शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

श्रीगंगानगर में सरकारी मेडिकल कॉलेज:भाजपा सरकार,विधायक, दानदाता बीडी अग्रवाल, भाजपा संगठन सभी चुप



- करणीदानसिंह राजपूत -

श्रीगंगानगर में सरकारी मेडिकल कॉलेज निर्माण के अधर में होने पर सभी की चुप्पी के पीछे जो भी रहस्य, समझौता या मजबूरी हो लेकिन यह सब श्रीगंगानगर जिले की जनता का तिरस्कार है जिसका समर्थन नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सब निंदनीय है।

श्रीगंगानगर में जिला राजकीय चिकित्सालय परिसर में सूरतगढ़ रोड पर   एक बोर्ड लगा हुआ नजर आता है।इस बोर्ड पर लिखा है" निर्माणाधीन- बी.डी.अग्रवाल राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय" इसी पर कार्यक्रम शुभारंभ की तारीख 16 जून  2014 लिखा हुआ है। यह तिथि भारतीय जनता पार्टी के शासन काल की है।

यह बोर्ड अपने आप पेंट नहीं हुआ और अपने आप वहां स्थापित भी नहीं हुआ। इसके स्थापित किए जाने में भारतीय जनता पार्टी का शासन अलग नहीं था और दानदाता ने अपनी मनमर्जी से यह बोर्ड स्थापित नहीं किया। 

अब श्री गंगानगर में राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय खुलवाने की मांग को लेकर जनता आंदोलनरत है तब क्या यह बोर्ड बोल करके बताएगा? सरकारी मेडिकल कॉलेज अभी तक निर्माण शुरू नहीं होने में क्या राज है? राजस्थान की वसुंधरा सरकार श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर राजकीय स्तर पर मेडिकल कॉलेज खुलवाने में पीछे क्यों हट रही है? अगर बी डी अग्रवाल के धन से महाविद्यालय की स्थापना नहीं करवाना चाहती तो सरकारी धन से इसका निर्माण करवाया जाना चाहिए?

सरकार की स्थिति बड़ी विकट और दोगली है। एक तरफ हर छोटे कार्य तक के लिए दानदाताओं की भामाशाहों की तलाश की जा रही है।

 वर्तमान सरकार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने के लिए भी दानदाताओं की खोज कर रही है।ऐसी योजनाएं दी हुई है। चाहे स्कूल खोलना हो चाहे कि राजकीय चिकित्सालय में कोई धर्मशाला या परिसर का निर्माण करना हो कमरा बनवाना हो तब भी दानदाता की तलाश की जाती है जिसमें कुछ हजार या कुछ  लाख रूपये का ही खर्चा होता है। राजकीय स्तर पर मेडिकल कॉलेज का भवन बनाने के लिए जहां करोड़ों रुपए की आवश्यकता है वहां पर सरकार का रवैया आम जनता के सामने है।

छोटे से छोटे दान से बने निर्माण कार्य का जब शिलान्यास या शुभारंभ, लोकार्पण होता है तब संबंधित दानदाता ही उस समारोह का खर्चा वहन करता है। सत्ताधारी राजनेताओं को मंत्रियों-विधायकों आदि प्रमुख लोगों को आमंत्रित करने से लेकर समारोहों में लाए जाने तक का खर्चा उसी के सिर पर डाला जाता है। 

इसके अलावा सत्ताधारी राजनेता चाहते हैं कि संबंधित दानदाता से अलग से भी गुपचुप तरीके से भी कोई फंड प्राप्त कर लिया जाए। ऐसा होता रहा है लेकिन यह कभी सामने नहीं आता। इसका कोई समाचार नहीं बनता क्योंकि यह सब गुपचुप होता है। 

श्रीगंगानगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज कार्यक्रम भवन दानदाता की रकम से बनाए जाने का प्रस्ताव था। क्या इसमें भी कोई इस प्रकार का दिमाग काम कर रहा था? यह शंका है क्योंकि कार्यवाही बहुत आगे बढ़ जाने के बावजूद भी आज तक अधर  में लटकी रहने के पीछे कोई तो कारण है। अब इसका खुलासा तो दानदाता बी डी अग्रवाल कर सकते हैं कि सच क्या है? उनकी पुत्री कामिनी जिंदल श्री गंगानगर की विधायक जो जीती जमींदारा पार्टी के टिकट पर और राज्यसभा चुनाव में भाजपा का साथ देने के बाद से मौन धारण कर चुकी हैं। वैसे तो आगामी विधानसभा चुनाव नवंबर दिसंबर 2018 में होने वाले हैं। ऐसा लगता नहीं है कि कामिनी जिंदल दोबारा चुनाव लड़ेंगी। जमींदारा पार्टी भी श्रीगंगानगर जिले में चुनाव लड़ेगी कि उम्मीद नहीं है। अब केवल चार पांच माह का समय बाकी समझना चाहिए। कामिनी जिंदल को जब चुनाव दोबारा चुनाव लड़ना नहीं है तब जो कुछ सत्य है उसको उजागर करने में पीछे नहीं रहना चाहिए। यही स्थिति बीडी अग्रवाल की भी है।  उनको खुलासा करना चाहिए लेकिन किसी व्यापार के मामले में या किसी और कारण से भारतीय जनता पार्टी की सरकार से दबने की मजबूरी है तो दोनों का मुंह संभव है नहीं खुल पाएगा। वर्तमान में पिछले दो तीन सालों में जो हालात बने हैं उनसे आम लोगों की धारणा में दान की कुछ रकम देने के बाद भी भी.डी.अग्रवाल पर भी अंगुलियां उठ रही हैं कि वे जनता को सही स्थिति से अवगत कराने में आगे क्यों नहीं आ रहे।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार इसी वर्ष चुनाव के बीच जनता में आएगी तो उसे स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के संगठन को जो जनता के बीच घर-घर वोट मांगने के लिए जाएगा उसे भी अपना कदम आगे बढ़ा कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। श्री गंगानगर में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो चुनाव के वक्त भी किस मुंह से किन शब्दों से वोट मांगेंगे?

 यह भारतीय जनता पार्टी के जिला स्तरीय संगठन को और नगर देहात मंडल तक के कार्यकर्ताओं को,वर्तमान विधायकों प्रधानों सरपंचों पालिका अध्यक्ष को अच्छी तरह सोच लेना चाहिए कि आने वाला वक्त कितना शक्तिशाली होगा जो उनको और उनके पदों को नेस्तनाबूद कर देगा और  मजबूत कही जाने वाली सरकार एक झोंके में उड़ जाएगी।( इस क्षेत्र में हनुमान गढ़ी जिले को शामिल मान कर चलें  क्यों कि वह श्रीगंगानगर से ही अलग हुआ है और श्रीगंगानगर में खुलने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेज में शिक्षा के लिए शामिल है।)

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