सीएम वसुंधरा के लिए नई चुनौती है। पार्टी में दिल्ली-जयपुर के बीच अंदरूनी संघर्ष बढ़ सकता है।

3. प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी की भी यह हार है। अगला चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा, इस पर भी नए सिरे से मंथन हो सकता है।


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें