शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

जिंदा नवजात बच्चे को मरा बताया: अस्पताल का लायसेंस रद्द



 जिंदा बच्चे को मृत बताने वाले दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का दिल्ली सरकार ने शुक्रवार  8.12.2017 को लाइसेंस रद्द कर दिया है। राज्य सरकार के पास आई शुरुआती रिपोर्ट में मैक्स अस्पताल को दोषी पाया गया था। 

सरकार ने इस रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'नवजात बच्चे को मृत बताने वाले शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस हमने कैंसल कर दिया है। यह लापरवाही स्वीकार्य नहीं थी।'

शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए एक 6 महीने की गर्भवती महिला वर्षा ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। अस्पताल ने दोनों बच्चों को मृत बताकर 'शवों' को पॉलिथिन में लपेटकर परिजनों को सौंप दिया था। बाद में अंतिम संस्कार के लिए ले जाते वक्त परिजनों ने एक बच्चे में हरकत देखी, जिसके बाद नवजात को एक दूसरे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया लेकिन कुछ दिन बाद उस नवजात की भी मौत हो गई।

दिल्ली सरकार ने पूरे मामले की जांच के बाद अब अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने पहले ही कहा था कि जांच में अगर अस्पताल दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। मृत बच्चे के परिजनों का यह भी आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर बहुत ही ज्यादा रकम की मांग की थी। 

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अस्पताल के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। मृत जुड़वा बच्चों के पिता आशीष ने अपनी शिकायत में बताया है कि मैक्स अस्पताल ने उनकी 6 महीने की गर्भवती पत्नी वर्षा के जुड़वां गर्भस्थ शिशुओं के बचने की 10-15% ही संभावना बताई थी और कहा 35,000 रुपये की कीमत के 3 इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी थी ताकि गर्भ के बचने की संभावना को बढ़ाया जा सके। इंजेक्शन लगाए जाने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि शिशुओं के बचने की संभावना 30 फीसदी तक पहुंच गई है। आशीष ने यह आरोप भी लगाया कि बच्चों को खतरे से बाहर लाने के लिए नर्सरी में रखा जाएगा जिसपर 50 लाख रुपये तक का खर्च आएगा।

आशीष द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, 'मैक्स ने शिशुओं के इलाज में लापरवाही बरती, इलाज ठीक से नहीं किया गया। एक बच्चा जिंदा था फिर भी उसे मृत बताकर पार्सल बनाकर हमें सौप दिया गया।' आरोपी डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर परिजनों और सैकड़ों स्थानीय लोगों ने लगातार कुछ दिनों तक मैक्स हॉस्पिटल के बाहर धरना भी दिया था।

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क्या अन्य अस्पतालों में डॉक्टरों को अब भी अक्ल आएगी? या जेल ही जाने पर आएगी?

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