Sunday, January 7, 2018

धार्मिक स्थलों पर भी बिना अनुमति लाउडस्पीकर नहीं बजेंगे-यूपी में

लखनऊ। यूपी हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद धार्मिक स्थलों पर बिना इजाजत चल रहे लाउड स्पीकरों को लेकर यूपी सरकार गंभीर हुई है। 

प्रमुख सचिव( गृह )अरविंद कुमार ने जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर  उनके जिले में बिना  स्वीकृति के  बजाए जा रहे लाउड स्पीकरों​ की रिपोर्ट दस जनवरी तक मांगी है।

 धार्मिक स्थलों को अनुमति के लिए मौका भी दिया जाएगा और जिसका प्रोफार्मा बनाकर जिलों में भेजा गया है। 

 विदित रहे कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर 2017 को राज्य सरकार से पूछा था कि मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकर प्रशासन की लिखित अनुमति से लगाए गए हैं या नहीं? यदि नहीं, तो इन्हें हटाने के लिए सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की गई? इस पर राज्य सरकार ने अब सभी जिलों से जानकारियां जुटानी शुरू कर दी हैै।

प्रमुख सचिव (गृह ) ने निर्देश दिया है कि ऐसे धर्म स्थल या सार्वजनिक स्थल जहां नियमित लाउड स्पीकर बजाए जाते हों, उनका चिह्नीकरण राजस्व व पुलिस अधिकारियों की टीम बनाकर 10 जनवरी 2018 तक कर लिया जाए। टीम पता करेगी कितने धर्म स्थलों पर बिन अनुमति के लाउड स्पीकर बजाए जा रहे हैैं। जिन धर्म स्थलों के पास अनुमति नहीं है, उनके प्रबंधकों को 15 जनवरी से पहले अनुमति प्राप्त करने के लिए आवेदन का प्रारूप उपलब्ध कराया जाना चाहिए। 

प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए हैं कि आवेदन आएं, उनका पांच कार्य दिवस में निस्तारण किया जाए। यदि इस बीच किसी ने अनुमति प्राप्त नहीं की है, तो उनके लाउड स्पीकर 20 जनवरी तक हर हाल में उतरवा लिए जाएं। 

जुलूसों और बरातों पर भी रहेगा ध्यान

राज्य सरकार ने ध्वनि प्रदूषण को देखते हुए जुलूस और बरातों पर भी निगाह रखने के निर्देश दिए हैैं कि उनके द्वारा नियमों का पालन किया जा रहा है नहीं? यह जानकारी भी मांगी गई है कि अब तक नियमों का पालन न करने पर जुलूस या बरातों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? 

शासन के निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने भी सभी एसपी और एसएसपी को आदेश जारी कर बिना अनुमति के बज रहे लाउडस्पीकरों का ब्योरा जुटाने का आदेश दिया है। साथ ही उनपर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट में 1 फरवरी को जवाब देना है

हाईकोर्ट में इस बाबत दाखिल याचिका पर एक फरवरी को सुनवाई है जिसमें सरकार को जवाब रखना है। कोर्ट ने पूछा है कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम 2000 का पालन करने के लिए प्रदेश में क्या-क्या कदम उठाए गए हैैं।

लाउड स्पीकर का शोर 10 डेसीबल से अधिक नहीं

प्रमुख सचिव अरविंद कुमार के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए लाउड स्पीकर का शोर 10 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए। निजी स्थानों पर इसका शोर पांच डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए। 

अधिकतम ध्वनि तीव्रता की सीमा (डेसबल में)

एरिया/जोन          दिन        रात 

औद्योगिक क्षेत्र      75         70

कामर्शिलय क्षेत्र     65         55

आवासीय क्षेत्र      55         45

शांत क्षेत्र            50         40

7.1.2018.

No comments:

Post a Comment

Search This Blog