सोमवार, 25 दिसंबर 2017

जिस धार्मिक पर्व को नहीं मानते उसकी छुट्टी भी नहीं मनाएं- छुट्टी भी बंद हो

- करणीदानसिंह राजपूत - 

भारत में विभिन्न धर्मों के त्यौहार हैं जिनको सीमित संख्या में मनाने वाले हैं और बहुत अधिक संख्या नहीं मनाने वालों की है।

अनेक लोग विदेशी व कुछ धार्मिक त्योहारों को नहीं मनाते। वे कुछ त्यौहारों को नहीं मनाने की अपीलें भी करते हैं।


 ऐसे में सबसे बड़ा सवाल भी है और सुझाव भी है। जो विचार करने को मजबूर भी करता है,अगर आप किसी त्यौंहार को नहीं मनाते तो फिर उसकी छुट्टी क्यों मनाते हैं? जवाब में कहा जा सकता है कि छुट्टी सरकार ने की और हमने मनाई? यह उत्तर शाब्दिक रूप से तो सही है लेकिन भावनात्मक रूप से झूठ भरा है। जब किसी धार्मिक त्यौंहार को मनाना ही नहीं है​, तब सरकार को मजबूर किया जाना चाहिए कि वह धार्मिक त्योंहारों की छुट्टियों को ऐच्छिक रूप प्रदान करे। जिस व्यक्ति को त्योंहार मनाना होगा वह ऐच्छिक छुट्टी प्राप्त कर लेगा। 

हमारे सरकारी कार्यालयों में बहुत ही ढीले रूप में काम होता है और ऊपर से एक वर्ष में धार्मिक त्योहारों के राजपत्रित अवकाश करीब 1 माह से अधिक के आ जाते हैं। 

 उदाहरण के रूप में किसी छोटे शहर में क्रिसमस मनाने वाले मातृ 40-50 कर्मचारी हैं फिर भी सारे केंद्र व राज्य के सभी दफ्तर बंद हो जाते हैं। बहुत से महत्वपूर्ण कार्य 1 दिन आगे खिसक जाते हैं। 

यदि इस प्रकार के आधे अवकाश भी ऐच्छिक कर दिए जाएं तो सरकारी कार्यालयों के खुलने के दिन बढ़ जाएंगे। ऐसी स्थिति जनता के लिए लाभदायक ही रहेगी।

 आम जनता संगठन और राजनीतिक संगठन सरकार को लिखें तो धार्मिक अवकाश ऐच्छिक हो सकते हैं जिसको जरुरत हो वह अवकाश प्राप्त कर ले।देश की बहुत बड़ी संख्या जिन त्यौहारों को माने केवल उनको ही राजपत्रित अवकाश कायम रखे जा सकते हैं।

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