Friday, January 5, 2018

सजा पूरी होने​के बाद भी रिहा नहीं करने पर हाईकोर्ट नाराज-तुरंत रिहाई का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा पूरी होने के बावजूद एक कैदी को दस माह तक रिहा नहीं करने पर नाराजगी जताई व तत्काल रिहा करने को कहा।अदालत ने दोषी अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की इच्छा भी जताई है।

इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह राज्य सरकार से क्षतिपूर्ति वसूलने के लिए अलग से याचिका दायर कर सकता है।

 न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश सुशीलसिंह पंवार की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।

 सुनवाई के दौरान महानिदेशक जेल अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की ओर से आरोपी की सभी सजाओं को साथ चलाने के गत 8 मार्च के आदेश के बाद कैदी की सजाओं को साथ चलाया गया। इसके अलावा उसे रिहा करने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है।

इस पर अदालत ने कहा कि आठ मार्च का आदेश सजा के मूल आदेश से लागू किया जाना चाहिए था। कैदी को दस माह से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया है। इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने कैदी को तत्काल रिहा करने के आदेश देते हुए दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मंशा जताई है।

याचिका में अधिवक्ता गिरिराज प्रसाद शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता चेक अनादरण के छह मामलों में जेल में बंद हैं। हाईकोर्ट ने गत 8 मार्च को आदेश जारी कर पांच मामलों की सजा एक साथ भुगतने के निर्देश दिए थे। जबकि एक मामले की सजा पूरी हो चुकी है।

याचिका में कहा गया कि सभी मामलों की सजा साथ-साथ चलने के कारण याचिकाकर्ता के पिता को मार्च 2017 में रिहा हो जाना चाहिए था। इसके बावजूद भी उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जेल डीजी को पेश होने के आदेश दिए थे।

 4.1.2018.

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