सोमवार, 1 जनवरी 2018

आधी रात को पटाखे बजाने को जागे मगर भ्रष्टाचार मिटाने से दूर दिन में भी सोते रहे


- करणीदानसिंह राजपूत- 

 संपूर्ण भारत में ईसवी सन 2018 के आगमन पर लोग नए साल के स्वागत के लिए जागते रहे। पटाखे बजाने को जागे लेकिन आश्चर्य है और बड़े दुख का विषय है कि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए जो जाग होनी चाहिए वह नहीं हो रही। पटाखे बजाने वाले भ्रष्टाचार के मामले में दिन में भी सोते रहे हैं। यदि भ्रष्टाचार मिटाने के लिए जाग जाएं तो इस देश की काया पलट हों जाए। हमारे शहर और गांव चमन हो जाएं। 

 हर शहर में पूरा शहर कभी लुटेरा नहीं होता। केवल 5- 10 व्यक्ति जिनमें सत्ताधारी विशेष होते हैं व अधिकारी होते हैं । वे लोग भ्रष्टाचार करके लूट मचाते रहते हैं । 

एक लाख के करीब की जनता 5- 10 भ्रष्ट व्यक्तियों को भी सही लाइन पर लगाने के लिए कमर कस कर तैयार नहीं हो पाती।

 यह देश का दुर्भाग्य है जो व्यक्ति व सामाजिक संस्थाएं भ्रष्टाचार मिटाने के लिए कटिबद्ध हैं,काम कर रही हैं उनका विरोध किया जाता है। जबकि उनका सहयोग किया जाना चाहिए।

 उनसे ही सवाल जवाब किए जाते हैं। साथ देने को कोई तैयार नहीं होता।

कोमा में पड़े व्यक्ति के लिए आशा की जाती है कि कभी उसकी कोमा टूटेगी लेकिन जो जीते जी कोमा में पड़े हैं उनका क्या कहा जाए?

 इस देश को बदलने के लिए भ्रष्टाचार मिटाने के लिए संकल्प लेकर कार्य करने की आवश्यकता है।

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